गोल्ड की ‘हाई-हाई’ सिल्वर की भी ‘बल्ले-बल्ले, देखें आज के रेट

खबर लिखे जाने तक यहां 24 कैरेट 10 ग्राम सोना 1,57,400 रुपये के आसपास ट्रेड करता दिखा, जबकि चांदी में भी तेज बढ़त दर्ज हुई और 6,250 रुपये की तेजी के साथ इसका भाव 3,29,580 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया।

आज के रेट सोना-चांदी दोनों में बल्ले-बल्ले
आज के रेट: सोना-चांदी दोनों में बल्ले-बल्ले
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar21 Jan 2026 11:05 AM
bookmark

Gold-Silver Price : शेयर बाजार आज सीमित दायरे में ठहरा दिखा, लेकिन कमोडिटी मार्केट में तेजी का काफी दमदार माहौल है। एमसीएक्स पर सोना बुधवार को ऑल-टाइम हाई छूता नजर आया, और खबर लिखे जाने तक वायदा कारोबार में इसके दाम करीब 3% उछले रहे। चांदी ने भी रफ्तार पकड़ी और लगभग 1,600 रुपये की बढ़त दर्ज की गई। उधर घरेलू स्पॉट बाजार में भी चमक बरकरार रही सोना करीब 3.10% चढ़कर 4,550 रुपये महंगा हुआ, जिससे 24 कैरेट 10 ग्राम का भाव बढ़कर 1,55,780 रुपये पर पहुंच गया। वहीं चांदी ने भी जोरदार उछाल दिखाया और स्पॉट में करीब 1,990 रुपये बढ़कर 3,25,910 रुपये के स्तर पर जा पहुंची।

दिल्ली- मुंबई दोनों में भाव चढ़े

दिल्ली और मुंबई दोनों ही बड़े बाजारों में आज सोना-चांदी ने तेजी का दमदार संकेत दिया। बुलियन मार्केट के आंकड़ों के मुताबिक, राजधानी दिल्ली में सोने के दामों में रिकॉर्ड उछाल देखने को मिला और 10 ग्राम सोना 6,430 रुपये की छलांग लगाकर (करीब 4.28%) 1,57,130 रुपये के पार निकल गया। चांदी भी पीछे नहीं रही दिल्ली में इसका भाव करीब 2% चढ़कर 3,29,020 रुपये प्रति किलो पर पहुंच गया। उधर आर्थिक राजधानी मुंबई में भी रुझान लगभग यही रहा। खबर लिखे जाने तक यहां 24 कैरेट 10 ग्राम सोना 1,57,400 रुपये के आसपास ट्रेड करता दिखा, जबकि चांदी में भी तेज बढ़त दर्ज हुई और 6,250 रुपये की तेजी के साथ इसका भाव 3,29,580 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया।

फ्यूचर्स मार्केट में सोना-चांदी दोनों चमके

एमसीएक्स (Multi Commodity Exchange) पर आज सोना रिकॉर्ड जोन में बना हुआ है और ऑल-टाइम हाई के आसपास कारोबार कर रहा है। 5 फरवरी को एक्सपायर होने वाले गोल्ड कॉन्ट्रैक्ट में तेज खरीदारी दिखी, जिसके चलते भाव करीब 4.17% चढ़े। खबर लिखे जाने तक सोना 6,272 रुपये की मजबूती के साथ 1,56,837 रुपये का स्तर पार कर गया। चांदी ने भी इसी ट्रेंड को फॉलो किया और एमसीएक्स पर ऑल-टाइम हाई के करीब पहुंच गई। 5 मार्च एक्सपायरी वाले सिल्वर कॉन्ट्रैक्ट में उछाल के साथ कीमत 7,214 रुपये बढ़कर 3,30,886 रुपये प्रति किलो तक जा पहुंची। Gold-Silver Price

संबंधित खबरें

अगली खबर पढ़ें

चांदी ‘ओवरबॉट’ जोन में! टारगेट के बाद 1 लाख तक टूट का रिस्क क्यों बढ़ा

जानकारों का एक वर्ग मानता है कि भाव जरूरत से ज्यादा गर्म हो चुके हैं और अगर अंतरराष्ट्रीय व घरेलू बाजार अपने-अपने टारगेट जोन तक पहुंचते हैं, तो वहां से मुनाफावसूली और ट्रेंड रिवर्सल का जोखिम बढ़ सकता है।

चांदी रिकॉर्ड हाई पर
चांदी रिकॉर्ड हाई पर
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar20 Jan 2026 11:57 AM
bookmark

Silver Price Crash : देश के वायदा बाजार से लेकर दिल्ली सर्राफा बाजार तक चांदी लगातार नए रिकॉर्ड बना रही है, लेकिन इसी तेजी के बीच एक बड़ा सवाल उठ रहा है क्या मौजूदा उछाल के बाद चांदी में तेज गिरावट भी आ सकती है? जानकारों का एक वर्ग मानता है कि भाव जरूरत से ज्यादा गर्म हो चुके हैं और अगर अंतरराष्ट्रीय व घरेलू बाजार अपने-अपने टारगेट जोन  तक पहुंचते हैं, तो वहां से मुनाफावसूली और ट्रेंड रिवर्सल का जोखिम बढ़ सकता है। बीते एक महीने में कीमतों में लगभग 50% से अधिक उछाल की वजह से यह बहस और तेज हो गई है। 17 दिसंबर को चांदी पहली बार करीब 2 लाख रुपये के आसपास बंद हुई थी, और 19 जनवरी तक 3 लाख के स्तर को छूने की बात कही जा रही है यानी एक महीने में करीब 1 लाख रुपये का जंप। ऐसे में विशेषज्ञ 30% तक की करेक्शन (करीब 1 लाख रुपये या उससे अधिक) की संभावना की तरफ संकेत कर रहे हैं।

पहले समझिए टारगेट जोन क्या है

जानकारों की नजर में चांदी की चाल समझने के लिए इस वक्त दो कंपास सबसे अहम हैं एक ग्लोबल और दूसरा घरेलू। अंतरराष्ट्रीय बाजार में 100 डॉलर प्रति औंस का स्तर सिर्फ एक आंकड़ा नहीं, बल्कि मनोवैज्ञानिक सीमा और तकनीकी टर्निंग पॉइंट माना जा रहा है। मौजूदा भाव अगर वहां तक पहुंचते हैं, तो बाजार में ओवरबॉट (जरूरत से ज्यादा खरीदा हुआ) माहौल और गहरा सकता है यानी छोटे-से ट्रिगर पर भी तेज मुनाफावसूली की गुंजाइश बन सकती है। वहीं भारत के MCX पर 3.25 से 3.30 लाख रुपये का दायरा ‘रेज़िस्टेंस ज़ोन’ की तरह देखा जा रहा है, जहां तेजी की असली परीक्षा होगी। अगर चांदी इस दहलीज पर टिकने के बजाय फिसलती है, तो करेक्शन की रफ्तार बढ़ सकती है और गिरावट एक झटके में ज्यादा गहरी दिख सकती है।

गिरावट की वजहें क्या बन सकती हैं?

चांदी की मौजूदा रैली के पीछे जिन वजहों ने आग लगाई थी, वही अब ब्रेक का काम भी कर सकती हैं। सबसे बड़ा ट्रिगर टैरिफ टेंशन और वैश्विक अनिश्चितता रही, जिसने निवेशकों को सेफ-हेवन की तरफ धकेला लेकिन अगर दबाव के बीच टैरिफ मोर्चे पर नरमी के संकेत मिलते हैं, तो यही सेफ-हेवन ट्रेड ढीला पड़ सकता है और कीमतों पर सीधा दबाव आ सकता है। दूसरी तरफ डॉलर इंडेक्स की संभावित मजबूती भी चांदी की चमक फीकी कर सकती है, क्योंकि डॉलर में रिकवरी अक्सर कीमती धातुओं को नीचे खींचती है। इसके अलावा, जब चांदी जरूरत से ज्यादा महंगी हो जाती है, तो बाजार “रिप्लेसमेंट” की राह पकड़ता है इंडस्ट्री और निवेशक कॉपर-एल्यूमीनियम जैसे विकल्पों की ओर शिफ्ट होने लगते हैं, जिससे मांग घटने का खतरा बढ़ता है। गोल्ड-सिल्वर रेश्यो अगर अपने निचले स्तर से ऊपर की तरफ सामान्य होने लगे, तो संकेत यही होगा कि गोल्ड तुलनात्मक रूप से मजबूत हो रहा है और चांदी में करेक्शन की गुंजाइश बढ़ रही है। ऊपर से तेज उछाल के बाद मुनाफावसूली लगभग तय मानी जाती है यही हवा निकलने वाला दौर कई बार गिरावट को अचानक तेज कर देता है। वहीं फेड रेट-कट की उम्मीदें अगर पहले ही भाव में डिस्काउंट हो चुकी हों, तो आगे बाजार फेड की टिप्पणी और संकेतों पर ज्यादा झटके खा सकता है। इन्हीं फैक्टर्स के जोड़ से विश्लेषकों का आकलन है कि अगर चांदी 3.25–3.30 लाख के पास जाकर फिसलती है, तो 30% तक का करेक्शन संभव है ।

क्या 1980 जैसा इतिहास दोहराया जा सकता है?

इतिहास में बड़े फॉल पहले भी हुए हैं। 1980 में चांदी के भाव पीक के बाद बहुत कम समय में तेज टूटे थे। 2011 में भी ऊंचे स्तरों के बाद करेक्शन देखने को मिला। विशेषज्ञों का तर्क है कि जब बाजार अति-उत्साह में होता है और कीमतें जरूरत से ज्यादा बढ़ जाती हैं, तो गिरावट भी उतनी ही तेज हो सकती है। हालांकि, आज का बाजार 1980 जैसा हूबहू होगा यह कहना ठीक नहीं, लेकिन इतिहास यह जरूर बताता है कि परवलयिक (बहुत तेज) तेजी के बाद करेक्शन का जोखिम बढ़ जाता है।

निवेशक के लिए संकेत: अब किन बातों पर नजर रखें?

  1. 3.25–3.30 लाख का ज़ोन: वहां टिकेगी या वहीं से फिसलेगी?
  2. डॉलर इंडेक्स की दिशा
  3. टैरिफ/जियो-पॉलिटिकल हेडलाइंस
  4. गोल्ड-सिल्वर रेश्यो में बदलाव
  5. वॉल्यूम के साथ प्रॉफिट बुकिंग के संकेतSilver Price Crash


संबंधित खबरें

अगली खबर पढ़ें

इतनी चांदी खप कहां रही है? टेक्नोलॉजी ने कैसे बढ़ाई कीमतें

सोलर एनर्जी की रफ्तार बढ़ने के साथ फोटोवोल्टिक सेल्स में इस्तेमाल होने वाला सिल्वर पेस्ट भी मांग को लगातार ऊपर धकेल रहा है। वहीं EV और ऑटोमोबाइल की दुनिया में वायरिंग, सेंसर, बैटरी चार्जिंग सिस्टम और ऑटोनॉमस टेक की चिप्स तक चांदी की खपत बढ़ती जा रही है।

टेक्नोलॉजी ने बढ़ाई चांदी की डिमांड
टेक्नोलॉजी ने बढ़ाई चांदी की डिमांड
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar20 Jan 2026 11:18 AM
bookmark

Silver Price :  सोमवार को MCX पर चांदी ने पहली बार 3 लाख रुपये प्रति किलो का आंकड़ा छूकर बाजार में नई हलचल पैदा कर दी। भाव लगातार रिकॉर्ड बना रहे हैं, इसलिए आम खरीदार के मन में एक स्वाभाविक सवाल उठता है जब चांदी के गहनों का चलन पहले जैसा नहीं रहा, तो कीमतें इतनी तेज़ क्यों भाग रही हैं? दरअसल चांदी की कहानी अब ज्वेलरी तक सीमित नहीं रही टेक्नोलॉजी, ग्रीन एनर्जी और इंडस्ट्रियल सेक्टर ने इसे नए दौर की हाई-डिमांड धातु बना दिया है। यही वजह है कि मांग का दबाव बढ़ते ही निवेशकों की नजर भी चांदी पर टिक गई है। आंकड़े बताते हैं कि पिछले पांच साल में देश में करीब 33 हजार टन चांदी की खपत हुई जिसमें जेवर और सिक्कों के साथ-साथ उद्योगों की जरूरत भी शामिल है। जैसे-जैसे इंडस्ट्रियल मांग का दायरा फैल रहा है, बाजार में यह धारणा मजबूत हो रही है कि चांदी की कीमतों में अभी और तेजी की गुंजाइश बनी रह सकती है।

1) चांदी का इस्तेमाल अब कहां-कहां हो रहा है?

चांदी की असली चमक अब शोरूम की रौशनी में नहीं, बल्कि फैक्ट्रियों की मशीनों और हाई-टेक लैब्स के सर्किट में दिखाई दे रही है। आज यह धातु ज्वेलरी से आगे बढ़कर आधुनिक अर्थव्यवस्था की वर्कहॉर्स मेटल बन चुकी है। इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में स्मार्टफोन, लैपटॉप, टीवी, कैमरा, माइक्रोचिप और प्रिंटेड सर्किट बोर्ड तक हर जगह चांदी की जरूरत कंडक्टर और कोटिंग के रूप में पड़ती है। सोलर एनर्जी की रफ्तार बढ़ने के साथ फोटोवोल्टिक सेल्स में इस्तेमाल होने वाला सिल्वर पेस्ट भी मांग को लगातार ऊपर धकेल रहा है। वहीं EV और ऑटोमोबाइल की दुनिया में वायरिंग, सेंसर, बैटरी चार्जिंग सिस्टम और ऑटोनॉमस टेक की चिप्स तक चांदी की खपत बढ़ती जा रही है। मेडिकल सेक्टर में इसकी एंटी-बैक्टीरियल क्षमता के कारण वाउंड ड्रेसिंग, फिल्टर और उपकरणों की कोटिंग जैसी जरूरतें बनी हुई हैं। और परंपरागत तौर पर शगुन, पूजा-पाठ, सिक्के, पायल, बर्तन और धार्मिक वस्तुओं में चांदी की मांग आज भी स्थिर है। यही वजह है कि बढ़ती औद्योगिक जरूरतों और सांस्कृतिक उपयोग के मेल से भारत दुनिया के बड़े चांदी उपभोक्ताओं में लगातार गिना जाता है।

2) मांग अचानक क्यों बढ़ गई?

चांदी की तेजी किसी एक वजह का नतीजा नहीं है, बल्कि यह कई परतों में बनता दबाव है और हर परत कीमतों को ऊपर धकेलती चली जाती है। दुनिया जिस रफ्तार से ग्रीन एनर्जी की ओर बढ़ रही है, उसी रफ्तार से सोलर प्रोजेक्ट्स का जाल फैल रहा है और हर नए सोलर सेटअप के साथ चांदी की जरूरत बढ़ती जाती है। दूसरी तरफ EV और टेक्नोलॉजी बूम ने इंडस्ट्री की मांग को नया ईंधन दिया है ऑटो, बैटरी, सेंसर और एडवांस्ड चिप्स जैसी जरूरतों में चांदी की हिस्सेदारी लगातार बढ़ रही है। इसी बीच अपूर्ति की टाइटनेस भी बाजार को और संवेदनशील बना रही है खनन उत्पादन में सीमाएं और सप्लाई-चेन की रुकावटें उपलब्धता घटाती हैं तो भाव स्वाभाविक रूप से चढ़ते हैं। महंगाई और वैश्विक अनिश्चितता के माहौल में निवेशक भी चांदी को सेफ-हैवन की तरह देखने लगे हैं, जिससे खरीदारी का दबाव बढ़ता है। ऊपर से नीतिगत समर्थन भारत समेत कई देशों की ग्रीन एनर्जी और मैन्युफैक्चरिंग को प्रोत्साहन देने वाली नीतियां मांग को लंबी अवधि का सहारा देती हैं। नतीजा यह कि चांदी की कीमतें क्षणिक उछाल नहीं, बल्कि स्ट्रक्चरल डिमांड के दम पर नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ती दिख रही हैं।

3) भारत में चांदी का खजाना कहां है?

भारत की कहानी चांदी के मामले में थोड़ी उलटी है खपत के मोर्चे पर देश आगे, लेकिन उत्पादन के मोर्चे पर सीमाएं साफ दिखती हैं। यहां चांदी की ज्यादातर आपूर्ति किसी अलग सिल्वर माइन से नहीं आती, बल्कि जिंक, लेड और कॉपर की खदानों से बाय-प्रोडक्ट के तौर पर निकलती है यानी चांदी अक्सर मुख्य धातु नहीं, साइड-प्रोडक्शन बनकर साथ आती है। राजस्थान इस लिहाज से सबसे अहम पट्टी मानी जाती है, जहां जिंक-लेड माइनिंग के दौरान बड़ी मात्रा में चांदी भी निकलती है और यहां की खनन गतिविधियां देश की सप्लाई में बड़ा योगदान देती हैं। झारखंड की जमशेदपुर के आसपास की माइनिंग बेल्ट में उत्पादन सीमित स्तर पर बताया जाता है। वहीं कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में गोल्ड/कॉपर खनन के साथ चांदी का हिस्सा भी साथ-साथ निकलता है। देश के कुछ अन्य हिस्सों में भी छिटपुट उत्पादन मौजूद है, लेकिन कुल मिलाकर तस्वीर यही है कि घरेलू मांग के मुकाबले भारतीय सप्लाई कम पड़ती है और यही कमी आयात पर निर्भरता को बढ़ाती है।

4) भारत किन देशों से चांदी आयात करता है?

घरेलू मांग की रफ्तार इतनी तेज है कि भारत की अपनी आपूर्ति अक्सर कम पड़ जाती है और यहीं से आयात की मजबूरी शुरू होती है। बाजार में आम तौर पर मेक्सिको, पेरू, रूस और चीन जैसे देशों को भारत के प्रमुख सोर्स के रूप में देखा जाता है, जहां से बड़े पैमाने पर चांदी मंगाई जाती है। Silver Price

संबंधित खबरें