गोल्ड लोन में सबसे आम विकल्प होता है हर महीने सिर्फ ब्याज चुकाना और अंत में पूरी मूल राशि जमा करना। शुरुआत में यह तरीका आसान लगता है क्योंकि हर महीने कम पैसा देना पड़ता है लेकिन इसमें एक बड़ी कमी है मूलधन कम नहीं होता और पूरी रकम पर लगातार ब्याज लगता रहता है।

अचानक पैसों की जरूरत पड़ने पर गोल्ड लोन लोगों के लिए सबसे आसान विकल्प बन जाता है। बिना ज्यादा कागजी कार्रवाई, कम समय में पैसा और लचीली शर्तों के कारण लोग इसे जल्दी चुन लेते हैं लेकिन असली परेशानी तब शुरू होती है जब लोन चुकाने का समय आता है। कई लोग सिर्फ ब्याज दर देखकर लोन ले लेते हैं जबकि असल खर्च इस बात पर निर्भर करता है कि आप लोन कैसे चुकाते हैं। सही तरीका अपनाने से आप हजारों रुपये का ब्याज बचा सकते हैं और कर्ज का बोझ भी कम कर सकते हैं।
गोल्ड लोन में सबसे आम विकल्प होता है हर महीने सिर्फ ब्याज चुकाना और अंत में पूरी मूल राशि जमा करना। शुरुआत में यह तरीका आसान लगता है क्योंकि हर महीने कम पैसा देना पड़ता है लेकिन इसमें एक बड़ी कमी है मूलधन कम नहीं होता और पूरी रकम पर लगातार ब्याज लगता रहता है। अगर लोन की अवधि बढ़ जाती है या आप समय पर मूलधन नहीं चुका पाते तो ब्याज तेजी से बढ़ता जाता है। यही वजह है कि यह विकल्प केवल तब सही होता है जब आपको पूरा भरोसा हो कि आप जल्द ही पूरी राशि चुका देंगे।
अगर आपकी आय नियमित है, तो EMI का विकल्प ज्यादा सुरक्षित और किफायती माना जाता है। इसमें हर महीने जो रकम आप देते हैं उसमें ब्याज के साथ-साथ मूलधन भी कम होता जाता है। इससे कुल ब्याज कम लगता है और लोन जल्दी खत्म हो जाता है। हालांकि EMI में हर महीने थोड़ा ज्यादा पैसा देना पड़ता है लेकिन लंबे समय में यह तरीका सस्ता साबित होता है। यही कारण है कि वित्तीय विशेषज्ञ भी EMI विकल्प को ज्यादा बेहतर मानते हैं।
कुछ लोग बुलेट रीपेमेंट का विकल्प चुनते हैं जिसमें लोन अवधि के दौरान कुछ नहीं देना होता और अंत में पूरा पैसा एक साथ चुकाना होता है। यह तरीका तब अच्छा लगता है जब भविष्य में बड़ी रकम मिलने की उम्मीद हो लेकिन अगर वह रकम समय पर नहीं मिलती तो जमा हुआ ब्याज भारी बोझ बन सकता है लोन बढ़ाने या रिन्यू करने से खर्च और बढ़ जाता है। इसलिए यह विकल्प तभी चुनना चाहिए जब आपको अपनी वित्तीय स्थिति का पूरा भरोसा हो।
गोल्ड लोन का सबसे कम इस्तेमाल किया जाने वाला लेकिन सबसे प्रभावी तरीका है पार्ट पेमेंट। अगर आप बीच-बीच में थोड़ा-थोड़ा मूलधन चुकाते रहें तो ब्याज का बोझ काफी कम हो जाता है। गोल्ड लोन की खास बात यह है कि इसमें अक्सर लचीली भुगतान सुविधा मिलती है। ऐसे में जब भी अतिरिक्त पैसा मिले उसे मूलधन कम करने में इस्तेमाल करना समझदारी होती है। जितनी जल्दी मूल राशि कम होगी उतना कम ब्याज देना पड़ेगा।
अक्सर लोग बिना किसी योजना के लोन ले लेते हैं और बाद में सिर्फ कम EMI या कम मासिक भुगतान के चक्कर में फंस जाते हैं। धीरे-धीरे लोन की अवधि बढ़ती जाती है और कुल खर्च भी बढ़ जाता है। गोल्ड लोन असल में छोटी अवधि के लिए लिया जाना चाहिए। अगर इसे लंबे समय तक खींचा जाए तो यह महंगा पड़ सकता है। इसलिए जरूरी है कि लोन लेते समय ही तय करें कि आप इसे कब और कैसे चुकाएंगे।
आखिर में, गोल्ड लोन पर पैसे बचाने का सबसे आसान नियम यही है कि मूलधन को जितना जल्दी कम किया जाए उतना बेहतर है। चाहे EMI हो, पार्ट पेमेंट हो या जल्दी पूरा भुगतान ये सभी तरीके कुल ब्याज को कम करने में मदद करते हैं। सही योजना और समझदारी से लिया गया फैसला न सिर्फ आपका कर्ज जल्दी खत्म करेगा बल्कि हजारों रुपये का ब्याज भी बचा सकता है।