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सोना, जमीन और शेयर बाजार के बाद अब अमीर निवेशकों की नजर भारतीय कला बाजार पर है। हाल ही में सायरस पूनावाला द्वारा राजा रवि वर्मा की एक पेंटिंग 167.2 करोड़ रुपये में खरीदे जाने के बाद यह चर्चा और तेज हो गई है।

एक समय था जब महंगी पेंटिंग्स, पुराने आर्टवर्क और ऐतिहासिक कलाकृतियां सिर्फ शौक और शान की चीज मानी जाती थीं। बड़े घरानों के लोग इन्हें अपनी पसंद और स्टेटस दिखाने के लिए खरीदते थे लेकिन अब तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है। आज यही सदियों पुरानी कला अरबपतियों के लिए “सेफ हेवन” यानी सुरक्षित निवेश का बड़ा जरिया बन गई है। सोना, जमीन और शेयर बाजार के बाद अब अमीर निवेशकों की नजर भारतीय कला बाजार पर है। हाल ही में सायरस पूनावाला द्वारा राजा रवि वर्मा की एक पेंटिंग 167.2 करोड़ रुपये में खरीदे जाने के बाद यह चर्चा और तेज हो गई है। इस रिकॉर्ड डील ने साफ कर दिया कि आर्ट अब सिर्फ दीवार सजाने की चीज नहीं बल्कि लंबी अवधि में शानदार रिटर्न देने वाला मजबूत निवेश बन चुका है।
भारतीय कला बाजार में सबसे ज्यादा चर्चा उस समय हुई जब उद्योगपति सायरस पूनावाला ने प्रसिद्ध चित्रकार राजा रवि वर्मा की पेंटिंग को 167.2 करोड़ रुपये में खरीदा। यह कीमत अनुमान से काफी ज्यादा थी जिसने पूरे आर्ट मार्केट को चौंका दिया। इस डील ने यह साबित कर दिया कि दुर्लभ और ऐतिहासिक कला की कीमत समय के साथ कम नहीं होती बल्कि लगातार बढ़ती है। खास बात यह है कि ऐसे आर्टवर्क दोबारा नहीं बन सकते इसलिए उनकी वैल्यू और ज्यादा मजबूत हो जाती है।
यह बदलाव सिर्फ एक पेंटिंग तक सीमित नहीं है। पिछले साल लंदन में Christie’s की नीलामी में मुगलकालीन पेंटिंग “A Family of Cheetahs” लगभग 120 करोड़ रुपये में बिकी। हैरानी की बात यह थी कि इसकी अनुमानित कीमत सिर्फ 7 से 8.5 करोड़ रुपये थी। इसी तरह 2025 में एम.एफ. हुसैन की पेंटिंग “Gram Yatra” 118 करोड़ रुपये में बिकी जिसने मॉडर्न इंडियन आर्ट का नया रिकॉर्ड बना दिया। इन उदाहरणों से साफ है कि भारतीय कला बाजार तेजी से नई कीमतों पर पहुंच रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इसका सबसे बड़ा कारण है कमी यानी लिमिटेड उपलब्धता। पुराने और ऐतिहासिक आर्टवर्क सीमित संख्या में हैं। उन्हें दोबारा बनाया नहीं जा सकता। यही दुर्लभता उनकी कीमत बढ़ाती है। दूसरी बड़ी वजह यह है कि आर्ट की कीमतें सीधे शेयर बाजार से जुड़ी नहीं होतीं। अगर बाजार गिर भी जाए तो जरूरी नहीं कि कला की कीमत भी गिरे। यही कारण है कि बड़े निवेशक अपने पोर्टफोलियो को सुरक्षित रखने के लिए आर्ट को चुन रहे हैं।
आज हाई नेट-वर्थ निवेशक सिर्फ मुनाफा नहीं बल्कि स्थिरता भी चाहते हैं। वे चाहते हैं कि उनका पैसा लंबे समय तक सुरक्षित रहे और समय के साथ उसकी वैल्यू बढ़ती जाए। आर्ट मार्केट एक्सपर्ट अनीता डालमिया के अनुसार, अब बड़े निवेशक पोर्टफोलियो डायवर्सिफिकेशन के लिए आर्ट को गंभीरता से देख रहे हैं। उनके लिए यह सिर्फ सुंदरता नहीं बल्कि वेल्थ प्रिजर्वेशन का मजबूत तरीका बन चुका है।
भारतीय आर्ट में निवेश सिर्फ प्रतिष्ठा नहीं, अच्छा रिटर्न भी दे रहा है। IIMA Aura Art Indian Art Index के अनुसार, 2025 की तीसरी तिमाही में भारतीय आर्ट में 35 प्रतिशत सालाना रिटर्न दर्ज किया गया। वहीं पिछले 5 साल का CAGR करीब 18 प्रतिशत रहा है। यह किसी भी निवेशक के लिए बेहद आकर्षक आंकड़ा है। यही वजह है कि अब निवेशक सिर्फ सोना या प्रॉपर्टी ही नहीं बल्कि ऐतिहासिक पेंटिंग्स और दुर्लभ कला में भी पैसा लगा रहे हैं।
विशेषज्ञ बताते हैं कि जिन्होंने 1990 के दशक में एम.एफ. हुसैन की पेंटिंग्स खरीदी थीं आज उन्हें कई गुना रिटर्न मिल चुका है। इसी तरह V. S. Gaitonde जैसे कलाकारों के शुरुआती खरीदार आज बेहद मजबूत लाभ में हैं। यही सफलता नई पीढ़ी के निवेशकों को भी आकर्षित कर रही है। अब वे समझ चुके हैं कि सही कला में किया गया निवेश सिर्फ भावनात्मक नहीं आर्थिक रूप से भी बेहद फायदेमंद हो सकता है।
भारत में जैसे-जैसे अमीर निवेशकों की संख्या बढ़ रही है वैसे-वैसे कला बाजार भी मजबूत हो रहा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय कला की मांग बढ़ने से इसकी कीमतों में और तेजी आने की उम्मीद है। पुरानी पेंटिंग्स, एंटीक मूर्तियां और ऐतिहासिक कलाकृतियां अब सिर्फ विरासत नहीं बल्कि भविष्य की संपत्ति बन चुकी हैं। आने वाले समय में आर्ट निवेश और ज्यादा लोकप्रिय हो सकता है।
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