देश में करोड़ों वाहन चलते हैं और हर दिन लाखों लोग पेट्रोल-डीजल भरवाते हैं। ऐसे में हर लीटर पर सरकार को टैक्स के रूप में पैसा मिलता है। यही वजह है कि पेट्रोलियम सेक्टर सरकार की आय का एक बड़ा स्रोत माना जाता है।

आज के समय में पेट्रोल और डीजल सिर्फ ईंधन नहीं बल्कि देश की अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा बन चुके हैं। जब भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत बढ़ती है या घटती है उसका असर सीधे आम आदमी की जेब पर पड़ता है। हाल ही में अंतरराष्ट्रीय तनाव और तेल की सप्लाई को लेकर बने हालात के बीच भारत सरकार ने पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी कम करने का फैसला लिया है। इस फैसले के बाद लोगों को राहत मिली है लेकिन साथ ही एक बड़ा सवाल भी उठ रहा है कि आखिर सरकार पेट्रोल-डीजल से कितना कमाती है और इन पर इतने तरह के टैक्स क्यों लगाए जाते हैं।
पेट्रोल और डीजल देश की रोजमर्रा की जरूरतों से जुड़े हुए हैं। देश में करोड़ों वाहन चलते हैं और हर दिन लाखों लोग पेट्रोल-डीजल भरवाते हैं। ऐसे में हर लीटर पर सरकार को टैक्स के रूप में पैसा मिलता है। यही वजह है कि पेट्रोलियम सेक्टर सरकार की आय का एक बड़ा स्रोत माना जाता है। जब भी तेल की कीमतों में बदलाव होता है सरकार अपनी एक्साइज ड्यूटी में कटौती या बढ़ोतरी करके कीमतों को नियंत्रित करने की कोशिश करती है। हाल ही में केंद्र सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर लगने वाली एक्साइज ड्यूटी में कटौती की है। पहले पेट्रोल पर करीब 13 रुपये प्रति लीटर एक्साइज ड्यूटी लगती थी जिसे घटाकर 3 रुपये कर दिया गया है। वहीं डीजल पर करीब 10 रुपये की एक्साइज ड्यूटी को शून्य कर दिया गया है। इससे सरकार की कमाई में कमी जरूर आएगी लेकिन आम जनता को राहत मिलेगी।
पेट्रोल और डीजल की कीमत सिर्फ कच्चे तेल की कीमत पर ही तय नहीं होती। इसमें कई तरह के टैक्स और चार्ज शामिल होते हैं, जो कीमत को बढ़ा देते हैं। केंद्र सरकार की एक्साइज ड्यूटी के अलावा राज्य सरकारें वैट लगाती हैं, जो अलग-अलग राज्यों में अलग होता है। इसके अलावा ट्रांसपोर्टेशन चार्ज और डीलर कमीशन भी शामिल होता है। पेट्रोल पर केंद्र सरकार का हिस्सा करीब 3 रुपये प्रति लीटर रह गया है जबकि डीजल पर फिलहाल एक्साइज ड्यूटी शून्य कर दी गई है। दूसरी ओर राज्य सरकारें पेट्रोल पर करीब 32 से 35 रुपये तक टैक्स लगाती हैं जबकि डीजल पर यह करीब 20 से 25 रुपये प्रति लीटर होता है। इसके अलावा डीलर कमीशन और ट्रांसपोर्टेशन चार्ज भी कीमत में शामिल होते हैं जिससे अंतिम कीमत बढ़ जाती है।
अगर सरकार की कमाई की बात करें तो पेट्रोल-डीजल से सरकार को हर महीने हजारों करोड़ रुपये की आय होती है। संसद में दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, साल 2021-22 में केंद्र सरकार ने पेट्रोलियम उत्पादों से करीब 4 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की कमाई की थी। इसमें एक्साइज ड्यूटी और अन्य टैक्स शामिल थे। यह आंकड़ा इस बात को दिखाता है कि पेट्रोल-डीजल सरकार के लिए कितना बड़ा राजस्व स्रोत है। हालांकि एक्साइज ड्यूटी में कटौती के बाद यह कमाई घट सकती है लेकिन फिर भी पेट्रोलियम सेक्टर सरकार की आय का अहम हिस्सा बना रहेगा। तेल की कीमतों में बदलाव और टैक्स दरों के आधार पर यह कमाई हर साल बदलती रहती है।
पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर अंतरराष्ट्रीय बाजार का भी सीधा असर पड़ता है। कच्चे तेल की कीमत बढ़ने पर सरकार के सामने चुनौती बढ़ जाती है। ऐसे में सरकार कई बार टैक्स कम करके जनता को राहत देने की कोशिश करती है। हालिया वैश्विक तनाव और तेल की सप्लाई को लेकर बनी स्थिति के कारण भी सरकार ने एक्साइज ड्यूटी कम करने का फैसला लिया है।
सरकार द्वारा एक्साइज ड्यूटी कम करने से पेट्रोल-डीजल की कीमतों में राहत मिलती है। इससे ट्रांसपोर्टेशन लागत कम होती है और इसका असर रोजमर्रा की चीजों की कीमतों पर भी पड़ता है। यही वजह है कि पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बदलाव का असर पूरे देश की अर्थव्यवस्था पर देखने को मिलता है।