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हर साल जैसे ही गर्मी की छुट्टियां शुरू होती हैं हवाई यात्रा करने वालों की चिंता भी बढ़ जाती है। जिन टिकटों की कीमत कुछ दिन पहले तक सामान्य होती हैं वही अचानक कई गुना महंगी दिखाई देने लगती हैं। कई लोग यह सोचते हैं कि आखिर छुट्टियों के समय ही हवाई कंपनियां किराया इतना ज्यादा क्यों बढ़ा देती हैं।

हर साल जैसे ही गर्मी की छुट्टियां शुरू होती हैं हवाई यात्रा करने वालों की चिंता भी बढ़ जाती है। जिन टिकटों की कीमत कुछ दिन पहले तक सामान्य होती हैं वही अचानक कई गुना महंगी दिखाई देने लगती हैं। कई लोग यह सोचते हैं कि आखिर छुट्टियों के समय ही हवाई कंपनियां किराया इतना ज्यादा क्यों बढ़ा देती हैं। परिवार के साथ घूमने की योजना बनाने वाले लोगों को सबसे बड़ा झटका तब लगता है जब टिकट का किराया उनके पूरे बजट को बिगाड़ देता है। असल में इसके पीछे कई कारण होते हैं। यह सिर्फ कंपनियों की मनमानी नहीं होती बल्कि मांग, मौसम, यात्रियों की संख्या और खर्च जैसी कई चीजें मिलकर किराया तय करती हैं।
गर्मी की छुट्टियों में स्कूल, महाविद्यालय और कई दफ्तरों में अवकाश का माहौल होता है। ऐसे में लोग परिवार के साथ पहाड़ों, समुद्र किनारे या दूसरे शहरों में घूमने निकलते हैं। यही वह समय होता है जब हवाई यात्रा करने वालों की संख्या बहुत तेजी से बढ़ जाती है। जब किसी चीज की मांग ज्यादा होती है और उपलब्धता सीमित होती है तो उसकी कीमत अपने आप बढ़ने लगती है। हवाई यात्रा में भी यही नियम लागू होता है। एक विमान में सीटें सीमित होती हैं लेकिन छुट्टियों में उन्हें लेने वाले लोग हजारों की संख्या में होते हैं। इसी कारण किराया बढ़ जाता है।
हवाई कंपनियां किराया तय करने के लिए एक विशेष व्यवस्था का इस्तेमाल करती हैं। इसमें शुरुआत में टिकट कम कीमत पर बेचे जाते हैं। जैसे-जैसे सीटें भरने लगती हैं वैसे-वैसे टिकट महंगे होते जाते हैं। यही वजह है कि जो लोग पहले से यात्रा की योजना बना लेते हैं उन्हें अपेक्षाकृत कम किराए में टिकट मिल जाता है। वहीं आखिरी समय में टिकट लेने वालों को कई गुना ज्यादा पैसे चुकाने पड़ते हैं।
गर्मी के मौसम में यात्रियों की संख्या बढ़ने के साथ-साथ हवाई कंपनियों का खर्च भी बढ़ता है। कई बार अतिरिक्त उड़ानों की व्यवस्था करनी पड़ती है। कर्मचारियों की संख्या बढ़ानी पड़ती है और हवाई अड्डों पर भी ज्यादा व्यवस्थाएं करनी होती हैं। इसके अलावा ईंधन की कीमतों का असर भी किराए पर पड़ता है। अगर उस समय तेल महंगा हो तो कंपनियां उसका बोझ भी टिकट के दाम में जोड़ देती हैं।
गर्मी की छुट्टियों में सबसे ज्यादा भीड़ उन जगहों पर होती है जहां लोग घूमने जाना पसंद करते हैं। जैसे शिमला, मनाली, श्रीनगर, गोवा, दार्जिलिंग और दक्षिण भारत के कई पर्यटन स्थल। इन शहरों के लिए उड़ानों की मांग अचानक बहुत बढ़ जाती है। कई बार तो सीटें कुछ ही घंटों में भर जाती हैं। ऐसे में कंपनियां किराया बढ़ा देती हैं क्योंकि उन्हें पता होता है कि लोग फिर भी टिकट खरीदेंगे।
अगर गर्मी की छुट्टियों के दौरान कोई बड़ा त्योहार या लंबा अवकाश भी पड़ जाए तो किराया और तेजी से बढ़ता है। लोग एक साथ यात्रा की योजना बनाने लगते हैं जिससे टिकट की मांग और ज्यादा हो जाती है। ऐसे समय में कई लोग मजबूरी में भी यात्रा करते हैं। कंपनियां इसी बढ़ती मांग के हिसाब से कीमत तय करती हैं।
कई लोगों को लगता है कि हवाई कंपनियां जानबूझकर लोगों से ज्यादा पैसे वसूलती हैं लेकिन सच यह है कि किराया पूरी तरह मांग और उपलब्ध सीटों पर आधारित होता है। इसे एक तरह की बदलती कीमत व्यवस्था कहा जा सकता है। जब यात्रियों की संख्या कम होती है, तब कंपनियां सस्ते टिकट देकर सीटें भरने की कोशिश करती हैं लेकिन जब सीटों की मांग बहुत ज्यादा हो जाती है तो कीमत अपने आप बढ़ने लगती है।
अगर कोई व्यक्ति गर्मी की छुट्टियों में सस्ती हवाई यात्रा करना चाहता है तो उसे पहले से योजना बनानी चाहिए। यात्रा की तारीख तय होते ही टिकट ले लेना बेहतर रहता है। इसके अलावा सप्ताह के बीच वाले दिनों में यात्रा करने पर कई बार किराया थोड़ा कम मिलता है। सुबह बहुत जल्दी या देर रात की उड़ानों में भी कुछ राहत मिल सकती है।
अब हवाई कंपनियां नई तकनीक का इस्तेमाल कर रही हैं। यात्रियों की खोज, यात्रा का समय, छुट्टियों का मौसम और सीटों की उपलब्धता देखकर किराया तुरंत बदल जाता है यानी आने वाले समय में हवाई टिकट की कीमतें और तेजी से बदल सकती हैं। इसलिए समझदारी इसी में है कि यात्रा की योजना पहले बनाई जाए ताकि जेब पर ज्यादा बोझ न पड़े।
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