Share Market Crash: क्यों लुढ़के सेंसेक्स और निफ्टी? 5 बड़े कारण आए सामने
सेंसेक्स अपने दिन के हाई से करीब 800 अंक नीचे आ गया जबकि निफ्टी 23,000 के पास कारोबार करता दिखा। मिडिल ईस्ट में जारी तनाव, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली से निवेशकों का मनोबल कमजोर हो गया। आइए जानते हैं कि आखिर क्यों बाजार ने गिरावट का रुख अपनाया।

भारतीय शेयर बाजारों में सोमवार 16 मार्च को शुरुआती तेजी ज्यादा देर टिक नहीं पाई। सेंसेक्स अपने दिन के हाई से करीब 800 अंक नीचे आ गया जबकि निफ्टी 23,000 के पास कारोबार करता दिखा। मिडिल ईस्ट में जारी तनाव, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली से निवेशकों का मनोबल कमजोर हो गया। आइए जानते हैं कि आखिर क्यों बाजार ने गिरावट का रुख अपनाया।
शुरुआती तेजी के बाद अचानक फिसलाव
बाजार खुलते ही सेंसेक्स 419 अंक की तेजी के साथ 74,983 पर पहुंच गया था। वहीं निफ्टी भी 133 अंक ऊपर 23,284 के स्तर पर ट्रेड कर रहा था लेकिन जैसे ही सुबह 11 बजे के आसपास मुनाफावसूली शुरू हुई सेंसेक्स 399 अंक गिरकर 74,164 पर आ गया। निफ्टी भी 129 अंक फिसलकर 23,021 के करीब पहुंच गया। यानी दिन के उच्च स्तर से दोनों इंडेक्स लगभग 800 अंक नीचे आ गए।
शेयर बाजार में गिरावट के 5 बड़े कारण
1. ग्लोबल बाजारों से मिले कमजोर संकेत
एशियाई बाजारों में सोमवार को गिरावट देखने को मिली। साउथ कोरिया का कोस्पी, जापान का निक्केई 225 और चीन का शंघाई SSE कंपोजिट इंडेक्स लाल निशान में कारोबार कर रहे थे। अमेरिका के शुक्रवार को कमजोर बंद होने का असर भी भारतीय बाजारों पर पड़ा।
2. विदेशी निवेशकों की बिकवाली
विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली बाजार पर दबाव बना रही है। मार्च महीने में अब तक विदेशी निवेशकों ने करीब 56,883 करोड़ रुपये की निकासी की है। शुक्रवार को अकेले ₹10,716 करोड़ के शेयर बिके जिससे बाजार का सेंटीमेंट कमजोर हुआ।
3. कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें
ब्रेंट क्रूड की कीमत लगभग 1% बढ़कर 104.2 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गई। तेल की ऊंची कीमतें भारत जैसे बड़े क्रूड खरीदार देशों के लिए महंगाई और चालू खाता घाटा बढ़ा सकती हैं जो निवेशकों के लिए चिंता का विषय है।
4. मिडिल ईस्ट में तनाव
ईरान, इजराइल और अमेरिका के बीच जारी तनाव ने एनर्जी मार्केट में उथल-पुथल मचा दी है। होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले तेल जहाजों को लेकर भी चिंता बढ़ी है। इस वजह से निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता कम हो गई।
5. रुपये में कमजोरी
डॉलर के मुकाबले रुपये में गिरावट भी बाजार पर दबाव डाल रही है। सोमवार को रुपये ने 13 पैसे गिरकर 92.43 प्रति डॉलर का स्तर छुआ। विदेशी निवेशकों की बिकवाली और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के कारण करेंसी पर दबाव बना हुआ है।
निवेशकों के लिए क्या सीख?
बाजार की लगातार गिरावट के बीच निवेशकों को शांत और सोच-समझकर निर्णय लेना चाहिए। वैश्विक तनाव और तेल कीमतों जैसी वजहों से सेंटीमेंट प्रभावित होता है इसलिए लंबी अवधि का नजरिया और रिस्क मैनेजमेंट इस समय जरूरी है।
डिस्क्लेमरः चेतना मंच यूजर्स को सलाह देता है कि वह कोई भी निवेश निर्णय लेने के पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह लें।
भारतीय शेयर बाजारों में सोमवार 16 मार्च को शुरुआती तेजी ज्यादा देर टिक नहीं पाई। सेंसेक्स अपने दिन के हाई से करीब 800 अंक नीचे आ गया जबकि निफ्टी 23,000 के पास कारोबार करता दिखा। मिडिल ईस्ट में जारी तनाव, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली से निवेशकों का मनोबल कमजोर हो गया। आइए जानते हैं कि आखिर क्यों बाजार ने गिरावट का रुख अपनाया।
शुरुआती तेजी के बाद अचानक फिसलाव
बाजार खुलते ही सेंसेक्स 419 अंक की तेजी के साथ 74,983 पर पहुंच गया था। वहीं निफ्टी भी 133 अंक ऊपर 23,284 के स्तर पर ट्रेड कर रहा था लेकिन जैसे ही सुबह 11 बजे के आसपास मुनाफावसूली शुरू हुई सेंसेक्स 399 अंक गिरकर 74,164 पर आ गया। निफ्टी भी 129 अंक फिसलकर 23,021 के करीब पहुंच गया। यानी दिन के उच्च स्तर से दोनों इंडेक्स लगभग 800 अंक नीचे आ गए।
शेयर बाजार में गिरावट के 5 बड़े कारण
1. ग्लोबल बाजारों से मिले कमजोर संकेत
एशियाई बाजारों में सोमवार को गिरावट देखने को मिली। साउथ कोरिया का कोस्पी, जापान का निक्केई 225 और चीन का शंघाई SSE कंपोजिट इंडेक्स लाल निशान में कारोबार कर रहे थे। अमेरिका के शुक्रवार को कमजोर बंद होने का असर भी भारतीय बाजारों पर पड़ा।
2. विदेशी निवेशकों की बिकवाली
विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली बाजार पर दबाव बना रही है। मार्च महीने में अब तक विदेशी निवेशकों ने करीब 56,883 करोड़ रुपये की निकासी की है। शुक्रवार को अकेले ₹10,716 करोड़ के शेयर बिके जिससे बाजार का सेंटीमेंट कमजोर हुआ।
3. कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें
ब्रेंट क्रूड की कीमत लगभग 1% बढ़कर 104.2 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गई। तेल की ऊंची कीमतें भारत जैसे बड़े क्रूड खरीदार देशों के लिए महंगाई और चालू खाता घाटा बढ़ा सकती हैं जो निवेशकों के लिए चिंता का विषय है।
4. मिडिल ईस्ट में तनाव
ईरान, इजराइल और अमेरिका के बीच जारी तनाव ने एनर्जी मार्केट में उथल-पुथल मचा दी है। होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले तेल जहाजों को लेकर भी चिंता बढ़ी है। इस वजह से निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता कम हो गई।
5. रुपये में कमजोरी
डॉलर के मुकाबले रुपये में गिरावट भी बाजार पर दबाव डाल रही है। सोमवार को रुपये ने 13 पैसे गिरकर 92.43 प्रति डॉलर का स्तर छुआ। विदेशी निवेशकों की बिकवाली और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के कारण करेंसी पर दबाव बना हुआ है।
निवेशकों के लिए क्या सीख?
बाजार की लगातार गिरावट के बीच निवेशकों को शांत और सोच-समझकर निर्णय लेना चाहिए। वैश्विक तनाव और तेल कीमतों जैसी वजहों से सेंटीमेंट प्रभावित होता है इसलिए लंबी अवधि का नजरिया और रिस्क मैनेजमेंट इस समय जरूरी है।
डिस्क्लेमरः चेतना मंच यूजर्स को सलाह देता है कि वह कोई भी निवेश निर्णय लेने के पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह लें।












