विज्ञापन
Google की एक नई रिसर्च रिपोर्ट के मुताबिक, एक क्रिमिनल हैकिंग ग्रुप ने AI की मदद से बड़े साइबर हमले की तैयारी की थी। हैकर्स ने ऐसे बग और कमजोरियों को खोजने की कोशिश की जिनकी जानकारी सॉफ्टवेयर बनाने वाली कंपनियों तक को नहीं थी।

दुनिया तेजी से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की तरफ बढ़ रही है। आज AI का इस्तेमाल पढ़ाई, बिजनेस, हेल्थ और टेक्नोलॉजी जैसे कई क्षेत्रों में तेजी से हो रहा है लेकिन जिस तकनीक को इंसानों की मदद के लिए बनाया गया था अब वही तकनीक साइबर अपराधियों के हाथों में खतरनाक हथियार बनती जा रही है। हाल ही में Google ने एक बड़ा खुलासा किया है जिसने डिजिटल दुनिया की चिंता बढ़ा दी है।
Google की एक नई रिसर्च रिपोर्ट के मुताबिक, एक क्रिमिनल हैकिंग ग्रुप ने AI की मदद से बड़े साइबर हमले की तैयारी की थी। हैकर्स ने ऐसे बग और कमजोरियों को खोजने की कोशिश की जिनकी जानकारी सॉफ्टवेयर बनाने वाली कंपनियों तक को नहीं थी। इतना ही नहीं यह ग्रुप टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन जैसी सुरक्षा व्यवस्था को भी बायपास करने की तैयारी कर रहा था। हालांकि Google ने समय रहते इस साजिश को पकड़ लिया और बड़े खतरे को टाल दिया।
Google के Threat Intelligence Group ने बताया कि हैकर्स AI मॉडल्स का इस्तेमाल करके सॉफ्टवेयर और सिस्टम में छिपी कमजोरियों को ढूंढ रहे थे। इन कमजोरियों को तकनीकी भाषा में “जीरो-डे वल्नरेबिलिटी” कहा जाता है। सबसे चिंता की बात यह है कि ऐसी कमजोरियों की जानकारी डेवलपर्स को भी नहीं होती। आसान भाषा में कहे तो सिस्टम पूरी तरह सुरक्षित दिखता है लेकिन अंदर एक ऐसी कमी छिपी होती है जिसका फायदा उठाकर हैकर्स हमला कर सकते हैं। सुरक्षा एजेंसियां लंबे समय से इस खतरे को लेकर चेतावनी देती रही हैं कि AI के जरिए हैकिंग पहले से कहीं ज्यादा तेज और खतरनाक हो सकती है। अब Google की रिपोर्ट ने इन आशंकाओं को और मजबूत कर दिया है।
आजकल ज्यादातर लोग अपने अकाउंट्स की सुरक्षा के लिए टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन यानी 2FA का इस्तेमाल करते हैं। इसमें पासवर्ड के अलावा एक OTP या दूसरा सिक्योरिटी स्टेप भी शामिल होता है। इसे ऑनलाइन सुरक्षा की मजबूत दीवार माना जाता है लेकिन Google की रिपोर्ट के मुताबिक, हैकर्स AI की मदद से इसी सुरक्षा व्यवस्था को तोड़ने की कोशिश कर रहे थे। अगर वे इसमें सफल हो जाते तो बड़ी संख्या में लोगों के ईमेल, बैंकिंग और सोशल मीडिया अकाउंट्स खतरे में पड़ सकते थे।
Zero Day Attack एक ऐसा साइबर हमला होता है जिसमें हैकर्स किसी सॉफ्टवेयर या हार्डवेयर में मौजूद ऐसी खामी का फायदा उठाते हैं जिसकी जानकारी कंपनी या डेवलपर को नहीं होती। जैसे ही हैकर्स को उस कमजोरी का पता चलता है वे हमला कर देते हैं। इसे Zero Day इसलिए कहा जाता है क्योंकि डेवलपर के पास उस कमी को ठीक करने के लिए समय ही नहीं बचता। यही वजह है कि जीरो-डे अटैक को साइबर दुनिया का सबसे खतरनाक हमला माना जाता है। बड़े-बड़े सरकारी संस्थान, बैंक और टेक कंपनियां भी इससे प्रभावित हो सकती हैं।
Google ने यह साफ नहीं किया कि यह हमला कब हुआ था और इसका निशाना कौन था। कंपनी ने यह भी नहीं बताया कि हैकर्स ने किस AI प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया। हालांकि Google ने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि इस साजिश में उनके Gemini AI चैटबॉट का उपयोग हुआ था। फिर भी इस घटना ने यह साफ कर दिया है कि AI अब सिर्फ मददगार तकनीक नहीं रह गई बल्कि गलत हाथों में पहुंचकर बड़ा खतरा भी बन सकती है।
टेक्नोलॉजी जितनी तेजी से आगे बढ़ रही है साइबर अपराध भी उतनी ही तेजी से बदल रहे हैं। पहले हैकर्स को किसी सिस्टम की कमजोरी खोजने में महीनों लग जाते थे लेकिन अब AI की मदद से यह काम बहुत कम समय में हो सकता है। यही कारण है कि दुनिया भर की टेक कंपनियां अब AI आधारित सुरक्षा सिस्टम पर भी काम कर रही हैं। आने वाले समय में साइबर सुरक्षा सिर्फ पासवर्ड या OTP तक सीमित नहीं रहेगी बल्कि AI बनाम AI की लड़ाई बन सकती है। डिजिटल दुनिया में सुरक्षित रहने के लिए अब लोगों को भी पहले से ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है।
विज्ञापन