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श्रीधर वेम्बु ने हाल ही में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट के जरिए अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि आज के समय में केवल तेज कोडिंग करना ही सफलता की गारंटी नहीं है। पहले जहां कंपनियां सिर्फ अच्छे प्रोग्रामर तलाशती थीं अब उन्हें ऐसे लोग चाहिए जो बिजनेस, ग्राहक और समस्या को भी अच्छी तरह समझते हों।

आज के समय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI तेजी से हर क्षेत्र में अपनी जगह बना रहा है। खासतौर पर आईटी और सॉफ्टवेयर सेक्टर में काम करने वाले लोगों के मन में एक बड़ा सवाल है क्या AI उनकी नौकरी छीन लेगा? कई लोग इस बदलाव को लेकर परेशान हैं और भविष्य को लेकर असमंजस में हैं। ऐसे समय में Sridhar Vembu ने एक बेहद जरूरी और समझदारी भरी सलाह दी है। जोहो (Zoho) के फाउंडर श्रीधर वेम्बु का मानना है कि AI से डरने की जरूरत नहीं है बल्कि खुद को इतना मजबूत बनाना जरूरी है कि आपकी जरूरत हमेशा बनी रहे। उनका कहना है कि सिर्फ कोडिंग जानना काफी नहीं है बल्कि अपने काम की गहरी समझ ही असली ताकत है।
श्रीधर वेम्बु ने हाल ही में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट के जरिए अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि आज के समय में केवल तेज कोडिंग करना ही सफलता की गारंटी नहीं है। पहले जहां कंपनियां सिर्फ अच्छे प्रोग्रामर तलाशती थीं अब उन्हें ऐसे लोग चाहिए जो बिजनेस, ग्राहक और समस्या को भी अच्छी तरह समझते हों। उनका कहना है कि कोड लिखना एक जरूरी स्किल है लेकिन असली पहचान तब बनती है जब आप जानते हों कि आपका काम किस समस्या को हल कर रहा है। ग्राहक सिर्फ सॉफ्टवेयर नहीं खरीदते वे भरोसा खरीदते हैं। उन्हें ऐसा प्रोडक्ट चाहिए जो सुरक्षित हो,सही तरीके से काम करे और लंबे समय तक भरोसेमंद रहे।
वेम्बु का सबसे बड़ा फॉर्मूला यही है कि अगर नौकरी बचानी है तो अपने क्षेत्र का एक्सपर्ट बनना होगा। यानी जिस इंडस्ट्री में आप काम कर रहे हैं, उसकी गहराई से समझ जरूरी है। मान लीजिए आप हेल्थ टेक में काम करते हैं तो सिर्फ ऐप बनाना काफी नहीं है। आपको हेल्थ सेक्टर के नियम, मरीजों की जरूरतें और सुरक्षा के नियम भी समझने होंगे। यही चीज आपको बाकी लोगों से अलग बनाती है। AI तेजी से काम कर सकता है लेकिन इंसान की समझ, अनुभव और सही फैसला लेने की क्षमता अभी भी सबसे बड़ी ताकत है।
श्रीधर वेम्बु ने माना कि AI ने सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट की शुरुआती प्रक्रिया को बहुत आसान बना दिया है। अब कोड जल्दी लिखा जा सकता है, टेस्टिंग तेज हो सकती है और प्रोटोटाइप भी कम समय में तैयार हो जाते हैं लेकिन उन्होंने साफ कहा कि एक मजबूत, सुरक्षित और लंबे समय तक चलने वाला प्रोडक्ट बनाना अभी भी आसान नहीं है। इसमें सिक्योरिटी, सपोर्ट, कंप्लायंस और सिस्टम की स्थिरता जैसी कई चीजें शामिल होती हैं। इन मामलों में इंसानी समझ अभी भी सबसे जरूरी है। यही वजह है कि सिर्फ AI पर निर्भर रहना सही नहीं होगा।
वेम्बु का मानना है कि AI को नौकरी छीनने वाला दुश्मन नहीं बल्कि काम आसान करने वाला टूल समझना चाहिए। अगर सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए तो AI डेवलपर्स का समय बचा सकता है और उन्हें बेहतर काम करने का मौका दे सकता है। उन्होंने कहा कि सॉफ्टवेयर इंडस्ट्री में कई बार जरूरत से ज्यादा जटिलता पैदा हो जाती है। AI की मदद से इस अनावश्यक जटिलता को कम किया जा सकता है। इससे काम बेहतर और आसान बनता है। जो लोग AI के साथ काम करना सीख जाएंगे वही भविष्य में ज्यादा सफल होंगे।
AI को लेकर सबसे बड़ा डर यही है कि मशीनें इंसानों की जगह ले लेंगी लेकिन श्रीधर वेम्बु इस सोच से पूरी तरह सहमत नहीं हैं। उनका कहना है कि कुछ काम ऐसे हैं जिन्हें AI पूरी तरह कभी नहीं कर पाएगा। जैसे शिक्षक, नर्स, डॉक्टर, केयरगिवर और ऐसे कई पेशे जहां इंसानी भावना, समझ और संवेदनशीलता जरूरी होती है। वहां मशीनें पूरी तरह इंसानों की जगह नहीं ले सकतीं। उन्होंने Elon Musk के यूनिवर्सल इनकम जैसे विचारों पर भी सवाल उठाए और कहा कि भविष्य में काम खत्म नहीं होगा बल्कि काम करने का तरीका बदलेगा।
आज की दुनिया तेजी से बदल रही है और AI इस बदलाव का बड़ा हिस्सा है। ऐसे में सबसे जरूरी बात है खुद को समय के साथ अपडेट रखना। नई तकनीक से भागने की बजाय उसे समझना और अपनाना ज्यादा समझदारी है। अगर आप अपने काम में गहराई लाते हैं, लगातार सीखते रहते हैं और AI को सही तरीके से इस्तेमाल करना सीख जाते हैं तो आपकी नौकरी सिर्फ सुरक्षित नहीं रहेगी, बल्कि आपके आगे बढ़ने के मौके भी बढ़ जाएंगे। भविष्य उन्हीं का होगा जो बदलाव से डरेंगे नहीं बल्कि उसे अपनाकर खुद को और बेहतर बनाएंगे।
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