सेंसेक्स और निफ्टी में भारी गिरावट, जानें आज का मार्केट अपडेट

Stock Market: आज भारतीय शेयर बाजार में शुरुआती कारोबार के दौरान गिरावट देखने को मिली। सेंसेक्स 673 अंक गिरकर 77,532 के स्तर पर आ गया वहीं निफ्टी 24,070 के नीचे चला गया।

Share Market Fall
सेंसेक्स और निफ्टी की लेटेस्ट स्थिति
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userअसमीना
calendar11 Mar 2026 11:45 AM
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आज भारतीय शेयर बाजार में शुरुआती कारोबार के दौरान गिरावट देखने को मिली। सेंसेक्स 673 अंक गिरकर 77,532 के स्तर पर आ गया वहीं निफ्टी 24,070 के नीचे चला गया। अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच जारी तनाव और विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने निवेशकों को सतर्क कर दिया है।

विदेशी निवेशकों की बिकवाली का दबाव

भारतीय शेयर बाजार में सबसे बड़ा दबाव विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की बिकवाली से आया। 10 मार्च को FIIs ने लगभग 4,673 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। मार्च महीने में अब तक विदेशी निवेशक करीब 32,849 करोड़ रुपये की निकासी कर चुके हैं। जियोजित इनवेस्टमेंट्स के चीफ इनवेस्टमेंट स्ट्रैटजिस्ट वीके विजयकुमार के अनुसार, पिछले एक साल से यह रुझान बना हुआ है। FIIs की बिकवाली को DIIs की खरीदारी संतुलित कर रही है। उनके अनुसार इक्विटी म्यूचुअल फंड से आने वाला कैश फ्लो निकट भविष्य में बाजार को सहारा दे सकता है।

मुनाफावसूली ने बढ़ाया दबाव

पिछले सत्र में बाजार में तेजी देखने के बाद निवेशकों ने कुछ शेयरों में मुनाफावसूली की। इससे आज सेंसेक्स और निफ्टी में गिरावट आई। सेक्टोरल स्तर पर ऑटो, फाइनेंशियल सर्विसेज, आईटी और FMCG सेक्टर के शेयर कमजोर दिखे। निफ्टी 50 में कोटक महिंद्रा बैंक, SBI लाइफ, बजाज फिनसर्व और बजाज फाइनेंस के शेयरों में लगभग 1% गिरावट आई। इसके अलावा भारती एयरटेल और टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स के शेयरों में भी कमजोरी देखने को मिली।

मिडिल ईस्ट से मिले-जुले संकेतों का असर

अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच जारी संघर्ष ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। हालाँकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिए कि यह संघर्ष जल्दी समाप्त हो सकता है लेकिन दोनों तरफ से हमले जारी हैं। इस विरोधाभासी स्थिति ने बाजार में अनिश्चितता पैदा की और निवेशक सतर्क हो गए। खासकर मिडिल ईस्ट की खबरों से मार्केट मूवमेंट प्रभावित हुआ।

चार्ट्स और तकनीकी संकेत

निफ्टी फिलहाल एक सीमित दायरे में कारोबार कर रहा है। वर्तमान में पहला सपोर्ट 24,100 पर है जबकि मजबूत सपोर्ट 24,000 माना जा रहा है। ऊपर की ओर निफ्टी के लिए 24,400–24,500 का रेजिस्टेंस स्तर है और यदि यह मजबूती से इस रेजिस्टेंस को पार करता है तो इंडेक्स 24,600–24,700 तक बढ़ सकता है। हालांकि, अगर निफ्टी सपोर्ट लेवल के ऊपर टिक नहीं पाता तो बाजार में कम समय में उतार-चढ़ाव बढ़ने की संभावना है।

निवेशकों के लिए क्या संकेत?

विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल बाजार में सतर्कता बनाए रखना जरूरी है। FIIs की बिकवाली, मुनाफावसूली और मिडिल ईस्ट की अनिश्चितता को ध्यान में रखते हुए निवेशक संवेदनशील शेयरों में रुक-रुक कर निवेश कर सकते हैं।

फिलहाल बाजार की दिशा विदेशी निवेश, वैश्विक तनाव और तकनीकी स्तरों पर निर्भर करेगी।

डिस्क्लेमरः चेतना मंच यूजर्स को सलाह देता है कि वह कोई भी निवेश निर्णय लेने के पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह लें।

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Gold-Silver Price Today: जानिए देश के बड़े शहरों में आज का भाव

अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक बाजार में चिंता बढ़ा दी है जिसका सीधा असर गोल्ड और सिल्वर की कीमतों पर पड़ा है। यही वजह है कि हल्की गिरावट के बाद एक बार फिर सोने और चांदी के भाव में तेजी देखने को मिल रही है।

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आज का गोल्ड रेट
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userअसमीना
calendar11 Mar 2026 11:20 AM
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दुनिया में जब भी अनिश्चितता बढ़ती है तो निवेशकों का रुख अक्सर सोना और चांदी जैसी सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर हो जाता है। इस समय भी कुछ ऐसा ही देखने को मिल रहा है। अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक बाजार में चिंता बढ़ा दी है जिसका सीधा असर गोल्ड और सिल्वर की कीमतों पर पड़ा है। यही वजह है कि हल्की गिरावट के बाद एक बार फिर सोने और चांदी के भाव में तेजी देखने को मिल रही है। लगातार दूसरे दिन इनकी कीमतों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है जिससे बाजार में फिर से हलचल बढ़ गई है।

राजधानी में सोने की कीमतों में हल्की तेजी

दिल्ली में आज सोने की कीमतों में हल्की बढ़त दर्ज की गई है। 24 कैरेट सोना प्रति 10 ग्राम करीब ₹10 महंगा होकर ₹1,62,540 पर पहुंच गया है, जबकि 22 कैरेट सोने की कीमत भी ₹10 बढ़कर ₹1,40,010 हो गई है। अगर पिछले दो दिनों की बात करें तो सोने में अच्छी खासी तेजी आई है। दो दिनों के भीतर 24 कैरेट सोना करीब ₹710 महंगा हो चुका है जबकि 22 कैरेट सोने की कीमत में लगभग ₹660 का उछाल आया है। बाजार के जानकारों का मानना है कि वैश्विक तनाव के कारण निवेशकों की दिलचस्पी सोने में बढ़ रही है।

देश के बड़े शहरों में गोल्ड के ताजा भाव

देश के अलग-अलग शहरों में सोने की कीमतों में थोड़ा-बहुत अंतर देखने को मिलता है। दिल्ली में जहां 24 कैरेट सोना ₹1,62,540 प्रति 10 ग्राम पर बिक रहा है वहीं मुंबई, कोलकाता, बेंगलुरु और हैदराबाद में इसकी कीमत करीब ₹1,62,390 के आसपास है। चेन्नई में सोने की कीमत सबसे ज्यादा देखने को मिल रही है जहां 24 कैरेट सोना लगभग ₹1,64,190 प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गया है। वहीं लखनऊ, जयपुर और पटना जैसे शहरों में भी सोने के भाव दिल्ली के करीब ही बने हुए हैं।

चांदी की कीमतों में भी लगातार उछाल

सोने के साथ-साथ चांदी की कीमतों में भी तेजी देखने को मिल रही है। दिल्ली में एक दिन की गिरावट के बाद चांदी लगातार दूसरे दिन महंगी हुई है। पिछले दो दिनों में इसकी कीमत में करीब ₹10,100 की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। आज दिल्ली में चांदी लगभग ₹2,90,100 प्रति किलोग्राम के भाव पर बिक रही है। इससे पहले चार दिनों तक इसके भाव लगभग स्थिर बने हुए थे। अचानक आई इस तेजी ने बाजार में नई हलचल पैदा कर दी है।

इस शहर में ₹3 लाख के पार पहुंची चांदी

देश के अलग-अलग महानगरों में चांदी की कीमतों में थोड़ा फर्क देखने को मिल रहा है। दिल्ली, मुंबई और कोलकाता में चांदी करीब ₹2,90,100 प्रति किलोग्राम के आसपास बिक रही है। वहीं चेन्नई में चांदी की कीमत सबसे ज्यादा है। यहां इसका भाव लगभग ₹3,00,100 प्रति किलोग्राम तक पहुंच गया है यानी यह ₹3 लाख के स्तर को पार कर चुकी है। चारों बड़े महानगरों में फिलहाल सबसे महंगी चांदी चेन्नई में ही मिल रही है।

क्यों बढ़ रही है सोने-चांदी की मांग?

विशेषज्ञों का मानना है कि जब भी दुनिया में राजनीतिक या आर्थिक तनाव बढ़ता है तो निवेशक सुरक्षित निवेश की तलाश में सोने और चांदी की ओर रुख करते हैं। अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रहे तनाव ने भी बाजार में अनिश्चितता बढ़ा दी है। ऐसे माहौल में निवेशक जोखिम से बचने के लिए गोल्ड और सिल्वर जैसे सेफ हेवन एसेट्स में निवेश बढ़ा देते हैं। यही वजह है कि थोड़ी गिरावट के बाद भी इनकी कीमतें फिर तेजी से ऊपर जाती दिख रही हैं।

आगे क्या रह सकता है ट्रेंड?

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, अगर वैश्विक तनाव बना रहता है तो सोने और चांदी की कीमतों में आगे भी उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। छोटी-मोटी गिरावट के बावजूद निवेशकों की खरीदारी इनकी कीमतों को सहारा दे रही है। ऐसे में आने वाले दिनों में गोल्ड और सिल्वर बाजार की चाल काफी हद तक अंतरराष्ट्रीय हालात और निवेशकों की मांग पर निर्भर करेगी। फिलहाल इतना तय है कि मौजूदा हालात में इन दोनों धातुओं की चमक कम होती नजर नहीं आ रही।

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रातों-रात सस्ता हुआ कच्चा तेल, क्या पेट्रोल-डीजल भी होंगे सस्ते?

बुधवार को अचानक हालात बदल गए और कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट देखने को मिली। बाजार में यह बदलाव इतना तेज था कि निवेशकों और विशेषज्ञों को भी हैरानी हुई। इस गिरावट के पीछे सबसे बड़ी वजह इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) का एक बड़ा कदम माना जा रहा है जिसने बाजार की दिशा ही बदल दी।

Crude Oil Price
कच्चे तेल की कीमत
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userअसमीना
calendar11 Mar 2026 10:55 AM
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पिछले कुछ दिनों से दुनिया भर के बाजारों में कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ रही थीं। अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव की वजह से लोगों को डर था कि तेल की सप्लाई प्रभावित हो सकती है लेकिन बुधवार को अचानक हालात बदल गए और कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट देखने को मिली। बाजार में यह बदलाव इतना तेज था कि निवेशकों और विशेषज्ञों को भी हैरानी हुई। इस गिरावट के पीछे सबसे बड़ी वजह इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) का एक बड़ा कदम माना जा रहा है जिसने बाजार की दिशा ही बदल दी।

तेल बाजार में अचानक आया यू-टर्न

बुधवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। ब्रेंट क्रूड की कीमत लगभग 0.26% गिरकर 87.57 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई, जबकि अमेरिकी WTI कच्चा तेल करीब 0.44% गिरकर 83.08 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। हालांकि असली हलचल इससे पहले रात के कारोबार में देखने को मिली जब ब्रेंट और WTI के फ्रंट-मंथ फ्यूचर्स 11% से ज्यादा गिरकर बंद हुए। यह गिरावट इतनी बड़ी थी कि इसे पिछले चार सालों में एक दिन की सबसे बड़ी गिरावटों में से एक माना जा रहा है।

IEA के फैसले ने बदला पूरा खेल

तेल की कीमतों में गिरावट की सबसे बड़ी वजह इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी का वह प्रस्ताव है जिसमें उसने अपने रणनीतिक भंडार से बड़े पैमाने पर तेल जारी करने की बात कही है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, IEA अपने भंडार से 182 मिलियन बैरल से ज्यादा तेल बाजार में छोड़ सकता है। इसका मकसद साफ है बाजार में सप्लाई बढ़ाकर बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करना। इस प्रस्ताव पर संगठन के 32 सदस्य देशों के ऊर्जा अधिकारियों की एक आपात बैठक में चर्चा की गई। उम्मीद है कि सदस्य देशों की सहमति मिलने के बाद इस योजना को लागू किया जा सकता है। हालांकि नियम के मुताबिक अगर एक भी सदस्य देश इसका विरोध करता है तो यह योजना टल सकती है।

क्या है इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी?

इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी यानी IEA एक वैश्विक संगठन है जिसका मुख्यालय फ्रांस की राजधानी पेरिस में स्थित है। इसकी स्थापना 1974 में की गई थी। इस संगठन का मुख्य उद्देश्य दुनिया में ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित और स्थिर बनाए रखना है। जब भी तेल की सप्लाई में कोई बड़ा संकट आता है तब यह संगठन सदस्य देशों के साथ मिलकर बाजार को स्थिर करने के लिए कदम उठाता है। IEA, आर्थिक सहयोग और विकास संगठन (OECD) के तहत काम करता है और सरकारों तथा ऊर्जा कंपनियों के साथ मिलकर ऊर्जा को सुरक्षित, सस्ता और टिकाऊ बनाने की दिशा में काम करता है।

कौन-कौन हैं इसके सदस्य?

इस संगठन में कुल 32 सदस्य देश हैं। इनमें अमेरिका, जापान, जर्मनी, फ्रांस, ब्रिटेन और कनाडा जैसे बड़े देश शामिल हैं। इसके अलावा भारत, चीन और इंडोनेशिया जैसे 13 सहयोगी सदस्य भी इसके साथ जुड़े हुए हैं। दिलचस्प बात यह है कि भारत को जल्द ही IEA का पूर्ण सदस्य बनाए जाने पर भी चर्चा चल रही है। हाल ही में सदस्य देशों ने ब्राजील, कोलम्बिया, भारत और वियतनाम को संगठन से और गहराई से जोड़ने पर सहमति जताई है।

एक पोस्ट से बढ़ गया बाजार में भ्रम

तेल बाजार में उतार-चढ़ाव का एक और दिलचस्प कारण सामने आया। अमेरिका के ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट कर दी, जिसमें कहा गया था कि अमेरिकी नौसेना ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से एक तेल टैंकर को सुरक्षित बाहर निकाला है। हालांकि बाद में यह पोस्ट हटा दी गई और व्हाइट हाउस ने स्पष्ट किया कि ऐसा कोई ऑपरेशन हुआ ही नहीं था। लेकिन इस छोटी सी गलती ने बाजार में भ्रम पैदा कर दिया और कीमतों में उतार-चढ़ाव और बढ़ गया।

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