केंद्र सरकार ने MSME सेक्टर को मजबूती देने के लिए SIDBI को 5,000 करोड़ रुपये की इक्विटी सहायता मंजूर की है। इस फैसले से सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों को सस्ता और आसान कर्ज मिलने की राह खुलेगी। सरकार का मानना है कि इस पूंजी निवेश से SIDBI की वित्तीय क्षमता बढ़ेगी।

भारत की अर्थव्यवस्था में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) सेक्टर की भूमिका बेहद अहम है। यही सेक्टर रोजगार सृजन और आर्थिक विकास का मुख्य आधार है। अब सरकार ने एक बड़ा कदम उठाते हुए MSME सेक्टर को सशक्त बनाने के लिए भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (SIDBI) को 5,000 करोड़ रुपये की इक्विटी सहायता देने की मंजूरी दी है। इस फैसले से न सिर्फ छोटे उद्यमों को सस्ता और आसान कर्ज मिलेगा बल्कि आने वाले वर्षों में लाखों नए उद्यम और रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे।
केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में यह निर्णय लिया गया। सरकार का मानना है कि इस अतिरिक्त पूंजी से SIDBI को बाजार से कम लागत पर संसाधन जुटाने में मदद मिलेगी। इसके परिणामस्वरूप बैंक MSME सेक्टर को प्रतिस्पर्धी ब्याज दरों पर वित्तीय सहायता उपलब्ध कर सकेगा। वित्तीय सेवा विभाग (DFS) के जरिए यह राशि तीन किस्तों में SIDBI में निवेश की जाएगी। वित्त वर्ष 2025-26 में 3,000 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा, जबकि अगले दो वित्त वर्षों 2026-27 और 2027-28 में 1,000-1,000 करोड़ रुपये की इक्विटी डाली जाएगी। पहली किस्त की बुक वैल्यू 568.65 रुपये प्रति शेयर तय की गई है।
एमएसएमई सेक्टर देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है। यह न केवल रोजगार सृजन में मदद करता है, बल्कि छोटे उद्योगों के माध्यम से स्थानीय आर्थिक गतिविधियों को भी गति देता है। SIDBI को यह इक्विटी निवेश मिलने के बाद वित्त वर्ष 2024-25 के अंत तक जिन 76.26 लाख MSME को वित्तीय सहायता मिल रही है उनकी संख्या वित्त वर्ष 2027-28 तक 1.02 करोड़ तक पहुंच सकती है। इसका मतलब है कि लगभग 25.74 लाख नए MSME इस पहल के तहत औपचारिक वित्तीय प्रणाली से जुड़ेंगे। सरकार की योजना है कि इस कदम से छोटे उद्योग अधिक प्रतिस्पर्धी बन सकेंगे और नई तकनीक अपनाकर उत्पादन बढ़ा सकेंगे।
इस पहल से देश में रोजगार के अवसर भी तेजी से बढ़ेंगे। अनुमान है कि वित्त वर्ष 2027-28 के अंत तक लगभग 1.12 करोड़ नए रोजगार उत्पन्न होंगे। यह न केवल छोटे कारोबारियों को मजबूती देगा बल्कि स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियों को भी तेजी से बढ़ाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि SIDBI को मजबूत करने का यह फैसला Make in India, आत्मनिर्भर भारत और स्टार्टअप इकोसिस्टम को भी समर्थन देगा। आसान और सस्ता कर्ज मिलने से छोटे उद्यम नई तकनीक अपनाने, उत्पादन बढ़ाने और नए बाजारों में प्रवेश करने में सक्षम होंगे जिससे देश की समग्र आर्थिक वृद्धि को भी बल मिलेगा।