इसके रसगुल्ले हो ,बीकानेरी नमकीन हो या फिर तीखी भुजिया इसका स्वाद ऐसा है कि जुबान भूलती ही नहीं है

Bikanerwala[/caption]
अग्रवाल भाईयों ने जब मिठाई और नमकीन की शुरुआत की थी तब लोग तेल खाना नहीं जानते थे । सबसे पहले उन्होनें मूंगफली के तेल मे नमकीन बनाना शुरू किया । देशी घी खाने वालों को यह स्वाद जल्दी अच्छा लगने वाला नहीं था। घी से आने वाली मनमोहक खुशबू की अपनी अलग ही पहचान थी। लेकिन यह पुराना होने के बाद खराब महकता था। तेल से बनायी चीजों मे ना कोई एक्स्ट्रा महक थी। धीरे-धीरे लोगो ने इस स्वाद को समझा और ये भी जाना की तेल से बनी चीजें ज्यादा दिनों तक खराब नहीं होती हैं ।इसलिए उन्होंने उनके बनाए हुए प्रोडक्ट को पसंद करना शुरू किया। देखते ही देखते काम और बढ़ता गया और उनके परिवार ने मोती बाजार से लेकर चांदनी चौक तक कई सारी मिठाइयों का स्वाद लोगो को चखाया । काजू की बर्फी जब मार्केट मे आयी थी तब 10 रुपये किलो बेची थी। 1 महीने के अंदर काजू बर्फी इतनी फेमस हो गई कि सुबह से लेकर शाम तक उन्हें आराम करने का समय नहीं मिलता था।