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सोना एक महीने के निचले स्तर तक फिसलने के बाद फिर से संभलता नजर आ रहा है जबकि चांदी ने डॉलर की कमजोरी का फायदा उठाकर अच्छी बढ़त दर्ज की है। गुरुवार सुबह के कारोबार में दोनों कीमती धातुओं में तेजी देखने को मिली जिससे निवेशकों के बीच हलचल तेज हो गई है।

सोना एक महीने के निचले स्तर तक फिसलने के बाद फिर से संभलता नजर आ रहा है जबकि चांदी ने डॉलर की कमजोरी का फायदा उठाकर अच्छी बढ़त दर्ज की है। गुरुवार सुबह के कारोबार में दोनों कीमती धातुओं में तेजी देखने को मिली जिससे निवेशकों के बीच हलचल तेज हो गई है। बाजार के जानकार मानते हैं कि आने वाले दिनों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है लेकिन अंदरूनी मांग अभी भी मजबूत बनी हुई है।
बीते कारोबारी सत्र में भारी बिकवाली के चलते सोना अपने एक महीने के सबसे निचले स्तर तक पहुंच गया था। हालांकि, गुरुवार को इसमें वापसी देखी गई। इंटरनेशनल मार्केट में सोना करीब 0.68% बढ़कर $4,592.60 प्रति औंस पर पहुंच गया। वहीं चांदी ने इससे भी बेहतर प्रदर्शन किया और लगभग 1.78% की तेजी के साथ $72.845 प्रति औंस तक चढ़ गई। यह तेजी ऐसे समय में आई है जब डॉलर में हल्की कमजोरी आई है। डॉलर के कमजोर होने से दूसरे देशों के खरीदारों के लिए सोना-चांदी सस्ते हो जाते हैं जिससे मांग बढ़ती है।
हाल के दिनों में डॉलर की मजबूती और ब्याज दरों के लंबे समय तक ऊंचे रहने की उम्मीदों ने सोने पर दबाव बनाया था लेकिन अब डॉलर के थोड़ा नरम पड़ने से बाजार को राहत मिली है। अमेरिका के केंद्रीय बैंक के ताजा रुख ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। भले ही ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं हुआ लेकिन महंगाई को लेकर सख्त संकेत दिए गए हैं। इससे यह साफ है कि जल्दी दरों में कटौती की उम्मीद कम है।
ब्रेंट क्रूड का दाम $119 प्रति बैरल के ऊपर बना हुआ है जिससे महंगाई का खतरा बढ़ रहा है। इसकी एक बड़ी वजह पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास की अनिश्चितता है। यह इलाका दुनिया के करीब 20% तेल सप्लाई के लिए बेहद अहम है। अगर यहां कोई बाधा आती है तो इसका असर सीधे ग्लोबल बाजार पर पड़ता है। यही वजह है कि एनर्जी कीमतों का दबाव अभी भी बना हुआ है।
जब दुनिया में अनिश्चितता बढ़ती है तो निवेशक सुरक्षित विकल्प की तरफ जाते हैं और सोना हमेशा से ऐसा ही विकल्प रहा है। यही कारण है कि गिरावट के बावजूद सोने की मांग पूरी तरह कमजोर नहीं पड़ी। मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि जब तक वैश्विक स्तर पर तनाव और आर्थिक दबाव बने रहेंगे तब तक सोना-चांदी को नीचे गिरने से सपोर्ट मिलता रहेगा।
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के मुताबिक, 2026 की पहली तिमाही में सोने की वैश्विक मांग 2% बढ़कर 1,230.9 टन हो गई। इसमें सबसे बड़ा योगदान निवेश और सेंट्रल बैंकों की खरीद का रहा। हालांकि ज्वेलरी की मांग थोड़ी कमजोर पड़ी है लेकिन निवेश के रूप में सोना अब भी लोगों की पहली पसंद बना हुआ है।
विशेषज्ञों का मानना है कि बाजार फिलहाल कई तरह के दबावों से गुजर रहा है जैसे डॉलर की चाल, ब्याज दरों का भविष्य और तेल की कीमतें। इन सबके बीच सोना-चांदी में शॉर्ट टर्म में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। फिर भी लंबी अवधि में इनकी मांग को मजबूत सपोर्ट मिलता रहेगा। यही वजह है कि हर गिरावट के बाद सोना फिर से उठता दिख रहा है। इस समय निवेशकों के लिए सबसे जरूरी है कि वे जल्दबाजी में फैसले लेने के बजाय बाजार के संकेतों को समझकर आगे बढ़ें क्योंकि मौजूदा हालात में हर दिन नई दिशा दिखा सकता है।
(डिस्क्लेमर: यूजर्स को चेतना मंच की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।
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