इन IPO से टूटी निवेशकों की उम्मीदें, कारण जानना बेहद जरूरी
2026 में SME‑IPO निवेशकों के लिए चुनौती बन गए हैं। इस साल अब तक 27 SME IPO लिस्ट हुए हैं लेकिन इनमें से 15 IPO अपने इश्यू प्राइस के नीचे कारोबार कर रहे हैं। कई IPO लिस्टिंग के तुरंत बाद गिरावट का शिकार हुए जिससे निवेशकों को भारी नुकसान उठाना पड़ा।

2026 का SME-IPO मार्केट निवेशकों के लिए चुनौती बन गया है। इस साल अब तक 27 SME IPO लिस्ट हुए हैं लेकिन इनमें से 15 IPO अपने इश्यू प्राइस के नीचे ट्रेड कर रहे हैं। कई IPO में निवेशकों को भारी नुकसान हुआ है जिससे बाजार में चिंता का माहौल है। कुछ IPO तो अपने इश्यू प्राइस से आधे या उससे ज्यादा नीचे कारोबार कर रहे हैं जिससे रिटेल निवेशकों की उम्मीदें धराशाई हुई हैं।
SME-IPO की लिस्टिंग पर नजर
इस साल लिस्ट हुए IPO में एरिटास विनाइल की 23 जनवरी को 47 रुपए पर लिस्टिंग हुई थी लेकिन अब यह अपने इश्यू प्राइस से 70% नीचे कारोबार कर रहा है। इसी तरह, यजुर फाइबर्स 132 रुपए के इश्यू प्राइस के साथ 14 जनवरी को लिस्ट हुआ था और अब यह 67% नीचे कारोबार कर रहा है। विक्ट्री इलेक्ट्रिक व्हीकल्स और आर्मर सिक्योरिटी इंडिया जैसे IPO भी अपने इश्यू प्राइस से 55% नीचे हैं। इसके अलावा, कनिष्क एल्युमिनियम 73 रुपए के इश्यू प्राइस पर लिस्ट हुआ था और अब 42% नीचे कारोबार कर रहा है।
गिरावट के कारण
SME-IPO में निवेशकों के नुकसान के पीछे कई कारण हैं। कमजोर सब्सक्रिप्शन, ऊंची वैल्यूएशन और कंपनी के कमजोर फंडामेंटल्स ने शेयरों की कीमत पर दबाव डाला। इसके साथ ही बाजार में अस्थिरता और उतार-चढ़ाव ने कई IPO को लिस्टिंग के तुरंत बाद नीचे गिरा दिया। निवेशकों को इस वजह से भारी नुकसान उठाना पड़ा और मार्केट में सतर्कता की जरूरत बढ़ गई।
निवेशकों के लिए सुझाव
निवेशक SME-IPO में निवेश करते समय सतर्क रहें। निवेश करने से पहले कंपनी के फंडामेंटल्स, वित्तीय स्वास्थ्य और मार्केट ट्रेंड की अच्छी तरह जांच करें। केवल उतना ही पैसा निवेश करें, जिसे आप खोने का जोखिम उठा सकते हैं। लंबी अवधि का निवेश सोचें और तुरंत लाभ की उम्मीद में हड़बड़ी न करें।
SEBI के कदम
SEBI ने SME-IPO मार्केट को रेगुलेट करने के लिए कई कदम उठाए हैं। जुलाई 2024 में लिस्टिंग डे गेन पर 90% कैप लगाया गया। दिसंबर 2024 में OFS के लिए 20% कैपिंग लागू की गई। OFS लाने वाली कंपनियों के लिए 2-3 वित्त वर्ष में EBITDA कम से कम 1 करोड़ होना जरूरी कर दिया गया। 1 जुलाई 2025 से न्यूनतम आवेदन राशि 1 लाख से बढ़ाकर 2 लाख की गई और जनवरी 2026 में इश्यू मैनेज करने के लिए बैंकर का नेटवर्थ 50 करोड़ से ऊपर होना जरूरी कर दिया गया। ये कदम बाजार में पारदर्शिता और सुरक्षा बढ़ाने के लिए उठाए गए हैं।
2026 का SME-IPO मार्केट निवेशकों के लिए चुनौती बन गया है। इस साल अब तक 27 SME IPO लिस्ट हुए हैं लेकिन इनमें से 15 IPO अपने इश्यू प्राइस के नीचे ट्रेड कर रहे हैं। कई IPO में निवेशकों को भारी नुकसान हुआ है जिससे बाजार में चिंता का माहौल है। कुछ IPO तो अपने इश्यू प्राइस से आधे या उससे ज्यादा नीचे कारोबार कर रहे हैं जिससे रिटेल निवेशकों की उम्मीदें धराशाई हुई हैं।
SME-IPO की लिस्टिंग पर नजर
इस साल लिस्ट हुए IPO में एरिटास विनाइल की 23 जनवरी को 47 रुपए पर लिस्टिंग हुई थी लेकिन अब यह अपने इश्यू प्राइस से 70% नीचे कारोबार कर रहा है। इसी तरह, यजुर फाइबर्स 132 रुपए के इश्यू प्राइस के साथ 14 जनवरी को लिस्ट हुआ था और अब यह 67% नीचे कारोबार कर रहा है। विक्ट्री इलेक्ट्रिक व्हीकल्स और आर्मर सिक्योरिटी इंडिया जैसे IPO भी अपने इश्यू प्राइस से 55% नीचे हैं। इसके अलावा, कनिष्क एल्युमिनियम 73 रुपए के इश्यू प्राइस पर लिस्ट हुआ था और अब 42% नीचे कारोबार कर रहा है।
गिरावट के कारण
SME-IPO में निवेशकों के नुकसान के पीछे कई कारण हैं। कमजोर सब्सक्रिप्शन, ऊंची वैल्यूएशन और कंपनी के कमजोर फंडामेंटल्स ने शेयरों की कीमत पर दबाव डाला। इसके साथ ही बाजार में अस्थिरता और उतार-चढ़ाव ने कई IPO को लिस्टिंग के तुरंत बाद नीचे गिरा दिया। निवेशकों को इस वजह से भारी नुकसान उठाना पड़ा और मार्केट में सतर्कता की जरूरत बढ़ गई।
निवेशकों के लिए सुझाव
निवेशक SME-IPO में निवेश करते समय सतर्क रहें। निवेश करने से पहले कंपनी के फंडामेंटल्स, वित्तीय स्वास्थ्य और मार्केट ट्रेंड की अच्छी तरह जांच करें। केवल उतना ही पैसा निवेश करें, जिसे आप खोने का जोखिम उठा सकते हैं। लंबी अवधि का निवेश सोचें और तुरंत लाभ की उम्मीद में हड़बड़ी न करें।
SEBI के कदम
SEBI ने SME-IPO मार्केट को रेगुलेट करने के लिए कई कदम उठाए हैं। जुलाई 2024 में लिस्टिंग डे गेन पर 90% कैप लगाया गया। दिसंबर 2024 में OFS के लिए 20% कैपिंग लागू की गई। OFS लाने वाली कंपनियों के लिए 2-3 वित्त वर्ष में EBITDA कम से कम 1 करोड़ होना जरूरी कर दिया गया। 1 जुलाई 2025 से न्यूनतम आवेदन राशि 1 लाख से बढ़ाकर 2 लाख की गई और जनवरी 2026 में इश्यू मैनेज करने के लिए बैंकर का नेटवर्थ 50 करोड़ से ऊपर होना जरूरी कर दिया गया। ये कदम बाजार में पारदर्शिता और सुरक्षा बढ़ाने के लिए उठाए गए हैं।












