हाल ही में यह गिरकर करीब 1,58,400 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया। इस तरह युद्ध शुरू होने के बाद से सोना करीब 3,700 रुपये प्रति 10 ग्राम तक सस्ता हो चुका है। वहीं अगर इसके रिकॉर्ड हाई की बात करें तो सोना अपने उच्च स्तर 1,93,096 रुपये से लगभग 34,000 रुपये से ज्यादा नीचे ट्रेड कर रहा है।

दुनिया में जब भी युद्ध या बड़ा संकट होता है तो आमतौर पर निवेशक सुरक्षित निवेश की तलाश में सोना और चांदी की तरफ भागते हैं। ऐसे समय में इनकी कीमतें अक्सर तेजी से बढ़ती हैं लेकिन इस बार तस्वीर थोड़ी अलग दिख रही है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़े तनाव और युद्ध जैसी स्थिति के बावजूद सोना-चांदी के दाम बढ़ने के बजाय गिर गए हैं। खासकर चांदी में बड़ी गिरावट देखने को मिली है जिसने निवेशकों को चौंका दिया है।
फरवरी के आखिर में जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हमले शुरू किए तब कमोडिटी मार्केट में चांदी की कीमत काफी ऊंचे स्तर पर थी। 28 फरवरी को एमसीएक्स पर चांदी का वायदा भाव लगभग 2,82,644 रुपये प्रति किलो था। लेकिन अगले कुछ दिनों में कीमतों में लगातार गिरावट आई और पिछले हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन यह 2,59,279 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई। यानी सिर्फ करीब 10 कारोबारी दिनों में चांदी लगभग 23,365 रुपये प्रति किलो सस्ती हो गई। आमतौर पर युद्ध के समय ऐसी गिरावट देखने को नहीं मिलती इसलिए बाजार के जानकार भी इस ट्रेंड पर नजर बनाए हुए हैं।
अगर चांदी के मौजूदा भाव की तुलना इसके रिकॉर्ड स्तर से करें तो गिरावट और भी बड़ी दिखाई देती है। जनवरी के आखिर में पहली बार एमसीएक्स पर चांदी की कीमत 4 लाख रुपये प्रति किलो के पार पहुंची थी और इसने 4,20,048 रुपये का लाइफ टाइम हाई बनाया था। अब मौजूदा कीमत के हिसाब से देखें तो चांदी अपने हाई से करीब 1,60,000 रुपये से ज्यादा सस्ती हो चुकी है। यानी जिन्होंने ऊंचे स्तर पर खरीदारी की थी उनके लिए यह गिरावट काफी बड़ी मानी जा रही है।
केवल चांदी ही नहीं बल्कि सोने की कीमतों में भी कमजोरी देखी गई है। 27 फरवरी को एमसीएक्स पर 24 कैरेट सोने का वायदा भाव 1,62,104 रुपये प्रति 10 ग्राम था लेकिन हाल ही में यह गिरकर करीब 1,58,400 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया। इस तरह युद्ध शुरू होने के बाद से सोना करीब 3,700 रुपये प्रति 10 ग्राम तक सस्ता हो चुका है। वहीं अगर इसके रिकॉर्ड हाई की बात करें तो सोना अपने उच्च स्तर 1,93,096 रुपये से लगभग 34,000 रुपये से ज्यादा नीचे ट्रेड कर रहा है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब दुनिया में तनाव बढ़ रहा है तब भी सोना-चांदी की कीमतें क्यों गिर रही हैं। इसके पीछे कुछ बड़े आर्थिक कारण बताए जा रहे हैं। सबसे पहला कारण है कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें। क्रूड ऑयल महंगा होने से दुनिया भर में महंगाई बढ़ने का खतरा पैदा हो जाता है। दूसरा बड़ा कारण है डॉलर की मजबूती। जब डॉलर मजबूत होता है तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना और चांदी पर दबाव बढ़ जाता है। इसके अलावा ऊंची ब्याज दरें भी कीमती धातुओं के लिए अच्छा संकेत नहीं मानी जातीं। ज्यादा ब्याज दर होने पर निवेशक सोना-चांदी की बजाय दूसरे निवेश विकल्पों की तरफ झुक जाते हैं।
हालांकि अभी कीमतों में गिरावट देखने को मिल रही है लेकिन कई बाजार विशेषज्ञ मानते हैं कि यह गिरावट लंबी नहीं रह सकती। अगर वैश्विक तनाव और बढ़ता है या आर्थिक अनिश्चितता बनी रहती है तो आने वाले समय में सोना और चांदी फिर से मजबूती दिखा सकते हैं। यही वजह है कि कुछ निवेशक इसे लंबी अवधि के निवेश का मौका भी मान रहे हैं। हालांकि बाजार में निवेश करते समय हमेशा जोखिम को ध्यान में रखना जरूरी होता है और किसी भी फैसले से पहले सही जानकारी और सलाह लेना बेहतर रहता है।
(नोट- सोना-चांदी या गोल्ड-सिल्वर ईटीएफ में निवेश से पहले अपने एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।)