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रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत का सेमीकंडक्टर बाजार 2030 तक करीब 120 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है और 2035 तक यह 300 अरब डॉलर का आंकड़ा छू सकता है। अभी यह बाजार लगभग 45-50 अरब डॉलर का है लेकिन पिछले कुछ सालों में इसमें लगातार तेज ग्रोथ देखी गई है।
भारत अब टेक्नोलॉजी की दुनिया में एक नए दौर में कदम रख रहा है। जिस तरह मोबाइल, इंटरनेट और डिजिटल सेवाओं ने देश को बदला अब उसी तरह सेमीकंडक्टर सेक्टर भी बड़ा बदलाव लाने वाला है। आने वाले सालों में यह इंडस्ट्री न सिर्फ तेजी से बढ़ेगी बल्कि देश की अर्थव्यवस्था और रोजगार के लिए भी गेमचेंजर साबित हो सकती है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत का सेमीकंडक्टर बाजार 2030 तक करीब 120 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है और 2035 तक यह 300 अरब डॉलर का आंकड़ा छू सकता है। अभी यह बाजार लगभग 45-50 अरब डॉलर का है लेकिन पिछले कुछ सालों में इसमें लगातार तेज ग्रोथ देखी गई है। इस तेजी के पीछे सबसे बड़ी वजह है टेक्नोलॉजी का बढ़ता इस्तेमाल खासकर AI, ऑटोमोबाइल और डेटा सेंटर जैसे सेक्टर में।
आज हर जगह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल बढ़ रहा है चाहे वह स्मार्टफोन हो, कार हो या फिर बड़े डेटा सेंटर। यही वजह है कि चिप्स यानी सेमीकंडक्टर की मांग तेजी से बढ़ रही है। जैसे-जैसे देश डिजिटल होता जा रहा है वैसे-वैसे इन चिप्स की जरूरत भी बढ़ती जा रही है जो इस सेक्टर को आगे ले जा रही है।
आने वाले समय में भारत सिर्फ सेमीकंडक्टर का इस्तेमाल ही नहीं करेगा बल्कि खुद इसका उत्पादन भी बड़े स्तर पर करेगा। उम्मीद है कि 2035 तक देश अपनी जरूरत का 60% से ज्यादा सेमीकंडक्टर खुद बना सकेगा। इसके लिए कई नए प्रोजेक्ट्स पर काम चल रहा है जिनमें सिलिकॉन फैब, कंपाउंड फैब और असेंबली यूनिट्स शामिल हैं। इससे भारत को आत्मनिर्भर बनने में मदद मिलेगी।
सरकार की पहल और निजी कंपनियों की दिलचस्पी के कारण इस सेक्टर में भारी निवेश आ रहा है। आने वाले 5 सालों में करीब 50 अरब डॉलर का नया निवेश आने की उम्मीद है। इसके अलावा 2030 से 2035 के बीच भी 75-80 अरब डॉलर का अतिरिक्त निवेश हो सकता है। इतना बड़ा निवेश इस इंडस्ट्री को और मजबूत बनाएगा और भारत को ग्लोबल मार्केट में एक अहम खिलाड़ी बना सकता है।
सेमीकंडक्टर सेक्टर के बढ़ने का सबसे बड़ा फायदा रोजगार के रूप में मिलेगा। अनुमान है कि 2035 तक इस इंडस्ट्री में करीब 20 लाख नई नौकरियां पैदा हो सकती हैं। इनमें मैन्युफैक्चरिंग, डिजाइन और अन्य तकनीकी क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर अवसर मिलेंगे यानी यह सेक्टर युवाओं के लिए करियर के नए रास्ते खोलने वाला है।
हालांकि, इतनी तेज ग्रोथ को बनाए रखना आसान नहीं होगा। इसके लिए सही प्लानिंग और नीतियों का मजबूत होना जरूरी है। सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि प्रोजेक्ट्स समय पर पूरे हों और कंपनियों को जमीन, बिजली और अन्य सुविधाएं आसानी से मिलें। साथ ही केंद्र और राज्य सरकारों के बीच बेहतर तालमेल भी जरूरी होगा।