नए लेबर कोड्स के लागू होने के बाद Zomato और Swiggy के शेयर में शुरुआती गिरावट देखी गई लेकिन निवेशक जल्दी ही बाजार में लौटे। जानें कैसे नए कानून फूड डिलीवरी कंपनियों, गिग वर्कर्स और निवेशकों को प्रभावित कर सकते हैं।

आज ऑनलाइन फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म Zomato की पैरेंट कंपनी एटर्नल और Swiggy के शेयरों में शुरुआती कारोबार में थोड़ी गिरावट देखने को मिली। नए लेबर कोड्स के लागू होने के बाद निवेशकों को लगा कि कंपनियों की ऑपरेटिंग लागत बढ़ सकती है जिसके चलते शेयरों में बिकवाली हुई। शुरुआती तौर पर एटर्नल और Swiggy के शेयर 2% तक टूट गए लेकिन जैसे ही ब्रोकरेज फर्मों ने कहा कि लॉन्ग टर्म में इसका असर सीमित होगा निवेशक लौटे और शेयरों ने रिकवरी की।
बीएसई पर एटर्नल का शेयर फिलहाल 0.20% की बढ़त के साथ ₹302.65 पर है। हालांकि इंट्रा-डे में यह 2.07% गिरकर ₹295.80 तक आ गया था फिर 2.50% बढ़कर ₹303.20 पर पहुंचा। वहीं Swiggy का शेयर 0.86% बढ़कर ₹398.05 पर ट्रेड कर रहा है। इंट्रा-डे में यह 0.16% गिरकर ₹394.00 तक आया था फिर 1.95% उछलकर ₹401.70 तक पहुंचा।
सरकार ने नए लेबर फ्रेमवर्क को गिग, माइग्रेंट, अनऑर्गेनाइज्ड और प्लेटफॉर्म-इकॉनमी वर्कर्स के लिए पेश किया है। इसका मकसद इन कर्मचारियों का रोजगार औपचारिक करना, सोशल सिक्योरिटी का दायरा बढ़ाना और उन्हें मजबूत बनाना है। नए कोड्स के तहत गिग वर्कर्स और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को अनिवार्य सोशल सिक्योरिटी कॉन्ट्रिब्यूशन देना होगा जिससे कंपनियों की लागत बढ़ सकती है।
ब्रोकरेज फर्मों का कहना है कि नए कानूनों का लॉन्ग टर्म वित्तीय असर सीमित रहेगा। मॉर्गन स्टैनले के मुताबिक फूड डिलीवरी और क्विक कॉमर्स कंपनियों को गिग वर्कर्स वेलफेयर फंड में रेवेन्यू का 1-2% देना होगा, जो प्रति ऑर्डर ₹1.5-₹2.5 तक आएगा। इसका एडजस्टेड ऑपरेटिंग प्रॉफिट पर 4-10% तक असर हो सकता है लेकिन यह खर्च प्लेटफॉर्म, वर्कर्स और कंज्यूमर्स के बीच बंट जाएगा।
जोमैटो और Swiggy का कहना है कि नए कानूनों का लॉन्ग टर्म में बिजनेस पर अधिक असर नहीं होगा। CLSA का अनुमान है कि हर ऑर्डर पर नेट इम्पैक्ट लगभग ₹1 रहेगा और इसे धीरे-धीरे कंज्यूमर्स पर डाला जाएगा। बर्न्स्टीन का कहना है कि एडजस्टेड ऑपरेटिंग प्रॉफिट मार्जिन पर 25-65 बेसिस प्वाइंट्स और क्विक कॉमर्स मार्जिन पर 60-70 बीपीएस का असर होगा जिसे यूनिट इकनॉमिक्स में मैनेज किया जा सकता है।