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Petrol Price News: अब तेल और गैस निकालने वाली कंपनियों को सरकार को कितना भुगतान करना होगा और उसका हिसाब कैसे लगाया जाएगा इसके नियम पहले की तुलना में ज्यादा साफ और आसान कर दिए गए हैं।

Crude Oil Royalty Change: दुनिया इस समय एक ऐसे दौर से गुजर रही है जहां हर दिन किसी न किसी देश के बीच तनाव की खबर सामने आ रही है। खासकर मिडिल ईस्ट में बढ़ते संघर्ष ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है जिसका सबसे बड़ा असर तेल और गैस की कीमतों पर देखने को मिल रहा है। ऐसे माहौल में भारत सरकार ने कच्चे तेल और नेचुरल गैस को लेकर एक बड़ा फैसला लिया है जिसे आने वाले समय में देश की ऊर्जा सुरक्षा के लिए अहम माना जा रहा है।
केंद्र सरकार ने कच्चे तेल, प्राकृतिक गैस और केसिंग हेड कंडेनसेट की रॉयल्टी व्यवस्था में बदलाव करने का फैसला किया है। आसान भाषा में कहें तो अब तेल और गैस निकालने वाली कंपनियों को सरकार को कितना भुगतान करना होगा और उसका हिसाब कैसे लगाया जाएगा इसके नियम पहले की तुलना में ज्यादा साफ और आसान कर दिए गए हैं। सरकार का मानना है कि इससे कंपनियों को काम करने में आसानी होगी और निवेश बढ़ेगा।
केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने इस फैसले की जानकारी देते हुए कहा कि यह बदलाव भारत के अपस्ट्रीम सेक्टर के लिए एक नई शुरुआत साबित हो सकता है। उनके मुताबिक लंबे समय से अलग-अलग नियमों और जटिल प्रक्रियाओं के कारण कंपनियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता था। अब नई व्यवस्था आने से कई पुरानी परेशानियां खत्म हो जाएंगी। सरकार ने यह भी साफ किया है कि ORD एक्ट और PNG नियमों में किए गए संशोधनों के बाद रॉयल्टी सिस्टम को और ज्यादा पारदर्शी और एक समान बनाया गया है। पहले अलग-अलग अनुबंधों में नियम अलग होने से भ्रम की स्थिति बनती थी, लेकिन अब कंपनियों को एक स्पष्ट नीति के तहत काम करने का मौका मिलेगा। इससे घरेलू और विदेशी निवेशकों का भरोसा बढ़ने की उम्मीद है।
ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े जानकारों का मानना है कि भारत लंबे समय से अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है। ऐसे में अगर देश के भीतर तेल और गैस उत्पादन बढ़ता है तो आयात पर निर्भरता कम हो सकती है। यही वजह है कि सरकार इस सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देने पर जोर दे रही है। नई नीति का मकसद सिर्फ कंपनियों को राहत देना नहीं बल्कि भारत को ऊर्जा के मामले में ज्यादा मजबूत बनाना भी है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लगातार दबाव में हैं। मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ने से सप्लाई प्रभावित होने का खतरा बना हुआ है। अगर हालात और बिगड़ते हैं तो तेल की कीमतों में बड़ी तेजी देखने को मिल सकती है। ऐसे में भारत जैसे बड़े उपभोक्ता देश के लिए घरेलू उत्पादन बढ़ाना बेहद जरूरी हो जाता है।
इसी बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी देशवासियों से ईंधन बचाने की अपील की है। उन्होंने लोगों को सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल बढ़ाने, स्वच्छ ऊर्जा अपनाने और जरूरत पड़ने पर वर्क फ्रॉम होम तथा वर्चुअल मीटिंग्स जैसे विकल्पों को अपनाने की सलाह दी है। सरकार का मानना है कि अगर ऊर्जा की बचत और घरेलू उत्पादन दोनों पर एक साथ काम किया जाए तो भविष्य में बड़े संकटों से बचा जा सकता है। सरकार के इस फैसले को सिर्फ एक नीतिगत बदलाव नहीं बल्कि आने वाले समय की तैयारी के रूप में देखा जा रहा है। वैश्विक हालात जिस तेजी से बदल रहे हैं उसमें ऊर्जा सुरक्षा हर देश के लिए सबसे बड़ी जरूरत बनती जा रही है। भारत अब इसी दिशा में अपने कदम मजबूत करता नजर आ रहा है।
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