इस हफ्ते कौन से IPO में मिलेगा बंपर रिटर्न का मौका? देखें लिस्टिंग डेट्स और प्राइस

IPO This Week: 16 मार्च से शुरू हो रहे सप्ताह में कई कंपनियां अपने IPO के जरिए बाजार से पैसा जुटाने की तैयारी में हैं। इस दौरान तीन नए पब्लिक इश्यू खुलेंगे जबकि एक पहले से खुला IPO भी निवेश के लिए उपलब्ध रहेगा।

IPO Listing
IPO This Week
locationभारत
userअसमीना
calendar14 Mar 2026 11:17 AM
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शेयर बाजार में निवेश करने वालों के लिए आने वाला हफ्ता काफी दिलचस्प रहने वाला है। 16 मार्च से शुरू हो रहे सप्ताह में कई कंपनियां अपने IPO के जरिए बाजार से पैसा जुटाने की तैयारी में हैं। इस दौरान तीन नए पब्लिक इश्यू खुलेंगे जबकि एक पहले से खुला IPO भी निवेश के लिए उपलब्ध रहेगा। इसके अलावा कुछ कंपनियों के शेयर बाजार में लिस्ट होने वाले हैं जिससे निवेशकों को नए मौके मिल सकते हैं।

इस हफ्ते खुलने वाले नए IPO

आने वाले सप्ताह में कुल तीन कंपनियां अपना IPO लेकर आ रही हैं। इनमें से दो कंपनियां मेनबोर्ड सेगमेंट की हैं जबकि एक SME सेगमेंट से जुड़ी है।

GSP Crop Science IPO

यह IPO 16 मार्च को खुलेगा और 18 मार्च तक निवेश के लिए खुला रहेगा। कंपनी इस इश्यू के जरिए लगभग 400 करोड़ रुपये जुटाना चाहती है। इसका प्राइस बैंड 304 से 320 रुपये प्रति शेयर तय किया गया है और लॉट साइज 46 शेयर है। कंपनी के शेयर 24 मार्च को BSE और NSE पर लिस्ट हो सकते हैं।

Novus Loyalty IPO

यह कंपनी अपने IPO के जरिए करीब 60.15 करोड़ रुपये जुटाने की योजना बना रही है। यह इश्यू 17 मार्च को खुलेगा और 20 मार्च को बंद होगा। इसका प्राइस बैंड 139 से 146 रुपये प्रति शेयर रखा गया है और लॉट साइज 1000 शेयर है। इसके शेयर 25 मार्च को BSE SME प्लेटफॉर्म पर लिस्ट हो सकते हैं।

Central Mine Planning IPO

यह IPO 20 मार्च को खुलेगा और 24 मार्च को बंद होगा। फिलहाल कंपनी ने इसका प्राइस बैंड और लॉट साइज तय नहीं किया है। उम्मीद है कि कंपनी के शेयर 30 मार्च को BSE और NSE पर लिस्ट हो सकते हैं। पहले से खुला IPO जिसमें अभी भी निवेश का मौका एक IPO ऐसा भी है जो पहले से खुला हुआ है और निवेशकों के पास अभी भी इसमें पैसा लगाने का मौका है।

Innovision IPO

यह IPO 10 मार्च को खुला था और पहले इसे 12 मार्च को बंद होना था लेकिन बाद में इसकी तारीख बढ़ाकर 17 मार्च कर दी गई। कंपनी ने इश्यू का साइज 322.84 करोड़ रुपये से घटाकर 305.76 करोड़ रुपये कर दिया है। साथ ही प्राइस बैंड भी 521-548 रुपये से घटाकर 494-519 रुपये प्रति शेयर कर दिया गया है। इस IPO का लॉट साइज 27 शेयर है और कंपनी के शेयर 20 मार्च को BSE और NSE पर लिस्ट हो सकते हैं।

इस हफ्ते लिस्ट होने वाली कंपनियां

आने वाले सप्ताह में कुछ कंपनियों के शेयर शेयर बाजार में अपनी शुरुआत करने वाले हैं। Rajputana Stainless के शेयर 16 मार्च को BSE और NSE पर लिस्ट हो सकते हैं। Apsis Aerocom के शेयर 18 मार्च को NSE SME प्लेटफॉर्म पर लिस्ट होने की उम्मीद है। Innovision के शेयर 20 मार्च को BSE और NSE पर बाजार में एंट्री कर सकते हैं।

निवेशकों के लिए क्या है खास मौका?

IPO बाजार में नई कंपनियों के आने से निवेशकों को नए विकल्प मिलते हैं। अगर कोई निवेशक लंबे समय के लिए अच्छी कंपनियों में पैसा लगाना चाहता है तो IPO एक अच्छा मौका हो सकता है। हालांकि निवेश से पहले कंपनी के बिजनेस, फाइनेंशियल स्थिति और बाजार के हालात को समझना जरूरी है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। चेतना मंच की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

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इन 5 मिड कैप फंड्स ने निवेशकों को किया मालामाल! हुआ छप्परफाड़ मुनाफा

म्यूचुअल फंड्स निवेशकों की पहली पसंद बनते जा रहे हैं। खासकर मिड कैप फंड्स, जो मध्यम आकार की कंपनियों में निवेश करके अच्छा रिटर्न देने का वादा करते हैं लोगों का ध्यान खींच रहे हैं। अगर आप भी इस क्षेत्र में निवेश करना चाहते हैं तो मिड कैप फंड्स की पूरी समझ लेना जरूरी है।

Mutual Funds
मिड कैप म्यूचुअल फंड्स क्या हैं
locationभारत
userअसमीना
calendar13 Mar 2026 12:09 PM
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आज के समय में अपनी बचत को सही जगह निवेश करना हर निवेशक के लिए चुनौती बन गया है। कोई चाहता है पैसा जल्दी बढ़े तो कोई चाहता है जोखिम कम हो। ऐसे में म्यूचुअल फंड्स निवेशकों की पहली पसंद बनते जा रहे हैं। खासकर मिड कैप फंड्स जो मध्यम आकार की कंपनियों में निवेश करके अच्छा रिटर्न देने का वादा करते हैं लोगों का ध्यान खींच रहे हैं। अगर आप भी इस क्षेत्र में निवेश करना चाहते हैं तो मिड कैप फंड्स की पूरी समझ लेना जरूरी है।

मिड कैप फंड्स क्या हैं?

शेयर बाजार में कंपनियों को उनके आकार के हिसाब से छोटे (Small Cap), मध्यम (Mid Cap) और बड़े (Large Cap) में बांटा जाता है। मिड कैप फंड्स मुख्य रूप से मध्यम आकार की कंपनियों में पैसा लगाते हैं। ये कंपनियां भविष्य में तेजी से बढ़ने की संभावना रखती हैं। मिड कैप फंड्स में रिटर्न की संभावना ज्यादा होती है क्योंकि ये कंपनियां विकसित हो रही होती हैं। वहीं जोखिम लार्ज कैप के मुकाबले थोड़ी ज्यादा होती है लेकिन स्मॉल कैप फंड्स के मुकाबले कम होती है। यानी यह फंड जोखिम और रिटर्न के बीच संतुलन बनाने का एक अच्छा तरीका है।

कौन निवेश करे और क्यों?

मिड कैप फंड्स उन निवेशकों के लिए सही हैं जो मध्यम स्तर का जोखिम लेने को तैयार हैं। उभरती कंपनियों में पैसा लगाकर लंबी अवधि में अच्छा रिटर्न चाहते हैं। शेयर बाजार के उतार-चढ़ाव को समझते हैं। अगर आप जोखिम बिल्कुल नहीं लेना चाहते तो मिड कैप फंड्स आपके लिए सही नहीं हैं लेकिन अगर सही योजना के साथ निवेश किया जाए तो यह आपके पोर्टफोलियो के लिए शानदार साबित हो सकते हैं।

बीते एक साल में शानदार प्रदर्शन करने वाले फंड्स

पिछले 12 महीनों में कई मिड कैप फंड्स ने निवेशकों को अच्छा मुनाफा दिया है-

ICICI प्रूडेंशियल मिडकैप फंड- 24.89% रिटर्न, NAV 344.58 रुपये, एक्सपेंस रेशियो 1.03%

HSBC मिडकैप फंड- 22.74% रिटर्न, NAV 436.32 रुपये, एक्सपेंस रेशियो 0.65%

मिराए एसेट मिडकैप फंड- 19.31% रिटर्न, NAV 38.4 रुपये, एक्सपेंस रेशियो 0.56%

निप्पॉन इंडिया ग्रोथ मिडकैप फंड- 19.01% रिटर्न, NAV 4519.78 रुपये, एक्सपेंस रेशियो 0.72%

इन्वेस्को इंडिया मिडकैप फंड- 18.49% रिटर्न, NAV 204.01 रुपये, एक्सपेंस रेशियो 0.54%

ये आंकड़े दिखाते हैं कि मिड कैप फंड्स सही निवेश रणनीति के साथ बेहतर रिटर्न दे सकते हैं।

एकमुश्त निवेश या SIP?

मिड कैप फंड्स में निवेश का सबसे सुरक्षित और कारगर तरीका SIP (Systematic Investment Plan) है। इसके जरिए आप हर महीने तय राशि निवेश करते हैं।

SIP के फायदे

बाजार गिरने पर आपको यूनिट्स सस्ते में मिलती हैं। बाजार दोबारा बढ़े तो पुरानी यूनिट्स पर शानदार रिटर्न मिलता है। निवेश में अनुशासन आता है और पैसा धीरे-धीरे बढ़ता है। इसके मुकाबले Lumpsum निवेश में पूरी राशि एक बार में लगती है। यह फायदा तब होता है जब बाजार की स्थिति सही हो और जोखिम लेने की क्षमता अधिक हो।

निवेश से पहले ध्यान देने वाली बातें

  • मिड कैप फंड्स लंबी अवधि में बेहतर रिटर्न देते हैं, इसलिए कम से कम 3–5 साल का निवेश सोचें।
  • मार्केट की उतार-चढ़ाव को समझें और धैर्य रखें।
  • SIP के जरिए निवेश करने पर जोखिम कम होता है और लाभ बढ़ता है।

Disclaimer: ये आर्टिकल सिर्फ जानकारी के लिए है और इसे किसी भी तरह से इंवेस्टमेंट सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए। चेतना मंच अपने पाठकों और दर्शकों को पैसों से जुड़ा कोई भी फैसला लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकारों से सलाह लेने का सुझाव देता है।

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Nifty में गिरावट का सिलसिला जारी, क्या अब आएगा बड़ा क्रैश या मिलेगी राहत?

Stock Market: लगातार तीसरे सत्र में गिरावट देखने को मिली जिससे निवेशकों की चिंता बढ़ गई है। इसकी बड़ी वजह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ा तनाव, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली है।

Stock Market
Stock Market Today
locationभारत
userअसमीना
calendar13 Mar 2026 11:19 AM
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शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार ने एक बार फिर कमजोर शुरुआत की। लगातार तीसरे सत्र में गिरावट देखने को मिली जिससे निवेशकों की चिंता बढ़ गई है। इसकी बड़ी वजह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ा तनाव, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली है। इन सभी कारणों ने मिलकर बाजार के माहौल को दबाव में ला दिया है। ऐसे माहौल में निवेशकों और ट्रेडर्स के लिए समझदारी से रणनीति बनाना बेहद जरूरी हो गया है।

वैश्विक हालात का असर बाजार पर

दुनिया भर के बाजारों में इस समय अस्थिरता बढ़ गई है। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है और यह 2022 के बाद पहली बार 100 डॉलर के ऊपर बंद हुआ है। इसका असर सीधे शेयर बाजार पर पड़ा है क्योंकि महंगा तेल भारत जैसी आयात आधारित अर्थव्यवस्था के लिए चिंता की बात होती है। अमेरिकी बाजारों में भी कमजोरी देखने को मिली और प्रमुख इंडेक्स इस साल के नए निचले स्तर पर बंद हुए। एशियाई बाजारों में भी इसी तरह का दबाव दिखा। इन संकेतों का असर भारतीय बाजार की शुरुआत पर साफ दिखाई दिया।

विदेशी निवेशकों की बिकवाली बढ़ी

बाजार में गिरावट की एक और बड़ी वजह विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली है। हाल के सत्र में उन्होंने कैश और फ्यूचर्स सेगमेंट मिलाकर 10,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की बिकवाली की। जब विदेशी निवेशक लगातार पैसा निकालते हैं तो बाजार पर दबाव बढ़ जाता है और सेंटीमेंट कमजोर हो जाता है।

निफ्टी में क्या है ट्रेडिंग का संकेत?

मौजूदा हालात को देखते हुए निफ्टी में अभी भी दबाव बना हुआ है। तकनीकी स्तरों की बात करें तो ऊपर की तरफ कुछ अहम रेजिस्टेंस मौजूद हैं जबकि नीचे की तरफ सपोर्ट लेवल पर नजर रखना जरूरी होगा। ट्रेडिंग एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर निफ्टी कमजोर स्तरों के नीचे बना रहता है तो गिरावट का दबाव जारी रह सकता है। ऐसे में कई ट्रेडर्स उछाल आने पर भी बिकवाली की रणनीति अपना सकते हैं। हालांकि अगर बाजार कुछ अहम स्तरों के ऊपर टिक जाता है तो शॉर्ट कवरिंग की वजह से तेज उछाल भी देखने को मिल सकता है।

बैंक निफ्टी भी दबाव में

बैंकिंग सेक्टर भी इस समय कमजोर नजर आ रहा है। बैंक निफ्टी हाल के सत्र में अपने महत्वपूर्ण तकनीकी औसत से नीचे कारोबार कर रहा है। इस वजह से इसमें भी उछाल आने पर बिकवाली की रणनीति को ज्यादा सुरक्षित माना जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार जब तक बैंक निफ्टी कुछ अहम रेजिस्टेंस लेवल के ऊपर मजबूती से नहीं टिकता तब तक इसमें कमजोरी का माहौल बना रह सकता है। नीचे की तरफ कुछ अहम सपोर्ट स्तर ऐसे हैं जिन पर बाजार की नजर बनी रहेगी।

ट्रेडर्स के लिए क्या हो सकता है सही तरीका?

ऐसे अस्थिर बाजार में जल्दबाजी करने के बजाय धैर्य रखना जरूरी है। खासकर डे ट्रेडर्स के लिए यह जरूरी है कि वे साफ संकेत मिलने के बाद ही पोजिशन लें। बाजार में गैपडाउन खुलने की स्थिति में कई बार शुरुआती उतार-चढ़ाव ज्यादा होता है इसलिए जल्दबाजी नुकसान करा सकती है। अगर वैश्विक हालात में सुधार होता है या कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आती है तो बाजार में अचानक रिकवरी भी देखने को मिल सकती है। इसलिए ट्रेडिंग करते समय जोखिम प्रबंधन और सही स्तरों पर ध्यान देना बेहद जरूरी है।

डिस्क्लेमर: यूजर्स को चेतना मंच की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

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