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सोने की कीमतों में गिरावट के पीछे सबसे बड़ी वजह अमेरिकी डॉलर का मजबूत होना है। जब डॉलर मजबूत होता है तो सोना महंगा महसूस होने लगता है और इसकी मांग घट जाती है। इसके अलावा अमेरिकी बॉन्ड की यील्ड भी बढ़ रही है।

देशभर में सोने की कीमतों में जारी गिरावट ने आम खरीदार से लेकर निवेशकों तक सभी को सोचने पर मजबूर कर दिया है। शादी-ब्याह का सीजन करीब है लेकिन सोना सस्ता होने के बावजूद बाजार में उत्साह उतना नहीं दिख रहा। इसकी वजह है वैश्विक हालात, मजबूत डॉलर और बढ़ती आर्थिक अनिश्चितता जिनका सीधा असर सोने-चांदी की कीमतों पर पड़ रहा है।
सोने की कीमतों में गिरावट के पीछे सबसे बड़ी वजह अमेरिकी डॉलर का मजबूत होना है। जब डॉलर मजबूत होता है तो सोना महंगा महसूस होने लगता है और इसकी मांग घट जाती है। इसके अलावा अमेरिकी बॉन्ड की यील्ड भी बढ़ रही है। आसान शब्दों में कहें तो निवेशकों को अब बॉन्ड में ज्यादा फायदा दिख रहा है इसलिए वे सोने से दूरी बना रहे हैं। तेल की कीमतों में बढ़ोतरी और अंतरराष्ट्रीय तनाव खासकर ईरान और अमेरिका के बीच भी बाजार में अनिश्चितता बढ़ा रहे हैं जिससे सोने की खरीद कमजोर पड़ी है।
देश के अलग-अलग शहरों में सोने की कीमतों में हल्का फर्क जरूर है लेकिन ट्रेंड हर जगह गिरावट का ही है। दिल्ली में 24 कैरेट सोना करीब 1,53,690 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया है जबकि 22 कैरेट का भाव 1,40,890 रुपये है। मुंबई और कोलकाता में 24 कैरेट सोना लगभग 1,53,540 रुपये प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट करीब 1,40,740 रुपये पर बिक रहा है। चेन्नई में कीमत थोड़ी ज्यादा है जहां 24 कैरेट सोना करीब 1,54,470 रुपये और 22 कैरेट 1,41,590 रुपये प्रति 10 ग्राम है। पुणे और बेंगलुरु में भी मुंबई जैसा ही रेट देखने को मिल रहा है।
सिर्फ सोना ही नहीं चांदी की कीमतों में भी तेज गिरावट आई है। 24 अप्रैल की सुबह चांदी का भाव गिरकर लगभग 2,59,900 रुपये प्रति किलो पहुंच गया। एक दिन पहले ही इसमें करीब 5,300 रुपये की बड़ी गिरावट दर्ज की गई थी। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी चांदी कमजोर बनी हुई है जिससे घरेलू बाजार पर दबाव बना हुआ है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है क्या अभी सोना खरीदना सही रहेगा? एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर आप लंबी अवधि के लिए निवेश सोच रहे हैं तो यह गिरावट एक अच्छा मौका हो सकता है। हालांकि, शॉर्ट टर्म में कीमतों में और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। इसलिए जल्दबाजी करने के बजाय थोड़ा सोच-समझकर फैसला लेना बेहतर रहेगा।
आने वाले दिनों में सोने की कीमतें काफी हद तक अंतरराष्ट्रीय बाजार पर निर्भर करेंगी। अगर डॉलर मजबूत बना रहता है और बॉन्ड यील्ड ऊंची रहती है तो सोने पर दबाव बना रह सकता है लेकिन अगर वैश्विक तनाव बढ़ता है या आर्थिक अनिश्चितता गहराती है तो सोना फिर से मजबूत हो सकता है।
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