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अमेरिका और ईरान के बीच सीज़फायर को आगे बढ़ाए जाने से फिलहाल तनाव थोड़ा कम हुआ है। इसका असर यह हुआ कि सुरक्षित निवेश यानी सेफ-हेवन एसेट्स की मांग घट गई और सोना-चांदी पर दबाव बढ़ गया। हालांकि बाजार पूरी तरह शांत नहीं है इसलिए गिरावट बहुत तेज नहीं रही।

सोना और चांदी हमेशा से निवेशकों के लिए भरोसेमंद विकल्प माने जाते हैं। जब दुनिया में तनाव बढ़ता है या आर्थिक अनिश्चितता होती है तब लोग सुरक्षित निवेश के तौर पर इनकी ओर रुख करते हैं लेकिन आज यानी 23 अप्रैल को तस्वीर थोड़ी अलग दिखी। शुरुआती कारोबार में सोने और चांदी दोनों की कीमतों में गिरावट देखने को मिली। इसकी सबसे बड़ी वजह रही वैश्विक बाजारों में बढ़ता “रिस्क-ऑन” सेंटिमेंट यानी निवेशकों का दोबारा जोखिम वाले निवेशों की तरफ लौटना। अमेरिका और ईरान के बीच सीज़फायर को आगे बढ़ाए जाने से फिलहाल तनाव थोड़ा कम हुआ है। इसका असर यह हुआ कि सुरक्षित निवेश यानी सेफ-हेवन एसेट्स की मांग घट गई और सोना-चांदी पर दबाव बढ़ गया। हालांकि बाजार पूरी तरह शांत नहीं है इसलिए गिरावट बहुत तेज नहीं रही। अब निवेशकों की नजर 29 अप्रैल को आने वाली US फेडरल रिजर्व की पॉलिसी पर टिकी हुई है जो आगे की दिशा तय कर सकती है।
जब दुनिया में युद्ध या तनाव बढ़ता है तब निवेशक शेयर बाजार से पैसा निकालकर सोना और चांदी जैसे सुरक्षित विकल्पों में लगाते हैं लेकिन इस बार अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर को आगे बढ़ाने की खबर ने बाजार को थोड़ी राहत दी है। इससे निवेशकों का भरोसा बढ़ा और वे फिर से इक्विटी यानी शेयर बाजार की ओर लौटने लगे। यही वजह है कि सोने और चांदी की मांग थोड़ी कमजोर हुई। COMEX पर सोने का फ्यूचर हल्की गिरावट के साथ कारोबार करता दिखा जबकि चांदी में भी कमजोरी नजर आई। यह संकेत है कि फिलहाल निवेशक डर से ज्यादा अवसर पर ध्यान दे रहे हैं।
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के साथ सीज़फायर को बढ़ाने के बाद वॉल स्ट्रीट में मजबूती देखने को मिली। इसका असर एशियाई बाजारों पर भी पड़ा। जापान और दक्षिण कोरिया जैसे बड़े बाजारों में तेजी आई और कई इंडेक्स ने रिकॉर्ड इंट्राडे हाई को छुआ। जब शेयर बाजार मजबूत होते हैं तब निवेशक सोने जैसे सुरक्षित निवेश से थोड़ा दूरी बना लेते हैं। यही “रिस्क-ऑन” सेंटिमेंट कहलाता है जिसने आज सोने-चांदी की कीमतों पर दबाव बनाया।
हालांकि हालात कुछ बेहतर हुए हैं लेकिन पूरी तरह राहत अभी भी नहीं है। होर्मुज स्ट्रेट के आसपास तनाव बना हुआ है और अमेरिका-ईरान के बीच नई शांति वार्ता अब भी साफ नहीं है। यही वजह है कि तेल बाजार में अस्थिरता बनी हुई है। अगर कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती हैं तो महंगाई बढ़ने का खतरा भी बढ़ता है। ऐसे समय में सोना फिर से मजबूत हो सकता है क्योंकि इसे महंगाई और अनिश्चितता के खिलाफ सुरक्षा के रूप में देखा जाता है। यही कारण है कि सोने में गिरावट सीमित रही।
सोने को सिर्फ आम निवेशक ही नहीं बल्कि दुनिया के कई सेंट्रल बैंक भी लगातार खरीद रहे हैं। खासकर एशियाई देशों के केंद्रीय बैंक अपने रिजर्व को मजबूत करने के लिए सोने में निवेश बढ़ा रहे हैं। यह लगातार खरीदारी सोने की कीमतों को नीचे गिरने से बचाती है। यानी भले ही बाजार में थोड़ी कमजोरी दिख रही हो लेकिन लंबी अवधि में सोने को मजबूत सपोर्ट मिल रहा है।
अब बाजार का सबसे बड़ा फोकस 29 अप्रैल को आने वाली US फेडरल रिजर्व की पॉलिसी पर है। ब्याज दरों को लेकर फेड क्या संकेत देता है इसका असर सीधे सोने और चांदी की कीमतों पर पड़ेगा। अगर ब्याज दरों में नरमी के संकेत मिलते हैं तो सोना मजबूत हो सकता है। वहीं अगर सख्ती बनी रहती है तो कीमतों पर दबाव जारी रह सकता है। यही वजह है कि फिलहाल बाजार रेंज-बाउंड यानी सीमित दायरे में चलता दिख सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि सोना और चांदी का आउटलुक इस समय थोड़ा अलग है। सोना अभी भी एक सुरक्षित और स्थिर निवेश माना जा रहा है। जब भी बाजार में डर या अनिश्चितता होती है लोग सबसे पहले सोने की तरफ जाते हैं। वहीं चांदी की भूमिका थोड़ी अलग है। यह सिर्फ कीमती धातु ही नहीं बल्कि एक इंडस्ट्रियल मेटल भी है। इसका इस्तेमाल सोलर एनर्जी, इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिक गाड़ियों और कई उद्योगों में होता है। इसलिए जब अर्थव्यवस्था बेहतर होती है तो चांदी को ज्यादा फायदा मिल सकता है।
मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि मीडियम टर्म में चांदी, सोने से बेहतर प्रदर्शन कर सकती है। इसकी वजह है गोल्ड-सिल्वर रेश्यो का अभी भी ऊंचा होना। इसका मतलब है कि चांदी में आगे तेजी की गुंजाइश बनी हुई है। इतिहास भी बताता है कि जब अर्थव्यवस्था स्थिर होने लगती है लेकिन अनिश्चितताएं पूरी तरह खत्म नहीं होतीं तब चांदी अक्सर सोने से बेहतर रिटर्न देती है। इसलिए कई निवेशक अब चांदी पर भी खास नजर बनाए हुए हैं।
अगर आप सोना या चांदी में निवेश की सोच रहे हैं तो जल्दबाजी से बचना जरूरी है। फिलहाल बाजार में उतार-चढ़ाव बना रहेगा। ऐसे में लंबी अवधि का नजरिया रखना बेहतर हो सकता है। सोना अभी भी सुरक्षा का मजबूत विकल्प है जबकि चांदी ग्रोथ के साथ बेहतर रिटर्न दे सकती है। इसलिए निवेशकों को अपने लक्ष्य और जोखिम क्षमता के हिसाब से फैसला लेना चाहिए। आने वाले दिनों में फेड की पॉलिसी, कच्चे तेल की चाल और अमेरिका-ईरान के रिश्ते तय करेंगे कि सोना और चांदी की कीमतें किस दिशा में जाएंगी। फिलहाल बाजार सतर्क है और हर छोटी खबर पर नजर बनाए हुए है।
डिस्क्लेमर: यूजर्स को चेतना मंच की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।
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