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शेयर बाजार से जुड़े लोग इसे भारत के सबसे बड़े आईपीओ में से एक मान रहे हैं। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि NSE की मजबूत स्थिति और देश के सबसे बड़े एक्सचेंज होने की वजह से इस आईपीओ को अच्छा रिस्पॉन्स मिल सकता है।

भारतीय शेयर बाजार से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आ रही है। देश का सबसे बड़ा स्टॉक एक्सचेंज नेशनल स्टॉक एक्सचेंज यानी NSE अब अपने बहुप्रतीक्षित आईपीओ की तैयारी तेज करता नजर आ रहा है। लंबे समय से निवेशकों को इस आईपीओ का इंतजार था और अब खबर है कि NSE जून के आखिर तक सेबी के पास ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस यानी DRHP दाखिल कर सकता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, NSE का लक्ष्य इस वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही तक शेयर बाजार में लिस्ट होने का है। इसका मतलब है कि अगर सबकुछ योजना के मुताबिक रहा तो दिसंबर 2026 तक NSE के शेयर बाजार में ट्रेड होते दिखाई दे सकते हैं।
NSE के आईपीओ को लेकर निवेशकों में लंबे समय से उत्सुकता बनी हुई है। शेयर बाजार से जुड़े लोग इसे भारत के सबसे बड़े आईपीओ में से एक मान रहे हैं। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि NSE की मजबूत स्थिति और देश के सबसे बड़े एक्सचेंज होने की वजह से इस आईपीओ को अच्छा रिस्पॉन्स मिल सकता है। इससे पहले भी कई बार NSE के आईपीओ को लेकर खबरें सामने आई थीं लेकिन अलग-अलग कारणों से मामला आगे नहीं बढ़ पाया था। अब एक बार फिर तैयारियां तेज होने से निवेशकों की उम्मीदें बढ़ गई हैं।
रिपोर्ट्स के अनुसार, NSE अपने आईपीओ में करीब 4 से 4.5 प्रतिशत हिस्सेदारी बेच सकता है। अनुमान लगाया जा रहा है कि इससे एक्सचेंज लगभग 23,000 करोड़ रुपये जुटा सकता है। हालांकि यह रकम बाजार की स्थिति और कंपनी के अंतिम वैल्यूएशन पर निर्भर करेगी। अगर यह आईपीओ इसी आकार में आता है तो यह भारत के इतिहास के सबसे बड़े आईपीओ में शामिल हो सकता है। फिलहाल देश में बड़े आईपीओ की सूची में कई बड़ी कंपनियों के नाम शामिल हैं।
NSE ने पहली बार साल 2016 में आईपीओ के लिए ड्राफ्ट पेपर दाखिल किया था। उस समय कंपनी की योजना करीब 10,000 करोड़ रुपये जुटाने की थी लेकिन बाद में को-लोकेशन मामले को लेकर सेबी की आपत्तियों के चलते एक्सचेंज को अपना आईपीओ प्लान रोकना पड़ा। इसके बाद NSE ने कई बार रेगुलेटरी मंजूरी पाने की कोशिश की। अब बताया जा रहा है कि एक्सचेंज ने इस बार अपनी तैयारियां और तेज कर दी हैं। आईपीओ प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए कई देशी और विदेशी मर्चेंट बैंकर्स और लॉ फर्म्स को भी जोड़ा गया है।
NSE के आईपीओ में देश का सबसे बड़ा सरकारी बैंक SBI भी अपनी कुछ हिस्सेदारी बेच सकता है। SBI के चेयरमैन सीएस सेट्टी ने हाल ही में इस बात की जानकारी दी थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक, SBI और उसकी सहयोगी कंपनी SBI Caps की NSE में हिस्सेदारी की कुल वैल्यू करीब 43,500 करोड़ रुपये बताई जा रही है। ऐसे में आईपीओ के दौरान निवेशकों की नजर इस हिस्सेदारी बिक्री पर भी बनी रहेगी।
भारतीय बाजार में बड़े आईपीओ हमेशा चर्चा का विषय रहते हैं। इससे पहले Hyundai India और LIC जैसे बड़े आईपीओ बाजार में आ चुके हैं। अब NSE का आईपीओ भी इसी सूची में शामिल हो सकता है। चूंकि NSE देश के सबसे बड़े स्टॉक एक्सचेंज के तौर पर काम करता है इसलिए बाजार के जानकार इस आईपीओ को काफी अहम मान रहे हैं। आने वाले महीनों में निवेशकों की नजर सेबी की मंजूरी और कंपनी की आधिकारिक घोषणा पर बनी रहेगी।
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