फेड रेट कट की उम्मीदों के बीच सोने का भाव तेजी से ऑल-टाइम हाई के करीब पहुंच रहा है। यहां जानिए भारत और अंतरराष्ट्रीय बाजार में गोल्ड के दमदार रुझान, MCX गोल्ड और स्पॉट गोल्ड की मौजूदा कीमत, एक्सपर्ट्स की राय और आज कमोडिटी में कहां मिलेगी कमाई।

अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद ने सोने के मार्केट में नई ऊर्जा भर दी है। भारत और इंटरनेशनल दोनों जगह गोल्ड तेजी से ऊपर बढ़ रहा है और यह अपने ऑल-टाइम हाई के बेहद करीब पहुंच चुका है। कल एमसीएक्स पर सोने का भाव लगभग 1,31,000 रुपये रहा जो दिवाली से पहले बने 1,32,250 रुपये के रिकॉर्ड हाई से बस थोड़ा नीचे है। वहीं अंतरराष्ट्रीय बाजार में 2 दिसंबर की सुबह स्पॉट गोल्ड 0.22% की बढ़त के साथ 4,240 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गया। ट्रेडिंग के दौरान यह कुछ समय के लिए 4,356.50 डॉलर के छह हफ्ते के ऊंचे स्तर पर भी पहुंचा जिससे निवेशकों के बीच गोल्ड के प्रति विश्वास और मजबूत हुआ।
भारत में दिसंबर गोल्ड फ्यूचर्स भी चमके और 1.39% बढ़कर 1,31,300 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गए, जो अपने ऑल-टाइम हाई से सिर्फ 1.16% ही नीचे है। हालांकि सत्र के अंत में यह थोड़ा नरम हुआ और 1,30,721 रुपये पर बंद हुआ लेकिन समग्र ट्रेंड गोल्ड की मजबूती की ओर इशारा करता है। फेडवॉच डेटा के अनुसार दिसंबर में होने वाली फेड मीटिंग में रेट कट की संभावना 87% तक पहुंच चुकी है।
रॉयटर्स की रिपोर्ट बताती है कि फेड की पॉलिसी कमेटी में सभी सदस्य रेट कट के पक्ष में नहीं हैं लेकिन बहुमत इसके समर्थन में है। इससे मार्केट में सेंटिमेंट बुलिश बना हुआ है। 1 दिसंबर को आई ऑगमोंट बुलियन रिपोर्ट ने भी गोल्ड के आगे और चढ़ने की संभावना जताई है। उनके अनुसार गोल्ड का अगला लक्ष्य 4,345 डॉलर और फिर 4,400 डॉलर का है जबकि 4,170 डॉलर इस समय इसका मजबूत सपोर्ट जोन माना जा रहा है। भारत में भी गोल्ड का रियल-टाइम मूल्य लगातार मजबूत हो रहा है। IBJA के अनुसार 1 दिसंबर को 999 प्योरिटी वाले सोने की कीमत 1,28,800 रुपये प्रति 10 ग्राम रही जो बाजार में गोल्ड की प्रैक्टिकल वैल्यू और डिमांड को दिखाता है।
LKP सिक्योरिटीज के कमोडिटी एक्सपर्ट जतीन त्रिवेदी का कहना है कि रूस-यूक्रेन शांति वार्ताओं की उम्मीदों के बावजूद सोने में दिख रही तेजी स्पष्ट करती है कि बड़े संस्थागत निवेशक और दुनिया के सेंट्रल बैंक गोल्ड में भारी मात्रा में खरीदारी कर रहे हैं। यह व्यवहार साफ बताता है कि भविष्य को लेकर निवेशक अभी भी सावधानी में हैं और गोल्ड की सेफ-हेवन डिमांड बनी हुई है।
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