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LPG Cylinder Code Meaning: हर LPG सिलेंडर की निश्चित अंतराल पर तकनीकी जांच की जाती है। नए सिलेंडर को कई वर्षों तक उपयोग के बाद पहली बार विस्तृत परीक्षण से गुजरना पड़ता है। इसके बाद निर्धारित समय पर उसकी दोबारा जांच होती रहती है।

घर में इस्तेमाल होने वाले LPG सिलेंडर पर कई तरह के नंबर और कोड लिखे होते हैं। इनमें A-24, B-26, C-27 या D-28 जैसे कोड सबसे ज्यादा लोगों का ध्यान खींचते हैं। अक्सर लोग इन कोड्स को सिलेंडर की एक्सपायरी डेट समझ लेते हैं और सोचते हैं कि शायद इसके बाद सिलेंडर इस्तेमाल करने लायक नहीं रहेगा। यही वजह है कि सोशल मीडिया और आम बातचीत में भी इसे लेकर कई तरह की गलतफहमियां देखने को मिलती हैं लेकिन सच यह है कि LPG सिलेंडर पर लिखा यह कोड उसकी एक्सपायरी डेट नहीं होता। यह दरअसल एक सुरक्षा संकेत होता है जो बताता है कि सिलेंडर की अगली तकनीकी जांच कब होनी है। अगर आप भी अब तक इसे एक्सपायरी डेट समझते रहे हैं तो यह जानकारी आपके लिए बेहद जरूरी है।
सिलेंडर के ऊपरी हिस्से पर आपको A, B, C या D के साथ एक नंबर लिखा दिखाई देगा। यह कोड बताता है कि सिलेंडर की अगली सुरक्षा जांच किस अवधि में होनी है। यहां A का मतलब जनवरी से मार्च, B का मतलब अप्रैल से जून, C का मतलब जुलाई से सितंबर और D का मतलब अक्टूबर से दिसंबर तक की अवधि होती है। इसके साथ लिखा नंबर उस साल को दर्शाता है जिसमें सिलेंडर की जांच की जानी है। उदाहरण के लिए यदि किसी सिलेंडर पर B-26 लिखा है तो इसका मतलब है कि उस सिलेंडर की अगली सुरक्षा जांच अप्रैल से जून 2026 के बीच निर्धारित है। इसका यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि जून 2026 के बाद सिलेंडर बेकार हो जाएगा।
LPG सिलेंडर कोई ऐसी वस्तु नहीं है जिसकी निश्चित एक्सपायरी डेट होती है। यदि सिलेंडर समय-समय पर जांच में सुरक्षित पाया जाता है तो उसे कई वर्षों तक इस्तेमाल किया जा सकता है। दरअसल, सिलेंडर की उपयोग अवधि उसकी स्थिति, मजबूती और सुरक्षा जांच पर निर्भर करती है। इसलिए उस पर एक्सपायरी डेट लिखने की बजाय टेस्टिंग डेट का कोड दिया जाता है जिससे समय पर उसकी जांच हो सके।
LPG सिलेंडर को बेहद मजबूत स्टील से तैयार किया जाता है ताकि वह गैस के दबाव को सुरक्षित तरीके से संभाल सके। इसके निर्माण के दौरान कई सुरक्षा मानकों का पालन किया जाता है। भारत में केवल वही कंपनियां LPG सिलेंडर बना सकती हैं जो भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) के नियमों का पालन करती हैं और संबंधित सुरक्षा एजेंसियों से मंजूरी प्राप्त करती हैं। यही कारण है कि घरेलू गैस सिलेंडर को दुनिया के सबसे सुरक्षित गैस भंडारण उपकरणों में गिना जाता है।
हर LPG सिलेंडर की निश्चित अंतराल पर तकनीकी जांच की जाती है। नए सिलेंडर को कई वर्षों तक उपयोग के बाद पहली बार विस्तृत परीक्षण से गुजरना पड़ता है। इसके बाद निर्धारित समय पर उसकी दोबारा जांच होती रहती है। इस प्रक्रिया में सिलेंडर की बाहरी और अंदरूनी स्थिति को परखा जाता है। यह देखा जाता है कि कहीं उसमें जंग, दरार, लीकेज या कोई अन्य तकनीकी समस्या तो नहीं है। यदि सिलेंडर सभी सुरक्षा मानकों पर खरा उतरता है तभी उसे दोबारा गैस भरने के लिए मंजूरी दी जाती है।
जब उपभोक्ता द्वारा इस्तेमाल किया गया खाली सिलेंडर गैस एजेंसी के माध्यम से प्लांट में पहुंचता है तो उसकी नियमित जांच की जाती है। जिन सिलेंडरों की टेस्टिंग अवधि नजदीक होती है या पूरी हो चुकी होती है उन्हें अलग कर दिया जाता है। इसके बाद उनकी विस्तृत जांच की जाती है। सुरक्षित पाए जाने पर उन्हें दोबारा पेंट किया जाता है और फिर गैस भरकर बाजार में भेजा जाता है। यदि कोई सिलेंडर सुरक्षा मानकों पर खरा नहीं उतरता तो उसे उपयोग से हटा दिया जाता है।
LPG गैस उच्च दबाव पर सिलेंडर में भरी जाती है। इसलिए सिलेंडर का मजबूत और सुरक्षित होना बेहद जरूरी है। समय-समय पर होने वाली जांच किसी भी संभावित समस्या को पहले ही पहचानने में मदद करती है। अगर कहीं जंग लगने, धातु कमजोर होने या लीकेज जैसी समस्या दिखाई देती है तो उसे समय रहते ठीक किया जा सकता है। इससे दुर्घटनाओं का खतरा काफी कम हो जाता है और उपभोक्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित होती है।
जब भी नया सिलेंडर घर पहुंचे तो उसकी सील और रेगुलेटर कनेक्शन को जरूर जांचें। साथ ही सिलेंडर पर लिखे सुरक्षा कोड को भी देख सकते हैं ताकि यह पता चल सके कि उसकी अगली टेस्टिंग कब निर्धारित है। अगर सिलेंडर से गैस की गंध आए या किसी तरह की लीकेज महसूस हो तो तुरंत गैस एजेंसी या आपातकालीन हेल्पलाइन से संपर्क करना चाहिए। सुरक्षा के प्रति थोड़ी सी सावधानी किसी भी बड़ी दुर्घटना को रोक सकती है।
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