PhonePe ने हाल ही में अपने IPO की योजना टालने का निर्णय लिया है। इसके पीछे मुख्य कारण निवेशकों की कम डिमांड और ग्लोबल मार्केट में बढ़ती अनिश्चितता है। रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी के पहले से तय 15 अरब डॉलर के वैल्यूएशन से कम की डिमांड देखी गई जिससे IPO टालना पड़ा।

मार्च में भारत की IPO (Initial Public Offering) पाइपलाइन निवेशकों की नजर में खास है। Jio Platforms, Flipkart, PhonePe, Zepto और SBI Funds Management जैसी बड़ी कंपनियों ने लगभग 70,000 करोड़ रुपए के IPO लाने की योजना बनाई थी। लेकिन पश्चिम एशिया में बढ़ते जियो-पॉलिटिकल तनाव और बाजार में हालिया अस्थिरता के चलते कंपनियों को अपनी लिस्टिंग की समय-सीमा पर दोबारा विचार करना पड़ रहा है।
PhonePe ने हाल ही में अपने IPO की योजना टालने का निर्णय लिया है। इसके पीछे मुख्य कारण निवेशकों की कम डिमांड और ग्लोबल मार्केट में बढ़ती अनिश्चितता है। रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी के पहले से तय 15 अरब डॉलर के वैल्यूएशन से कम की डिमांड देखी गई जिससे IPO टालना पड़ा। इस कदम ने संकेत दिया कि बड़ी लिस्टिंग के समय में निवेशकों का मूड कितना महत्वपूर्ण होता है।
Reliance Industries की टेलीकॉम यूनिट Jio Platforms भारत का अब तक का सबसे बड़ा IPO लाने की तैयारी कर रही है। शुरुआती अनुमानों के अनुसार, इस पेशकश के जरिए लगभग 4.3 अरब डॉलर (लगभग 40,000 करोड़ रुपए) जुटाए जा सकते हैं और Jio का वैल्यूएशन 170 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है।
Walmart के नियंत्रण वाली ई-कॉमर्स कंपनी Flipkart ने अपनी होल्डिंग कंपनी का ढांचा सिंगापुर से भारत ट्रांसफर किया है। यह कदम इसकी घरेलू लिस्टिंग की तैयारी के रूप में देखा जा रहा है। पिछली वैल्यूएशन 37 बिलियन डॉलर थी जब Alphabet ने 350 मिलियन डॉलर का निवेश किया था।
यह एसेट मैनेजमेंट कंपनी भारत में IPO लाने पर विचार कर रही है। इसके जरिए 1.2 बिलियन डॉलर तक जुटाए जा सकते हैं जिससे निवेशकों को म्यूचुअल फंड सेक्टर में निवेश का अवसर मिलेगा।
क्विक कॉमर्स कंपनी Zepto ने पहले IPO के लिए गोपनीय दस्तावेज जमा किए थे। इस IPO से लगभग 11,000 करोड़ रुपए जुटाने की उम्मीद है।
IPO लाने वाली कंपनियों के लिए मौजूदा माहौल चुनौतीपूर्ण है। बाजार में गिरावट और निवेशकों की सतर्कता के कारण नई लिस्टिंग में निवेश करना जोखिम भरा माना जाता है। निवेशक अक्सर लार्ज-कैप शेयरों में पैसा लगाना पसंद करते हैं जबकि नए IPO से दूरी बनाते हैं। Bonanza Portfolio की रिसर्च एनालिस्ट खुशी मिस्त्री के मुताबिक, ब्रॉडर और मिडकैप इंडेक्स में गिरावट ने निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता कम कर दी है। PL Capital Markets के उदय पाटिल ने कहा कि कंपनियां सेकेंडरी मार्केट की अस्थिरता और वैल्यूएशन संबंधी चिंताओं के कारण IPO लाने में सतर्क हो गई हैं।
हालांकि, मौजूदा सुस्ती के बावजूद भारत की IPO पाइपलाइन मजबूत बनी हुई है। एक्सपर्ट के अनुसार, यह सुस्ती केवल निवेशकों के बदलते मूड के कारण है न कि किसी ढांचागत समस्या के चलते। कंपनियां IPO लाने या न लाने के मामले में सोच-समझकर कदम उठा रही हैं ताकि उन्हें बाजार से बेहतर प्रतिक्रिया मिले। इस स्थिति से स्पष्ट है कि आने वाले महीनों में Jio Platforms, Flipkart और अन्य मेगा IPO का निवेशक उत्साह और बाजार की स्थिरता पर निर्भर करेगा। ऐसे समय में निवेशक और कंपनियों दोनों के लिए सतर्क रहना जरूरी है।