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सोमवार सुबह घरेलू कमोडिटी बाजार खुलते ही चांदी की कीमतों में तेज गिरावट देखने को मिली। जुलाई डिलीवरी वाली चांदी कुछ ही समय में 5,600 रुपये से ज्यादा टूट गई। बाजार खुलने के करीब एक घंटे के भीतर चांदी के भाव 2.43 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के नीचे पहुंच गए।

अगर आप सोना या चांदी खरीदने की योजना बना रहे हैं तो आपके लिए अच्छी खबर है। सप्ताह की शुरुआत में ही सर्राफा और कमोडिटी बाजार में बड़ी हलचल देखने को मिली है। सोमवार को बाजार खुलते ही सोने और चांदी की कीमतों में तेज गिरावट दर्ज की गई। चांदी के दाम कुछ ही समय में हजारों रुपये टूट गए जबकि सोना भी काफी सस्ता हो गया। आमतौर पर जब दुनिया में किसी बड़े तनाव या युद्ध जैसी स्थिति बनती है तो निवेशक सुरक्षित निवेश की ओर भागते हैं और सोने की मांग बढ़ जाती है लेकिन इस बार तस्वीर कुछ अलग नजर आ रही है। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बावजूद सोना और चांदी दोनों दबाव में दिखाई दिए।
सोमवार सुबह घरेलू कमोडिटी बाजार खुलते ही चांदी की कीमतों में तेज गिरावट देखने को मिली। जुलाई डिलीवरी वाली चांदी कुछ ही समय में 5,600 रुपये से ज्यादा टूट गई। बाजार खुलने के करीब एक घंटे के भीतर चांदी के भाव 2.43 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के नीचे पहुंच गए। चांदी में आई इस गिरावट ने उन निवेशकों को हैरान कर दिया जिन्होंने हाल के दिनों में ऊंचे स्तर पर खरीदारी की थी। हालांकि जो लोग निवेश या खरीदारी का इंतजार कर रहे थे उनके लिए यह कीमतें एक अवसर की तरह देखी जा रही हैं।
चांदी के साथ-साथ सोना भी सोमवार को कमजोर नजर आया। अगस्त डिलीवरी वाले सोने में करीब 1,800 रुपये की गिरावट दर्ज की गई। इसके बाद सोने का भाव 1.54 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के नीचे आ गया। हाल के महीनों में सोने की कीमतों में लगातार तेजी देखने को मिली थी लेकिन अब बाजार में मुनाफावसूली और वैश्विक संकेतों के कारण कीमतों पर दबाव बनता दिखाई दे रहा है। यही वजह है कि निवेशकों के बीच फिलहाल खरीदारी को लेकर मिश्रित माहौल बना हुआ है।
घरेलू बाजार में आई गिरावट का सबसे बड़ा कारण अंतरराष्ट्रीय बाजारों की कमजोरी मानी जा रही है। वैश्विक बाजार में स्पॉट गोल्ड और गोल्ड फ्यूचर्स दोनों में गिरावट दर्ज की गई है। पिछले सप्ताह भी सोने में करीब 5 प्रतिशत की कमजोरी देखी गई थी जो पिछले कई महीनों की सबसे बड़ी साप्ताहिक गिरावटों में शामिल रही। विशेषज्ञों का कहना है कि डॉलर के मजबूत होने और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड बढ़ने से सोने की चमक फिलहाल फीकी पड़ रही है। जब डॉलर मजबूत होता है तो सोने की मांग पर असर पड़ता है और कीमतों में गिरावट आ सकती है।
सोने की कीमतों में गिरावट की एक बड़ी वजह अमेरिका से आए मजबूत रोजगार आंकड़े भी हैं। वहां नौकरी के बेहतर आंकड़ों ने यह संकेत दिया है कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व भविष्य में ब्याज दरों को ऊंचे स्तर पर बनाए रख सकता है या फिर बढ़ा भी सकता है। ब्याज दरें बढ़ने पर निवेशक सोने जैसे ऐसे निवेश विकल्पों से दूरी बनाने लगते हैं जो कोई नियमित ब्याज नहीं देते। यही कारण है कि सोने की कीमतों पर दबाव बढ़ गया है।
इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने पूरी दुनिया के वित्तीय बाजारों की चिंता बढ़ा दी है। दोनों देशों के बीच हुए हमलों के बाद वैश्विक निवेशकों की नजर अब पश्चिम एशिया के हालात पर टिकी हुई है। हालांकि आमतौर पर ऐसे हालात में सोने की मांग बढ़ती है लेकिन इस बार निवेशकों का ध्यान अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों और ब्याज दरों पर ज्यादा केंद्रित दिखाई दे रहा है। यही वजह है कि भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद सोने-चांदी की कीमतों में कमजोरी देखने को मिल रही है।
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