Israel-Iran जंग के बढ़ते तनाव का असर भारतीय शेयर बाजार पर साफ दिखा। सोमवार को सेंसेक्स और निफ्टी में भारी गिरावट दर्ज की गई। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स हजारों अंकों तक टूट गया। निफ्टी और बैंक निफ्टी भी दबाव में रहे। बीएसई मार्केट कैप में करीब 6 लाख करोड़ रुपये की कमी आई।

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर अब सीधे भारतीय शेयर बाजार पर दिखने लगा है। Israel, Iran और United States के बीच बढ़ते टकराव की खबरों ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी। सोमवार की शुरुआत भारी गिरावट के साथ हुई और कुछ ही मिनटों में बाजार में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। हालांकि बाद में थोड़ी रिकवरी दिखी लेकिन नुकसान बड़ा रहा।
सप्ताह के पहले कारोबारी दिन बाजार ने तेज गिरावट के साथ शुरुआत की। BSE Sensex 2743 अंक यानी 3.38% टूटकर 78,543 पर खुला। वहीं Nifty 50 519 अंक यानी 2.06% गिरकर 24,659 पर खुला। बैंकिंग शेयरों पर भी दबाव साफ दिखा और Bank Nifty में 1300 अंकों से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई। हालांकि कुछ देर बाद बाजार में हल्की रिकवरी आई। सेंसेक्स करीब 1000 अंक की गिरावट के साथ 80,282 पर और निफ्टी करीब 300 अंक टूटकर 24,900 के नीचे कारोबार करता दिखा।
मिडिल ईस्ट में तनाव का सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ता है। खबरों के बीच कच्चे तेल के दाम में 10 फीसदी से ज्यादा का उतार-चढ़ाव देखा गया। एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर जंग लंबी चली तो तेल 100 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकता है। भारत जैसे आयात पर निर्भर देश के लिए यह स्थिति महंगाई और आर्थिक दबाव दोनों बढ़ा सकती है।
Bombay Stock Exchange के टॉप 30 में से 29 शेयर गिरावट में रहे। केवल बीईएल के शेयरों में करीब 1% की बढ़त देखने को मिली। अन्य प्रमुख गिरावट वाले शेयरों में InterGlobe Aviation (इंडिगो) में लगभग 5% गिरावट, Larsen & Toubro में करीब 4% गिरावट, Adani Ports & SEZ में लगभग 3% गिरावट देखने को मिली। ज्यादातर सेक्टर लाल निशान में नजर आए जिससे साफ है कि बिकवाली व्यापक रही।
इस गिरावट का सबसे बड़ा असर निवेशकों की संपत्ति पर पड़ा। शुक्रवार को बीएसई का कुल मार्केट कैप 463.50 लाख करोड़ रुपये था जो सोमवार को घटकर करीब 457.50 लाख करोड़ रुपये रह गया। यानि एक ही दिन में लगभग 6 लाख करोड़ रुपये की वैल्यू कम हो गई। यह गिरावट बताती है कि वैश्विक तनाव का असर भारतीय बाजार पर कितना तेजी से पड़ता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि बाजार की दिशा अब पूरी तरह अंतरराष्ट्रीय हालात पर निर्भर करेगी। अगर तनाव कम होता है तो बाजार संभल सकता है, लेकिन अगर स्थिति बिगड़ती है तो दबाव और बढ़ सकता है। फिलहाल निवेशकों को घबराने के बजाय सोच-समझकर कदम उठाने की सलाह दी जा रही है। वैश्विक घटनाओं के दौर में धैर्य ही सबसे बड़ी रणनीति मानी जाती है।