Meta Ray-Ban स्मार्ट ग्लास इन दिनों दुनिया भर में चर्चा का विषय बन गए हैं। यह नई टेक्नोलॉजी देखने में सामान्य चश्मे जैसी लगती है लेकिन इसके अंदर कैमरा, माइक्रोफोन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी आधुनिक सुविधाएं मौजूद हैं। यूजर इन ग्लास की मदद से फोटो और वीडियो रिकॉर्ड कर सकता है।

तकनीक हर दिन हमारी जिंदगी को आसान बना रही है। स्मार्टफोन, स्मार्टवॉच और अब स्मार्ट ग्लास जैसी नई डिवाइसें हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बनती जा रही हैं। इन्हीं में से एक है Meta और Ray-Ban के स्मार्ट ग्लास जिन्हें भविष्य की तकनीक माना जा रहा है। देखने में ये साधारण चश्मे जैसे लगते हैं, लेकिन इनके अंदर कैमरा, माइक्रोफोन और AI जैसी उन्नत तकनीक छिपी होती है। हालांकि हाल ही में आई एक जांच रिपोर्ट ने इन स्मार्ट ग्लास को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रिपोर्ट के अनुसार इन ग्लास से रिकॉर्ड होने वाली कुछ वीडियो क्लिप्स को AI ट्रेनिंग के लिए इंसान भी देखते हैं। इस खुलासे के बाद टेक्नोलॉजी और प्राइवेसी के बीच संतुलन को लेकर नई बहस शुरू हो गई है।
Meta और Ray-Ban ने मिलकर ऐसे स्मार्ट ग्लास बनाए हैं जो दिखने में सामान्य सनग्लास जैसे होते हैं लेकिन इनके फ्रेम में छोटे कैमरे, माइक्रोफोन और स्पीकर लगे होते हैं। इन ग्लास की मदद से यूजर फोटो खींच सकता है, वीडियो रिकॉर्ड कर सकता है, लाइव स्ट्रीम कर सकता है और वॉयस कमांड से AI से सवाल पूछ सकता है। उदाहरण के तौर पर अगर कोई व्यक्ति किसी नई जगह पर घूम रहा है तो वह ग्लास से फोटो लेकर AI से पूछ सकता है कि सामने दिख रही इमारत कौन-सी है। AI तुरंत जानकारी दे सकता है। यही वजह है कि बड़ी टेक कंपनियां स्मार्ट ग्लास को आने वाले समय का बड़ा प्लेटफॉर्म मान रही हैं।
27 फरवरी को स्वीडन के अखबार Svenska Dagbladet की एक जांच रिपोर्ट में दावा किया गया कि स्मार्ट ग्लास से रिकॉर्ड हुई कुछ वीडियो क्लिप्स को इंसान भी देखते हैं। रिपोर्ट के अनुसार AI को ट्रेन करने के लिए कुछ कंपनियां कर्मचारियों को वीडियो और तस्वीरें दिखाती हैं ताकि वे उनमें मौजूद चीजों की पहचान कर सकें। इसी प्रक्रिया में कुछ कर्मचारियों ने ऐसे वीडियो देखने का दावा किया जिनमें लोग बेहद निजी स्थितियों में नजर आ रहे थे। कुछ मामलों में लोग कपड़े बदलते हुए, बाथरूम जाते हुए या अपने निजी पलों में रिकॉर्ड हो गए थे। सवाल यह है कि क्या उन लोगों को पता था कि उनका वीडियो रिकॉर्ड हो रहा है या नहीं।
आज की AI तकनीक को बेहतर बनाने के लिए भारी मात्रा में डेटा की जरूरत होती है। इसमें तस्वीरें, वीडियो, आवाज और टेक्स्ट शामिल होते हैं। AI मॉडल को सिखाने के लिए हजारों लोग स्क्रीन पर अलग-अलग ऑब्जेक्ट्स के चारों ओर बॉक्स बनाते हैं और बताते हैं कि वह चीज क्या है। इसी प्रक्रिया को डेटा एनोटेशन कहा जाता है। इस डेटा के जरिए AI सीखता है कि तस्वीर या वीडियो में कौन-सी चीज क्या है। लेकिन जब इस प्रक्रिया में निजी या संवेदनशील वीडियो शामिल हो जाएं तब प्राइवेसी को लेकर चिंता बढ़ना स्वाभाविक है।
स्मार्ट ग्लास को लेकर सबसे बड़ी चिंता यह है कि कैमरा हर समय यूजर के चेहरे पर लगा रहता है। कई बार सामने वाले व्यक्ति को पता ही नहीं चलता कि उसे रिकॉर्ड किया जा रहा है। हालांकि कंपनी ने रिकॉर्डिंग के समय जलने वाली एक LED लाइट दी है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि भीड़ या तेज रोशनी में यह लाइट आसानी से दिखाई नहीं देती। इसका मतलब यह है कि कई बार लोग अनजाने में रिकॉर्ड हो सकते हैं जो उनकी प्राइवेसी के लिए खतरा बन सकता है।
स्मार्ट ग्लास के साथ एक और बड़ी चिंता फेस रिकग्निशन तकनीक की है। अगर कैमरा फेस रिकग्निशन सिस्टम से जुड़ जाए तो किसी भी व्यक्ति की पहचान तुरंत की जा सकती है। कुछ टेक प्रयोगों में यह दिखाया गया है कि किसी व्यक्ति की फोटो को इंटरनेट डेटाबेस से मिलाकर उसका नाम, सोशल मीडिया प्रोफाइल और कभी-कभी संपर्क जानकारी तक पता की जा सकती है। अगर यह तकनीक स्मार्ट ग्लास के साथ व्यापक रूप से इस्तेमाल होने लगे तो यह सार्वजनिक जगहों पर लोगों की पहचान करना बेहद आसान बना सकती है।
नई तकनीक अक्सर कानून से तेज गति से आगे बढ़ जाती है। स्मार्ट ग्लास के मामले में भी कुछ ऐसा ही देखने को मिल रहा है। कई देशों में सार्वजनिक जगह पर वीडियो रिकॉर्ड करना कानूनी है। लेकिन जब कैमरा हर समय किसी के चेहरे पर लगा हो और लगातार रिकॉर्डिंग कर सकता हो तो स्थिति बदल जाती है। इस तरह की डिवाइस के लिए अभी स्पष्ट और सख्त नियम कई देशों में मौजूद नहीं हैं।
टेक कंपनियां स्मार्ट ग्लास को भविष्य का अगला बड़ा कंप्यूटिंग प्लेटफॉर्म मान रही हैं। जिस तरह स्मार्टफोन ने हमारी जिंदगी बदल दी उसी तरह आने वाले समय में स्मार्ट ग्लास भी आम हो सकते हैं लेकिन इसके साथ एक बड़ा सवाल भी खड़ा होता है। अगर हर व्यक्ति के चेहरे पर कैमरा होगा तो क्या दुनिया धीरे-धीरे एक बड़े सर्विलांस नेटवर्क में बदल जाएगी? तकनीक आगे बढ़ रही है लेकिन उसके साथ प्राइवेसी की सुरक्षा भी उतनी ही जरूरी है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि टेक कंपनियां और सरकारें मिलकर इस संतुलन को कैसे बनाए रखती हैं।