इंडिगो जो कभी समय पर उड़ान भरने और भरोसेमंद सेवा के लिए जानी जाती थी अचानक देश की सबसे बड़ी एविएशन पहेली बन गई है। कुछ ही हफ्तों में इसकी ऑन-टाइम परफॉर्मेंस 80% से गिरकर सिर्फ 19.7% पर पहुंच गई इतनी तेज गिरावट किसी बड़े भारतीय एयरलाइन में पहले कभी दर्ज नहीं हुई।

इंडिगो पिछले कुछ सालों में भारत की सबसे भरोसेमंद एयरलाइन बनकर उभरी थी। ऑन-टाइम परफॉर्मेंस हो या कम कैंसिलेशन हर मामले में इंडिगो एयरलाइन यात्रियों की पहली पसंद रही लेकिन नवंबर के बाद अचानक हालात ऐसे बदले कि वही इंडिगो आज कई यात्रियों के लिए "सबसे बुरा सपना" बन गई। जिस एयरलाइन ने अपनी समयबद्धता पर हमेशा गर्व किया उसी का ऑन-टाइम परफॉर्मेंस 3 दिसंबर तक गिरकर सिर्फ 19.7% रह गया। यानी हर पांच में से चार उड़ानें देरी से थीं। इतनी भारी गिरावट किसी भी बड़े भारतीय एयरलाइन में शायद ही पहले देखी गई हो।
अक्टूबर में जहां इंडिगो का OTP शानदार 84.1% था वहीं नवंबर में गिरकर यह 67.7% हो गया और दिसंबर की शुरुआत में सीधे 20% के नीचे पहुंच गया। यह सिर्फ एक आंकड़ा नहीं बल्कि एक ऐसी स्थिति है जिसने यात्रियों को परेशान करने के साथ एयरलाइन को सवालों के घेरे में ला खड़ा किया है। एयर इंडिया एक्सप्रेस का OTP 69.9%, स्पाइसजेट का 68.7% और एयर इंडिया का 66.8% रहा। यहां तक कि नई एयरलाइन आकासा एयर ने भी 67.5% का OTP बनाए रखा। ऐसे में साफ है कि समस्या उद्योग-स्तर की नहीं बल्कि केवल इंडिगो की आंतरिक असंगति की देन है।
बताया जा रहा है कि, ये देरी सिर्फ किसी एक कारण की वजह से नहीं हुई। रिपोर्टों और यात्रियों की शिकायतों के मुताबिक, स्टाफ की कमी, तकनीकी परेशानियां, शेड्यूलिंग का अत्यधिक दबाव और ग्राउंड ऑपरेशन्स में गिरावट होने के कारण हालात को बद से बदतर बना दिया। दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और कोलकाता जैसे बड़े शहरों से यात्रियों ने एयरपोर्ट की स्थिति को अव्यवस्थित, अनिश्चित और अनमैनेज्ड बताया। तमाम शिकायतें आने के बाद DGCA ने इंडिगो अधिकारियों के साथ एक आपात बैठक बुलाई है।
जनवरी से अक्टूबर तक एयरलाइन ने पूरे देश में सबसे कम कैंसिलेशन किए औसतन सिर्फ 0.73%, जो राष्ट्रीय औसत से भी कम है। साल भर एयरलाइन ने 80-90% के बीच OTP बनाए रखा था। लेकिन अब उसी इंडिगो में एक महीने के भीतर इतनी तेज गिरावट होना उसके आंतरिक ढांचे में आई किसी गंभीर समस्या का संकेत देता है। यात्रियों की नजर में यह बदलाव सिर्फ एक आंकड़ा नहीं बल्कि भरोसा टूटने जैसा है।