SIP 7-5-3-1 Rule: इसमें 7, 5, 3 और 1 चार अलग-अलग बातों को दिखाते हैं। इसका मकसद निवेशक को यह समझाना है कि सिर्फ SIP शुरू करना काफी नहीं है बल्कि उसे सही तरीके से लंबे समय तक चलाना भी जरूरी है।

म्यूचुअल फंड में निवेश करने वालों के बीच SIP (Systematic Investment Plan) काफी लोकप्रिय है। इसमें हर महीने एक तय रकम निवेश की जाती है। बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद लगातार निवेश करते रहने की वजह से लंबे समय में कंपाउंडिंग का फायदा मिल सकता है। हालांकि, SIP में निवेश करने का मतलब यह नहीं है कि हर हाल में तय रिटर्न मिलेगा या पैसा कभी नहीं डूबेगा। निवेश से जुड़े जानकार अक्सर लंबे समय तक निवेश करने, पैसे को अलग-अलग जगह लगाने और बाजार की गिरावट में घबराकर फैसला नहीं लेने की सलाह देते हैं। इसी सोच को आसान तरीके से समझाने के लिए ‘7-5-3-1’ नियम का इस्तेमाल किया जाता है। आइए जानते हैं कि इस फॉर्मूले का मतलब क्या है और ₹5,000 की मासिक SIP से लंबे समय में कितना फंड बन सकता है।
‘7-5-3-1’ नियम को SIP में लंबे समय तक अनुशासन के साथ निवेश करने की एक आसान रणनीति के तौर पर समझा जा सकता है। इसमें 7, 5, 3 और 1 चार अलग-अलग बातों को दिखाते हैं। इसका मकसद निवेशक को यह समझाना है कि सिर्फ SIP शुरू करना काफी नहीं है बल्कि उसे सही तरीके से लंबे समय तक चलाना भी जरूरी है।
इस फॉर्मूले में पहला अंक 7 है। इसका मतलब है कि इक्विटी म्यूचुअल फंड में SIP करते समय निवेश का नजरिया कम से कम 7 साल या उससे ज्यादा रखने की कोशिश करनी चाहिए। शेयर बाजार छोटी अवधि में तेजी से ऊपर-नीचे हो सकता है। कभी बाजार अच्छा रिटर्न देता है तो कभी गिरावट देखने को मिलती है। लंबी अवधि में निवेश करने से बाजार के इन उतार-चढ़ाव को संभालने के लिए ज्यादा समय मिलता है। साथ ही कंपाउंडिंग को भी काम करने का मौका मिलता है। इसका मतलब यह नहीं है कि 7 साल पूरे होते ही मुनाफा तय है। म्यूचुअल फंड का रिटर्न बाजार की स्थिति और चुनी गई स्कीम के प्रदर्शन पर निर्भर करता है।
7-5-3-1 नियम में 5 का संबंध निवेश में डायवर्सिफिकेशन यानी विविधता से है। आसान भाषा में कहें तो अपनी पूरी रकम को एक ही जगह लगाने के बजाय अलग-अलग तरह के निवेश विकल्पों पर विचार करना चाहिए। म्यूचुअल फंड में भी अलग-अलग कैटेगरी और जोखिम स्तर वाली योजनाएं होती हैं। निवेशक को अपनी जरूरत, लक्ष्य और जोखिम उठाने की क्षमता के हिसाब से विकल्प चुनना चाहिए। सिर्फ इसलिए किसी फंड में पैसा नहीं लगाना चाहिए क्योंकि उसने पिछले कुछ समय में अच्छा रिटर्न दिया है। डायवर्सिफिकेशन का मकसद जोखिम को पूरी तरह खत्म करना नहीं बल्कि किसी एक निवेश पर निर्भरता कम करना है।
बाजार हमेशा एक जैसा नहीं रहता। कभी तेजी आती है कभी बाजार कुछ समय तक एक दायरे में रहता है और कभी बड़ी गिरावट देखने को मिलती है। SIP करने वाले निवेशक को इन स्थितियों के लिए मानसिक रूप से तैयार रहना चाहिए। खासकर बाजार गिरने पर निवेश की वैल्यू कम दिखाई दे सकती है। ऐसे समय में डरकर SIP बंद कर देना या जल्दबाजी में निवेश बेच देना लंबे समय के लक्ष्य को प्रभावित कर सकता है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि हर स्थिति में SIP जारी रखना ही सही फैसला होगा। अगर आपकी आर्थिक स्थिति, लक्ष्य या जोखिम उठाने की क्षमता बदल गई है तो निवेश की समीक्षा करना जरूरी है।
इस फॉर्मूले का सबसे दिलचस्प हिस्सा 1 है। इसका मतलब है कि आपकी आमदनी बढ़ने के साथ SIP की रकम भी धीरे-धीरे बढ़ाने की कोशिश करें। इसे Step-up SIP कहा जाता है। उदाहरण के लिए अगर आपने ₹5,000 की SIP शुरू की है तो अगले साल इसे 10 फीसदी बढ़ाकर ₹5,500 किया जा सकता है। इसके बाद हर साल इसी तरह रकम बढ़ाने पर लंबे समय में निवेश की कुल राशि काफी बढ़ सकती है। इसका फायदा यह है कि आपकी आमदनी बढ़ने के साथ निवेश भी बढ़ता रहता है और भविष्य के बड़े वित्तीय लक्ष्य के लिए ज्यादा पैसा जमा हो सकता है।
अब इस नियम को एक उदाहरण से समझते हैं। मान लीजिए आप हर महीने ₹5,000 की SIP करते हैं और औसतन 12 फीसदी सालाना रिटर्न की सिर्फ अनुमानित दर मानते हैं। 3 साल में आपकी ओर से कुल ₹1.80 लाख निवेश किए जाएंगे। इस अनुमान के आधार पर निवेश की वैल्यू करीब ₹2.18 लाख हो सकती है। यानी अनुमानित फायदा करीब ₹37,500 के आसपास हो सकता है। ध्यान रखें कि यह सिर्फ एक उदाहरण है। वास्तविक रिटर्न बाजार के प्रदर्शन पर निर्भर करेगा।
अगर यही ₹5,000 की मासिक SIP 7 साल तक जारी रहती है तो आपका कुल निवेश ₹4.20 लाख होगा। 12 फीसदी सालाना अनुमानित रिटर्न के आधार पर यह रकम करीब ₹6.60 लाख तक पहुंच सकती है। इस हिसाब से अनुमानित फायदा करीब ₹2.40 लाख हो सकता है। यहां साफ दिखाई देता है कि निवेश की अवधि बढ़ने पर कंपाउंडिंग का असर भी बढ़ने लगता है।
अगर ₹5,000 की SIP को 10 साल तक जारी रखा जाए तो आपकी जेब से कुल ₹6 लाख जाएंगे। 12 फीसदी अनुमानित सालाना रिटर्न के आधार पर यह रकम करीब ₹11.62 लाख हो सकती है। यानी इस उदाहरण में ₹6 लाख के निवेश पर करीब ₹5.62 लाख का अनुमानित फायदा हो सकता है। लेकिन बाजार में वास्तविक रिटर्न इससे कम या ज्यादा हो सकता है।
अब मान लीजिए कि आपने ₹5,000 की SIP से शुरुआत की और हर साल SIP की रकम में 10 फीसदी की बढ़ोतरी करते रहे। 12 फीसदी सालाना अनुमानित रिटर्न मानने पर लंबे समय में इसका असर काफी बड़ा हो सकता है।
ये सभी आंकड़े अनुमान पर आधारित हैं। 12 फीसदी रिटर्न हर साल मिलना तय नहीं है और वास्तविक रकम बाजार के प्रदर्शन के अनुसार बदल सकती है।
डिस्क्लेमर: यूजर्स को चेतना मंच की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।
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