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पहले दिन निवेशकों की तरफ से बहुत ज्यादा उत्साह देखने को नहीं मिला लेकिन बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आखिरी दिनों में सब्सक्रिप्शन बढ़ सकता है। ऐसे में कई रिटेल निवेशक यह समझना चाहते हैं कि आखिर यह आईपीओ कितना खास है और इसमें पैसा लगाना सही रहेगा या नहीं।

शेयर बाजार में निवेश करने वालों के लिए एक और नया मौका खुल गया है। सिंथेटिक टेक्सटाइल फैब्रिक बनाने वाली Harikanta Overseas का SME IPO निवेशकों के लिए खुल चुका है। ऐसे लोग जो छोटे और मिड साइज आईपीओ में निवेश करना पसंद करते हैं उनकी नजर अब इस इश्यू पर टिक गई है। कंपनी 20 मई से निवेशकों के लिए खुली है और इसमें 22 मई तक बोली लगाई जा सकती है। हालांकि पहले दिन निवेशकों की तरफ से बहुत ज्यादा उत्साह देखने को नहीं मिला लेकिन बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आखिरी दिनों में सब्सक्रिप्शन बढ़ सकता है। ऐसे में कई रिटेल निवेशक यह समझना चाहते हैं कि आखिर यह आईपीओ कितना खास है और इसमें पैसा लगाना सही रहेगा या नहीं।
कंपनी ने अपने आईपीओ का प्राइस बैंड 91 से 96 रुपये प्रति शेयर तय किया है। रिटेल निवेशकों के लिए एक लॉट में 1200 शेयर रखे गए हैं। इसका मतलब यह है कि अगर कोई निवेशक ऊपरी प्राइस बैंड के हिसाब से आवेदन करता है तो उसे कम से कम करीब 1.15 लाख रुपये लगाने होंगे। SME आईपीओ होने की वजह से इसमें निवेश की रकम सामान्य आईपीओ के मुकाबले थोड़ी ज्यादा दिखाई देती है। यही कारण है कि छोटे निवेशक निवेश से पहले कंपनी की पूरी जानकारी समझना चाहते हैं।
हरिकांता ओवरसीज इस आईपीओ के जरिए करीब 35.6 करोड़ रुपये जुटाने की तैयारी में है। यह पूरा फ्रेश इश्यू है इसमें कोई ऑफर फॉर सेल शामिल नहीं है। इसका मतलब यह है कि आईपीओ से मिलने वाला पूरा पैसा सीधे कंपनी के बिजनेस में इस्तेमाल किया जाएगा। बाजार में ऐसे आईपीओ को आमतौर पर सकारात्मक नजर से देखा जाता है क्योंकि जुटाई गई रकम कंपनी के विस्तार और विकास में लगती है।
सूरत स्थित यह कंपनी सिंथेटिक टेक्सटाइल फैब्रिक बनाने का काम करती है। कंपनी के पास साड़ी फैब्रिक, कुर्ती फैब्रिक, पॉलिएस्टर कपड़े और कई तरह के डिजाइनर फैब्रिक्स का बड़ा पोर्टफोलियो है। भारत के कई बड़े शहरों में सप्लाई करने के अलावा कंपनी विदेशों में भी अपने प्रोडक्ट एक्सपोर्ट करती है। बहरीन, सिंगापुर और थाईलैंड जैसे देशों में भी कंपनी का कारोबार फैला हुआ है। टेक्सटाइल सेक्टर में लगातार बढ़ती मांग को देखते हुए कंपनी अपने बिजनेस को और बड़ा करना चाहती है।
आईपीओ से मिलने वाले फंड का इस्तेमाल कंपनी नई मशीनें खरीदने और फैक्ट्री से जुड़े कामों में करेगी। इसके अलावा वर्किंग कैपिटल की जरूरतों को पूरा करने और बिजनेस बढ़ाने में भी इस रकम का उपयोग किया जाएगा। कंपनी का फोकस अपनी मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बढ़ाने और बाजार में पकड़ मजबूत करने पर है। यही वजह है कि कंपनी विस्तार के लिए पूंजी जुटा रही है।
आईपीओ के पहले दिन निवेशकों की तरफ से बहुत ज्यादा जोश नहीं दिखा। कंपनी को पहले दिन सीमित आवेदन ही मिले। खासकर रिटेल कैटेगरी में सब्सक्रिप्शन काफी कम रहा। हालांकि SME आईपीओ में अक्सर आखिरी दिन ज्यादा आवेदन देखने को मिलते हैं। इसलिए बाजार की नजर अब अगले दो दिनों के सब्सक्रिप्शन आंकड़ों पर बनी हुई है।
फिलहाल ग्रे मार्केट में इस आईपीओ को लेकर कोई बड़ा उत्साह नहीं दिखाई दे रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक कंपनी का GMP अभी शून्य के आसपास बना हुआ है। इसका मतलब यह माना जा रहा है कि शेयर की लिस्टिंग लगभग इश्यू प्राइस के आसपास हो सकती है लेकिन बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि GMP हर दिन बदलता है। अगर अगले कुछ दिनों में सब्सक्रिप्शन तेजी से बढ़ता है तो ग्रे मार्केट प्रीमियम में भी बदलाव देखने को मिल सकता है।
हर आईपीओ में निवेश करने से पहले कंपनी का बिजनेस, उसकी फाइनेंशियल स्थिति और बाजार की मांग को समझना जरूरी होता है। टेक्सटाइल सेक्टर में अच्छी संभावनाएं जरूर हैं लेकिन SME आईपीओ में उतार-चढ़ाव थोड़ा ज्यादा देखने को मिलता है। ऐसे में निवेशकों को सिर्फ लिस्टिंग गेन नहीं बल्कि कंपनी के लंबे समय के बिजनेस मॉडल को देखकर फैसला लेना चाहिए। आने वाले दिनों में यह आईपीओ बाजार में कैसा प्रदर्शन करेगा इस पर निवेशकों की नजर बनी रहेगी।
डिस्क्लेमरः चेतना मंच यूजर्स को सलाह देता है कि वह कोई भी निवेश निर्णय लेने के पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह लें।
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