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प्लेटफॉर्म फीस, डिलीवरी चार्ज, पैकेजिंग फीस और टैक्स ये सभी मिलकर आपके बिल को बढ़ा देते हैं। कई बार ये चार्ज इतने छोटे लगते हैं कि ध्यान ही नहीं जाता लेकिन जब महीने भर के ऑर्डर जोड़कर देखते हैं तो यही छोटी रकम बड़ी बन जाती है।

आज के दौर में खाना ऑर्डर करना जितना आसान हो गया है उतना ही चुपचाप महंगा भी। मोबाइल उठाया, ऐप खोला, पसंद का खाना चुना और कुछ ही मिनटों में दरवाजे पर डिलीवरी यही सुविधा अब आदत बन चुकी है लेकिन इस सुविधा के पीछे ऐसे छोटे-छोटे चार्ज छिपे होते हैं जो महीने के अंत तक आपकी जेब पर बड़ा असर डालते हैं। अगर आप भी महीने में कई बार ऑनलाइन खाना मंगाते हैं तो यह जानना जरूरी है कि आखिर आपका कितना पैसा धीरे-धीरे खर्च हो रहा है।
जब आप ऑनलाइन खाना मंगाते हैं तो सिर्फ खाने की कीमत ही नहीं देते बल्कि उसके साथ कई तरह के चार्ज भी जुड़ते जाते हैं। प्लेटफॉर्म फीस, डिलीवरी चार्ज, पैकेजिंग फीस और टैक्स ये सभी मिलकर आपके बिल को बढ़ा देते हैं। कई बार ये चार्ज इतने छोटे लगते हैं कि ध्यान ही नहीं जाता लेकिन जब महीने भर के ऑर्डर जोड़कर देखते हैं तो यही छोटी रकम बड़ी बन जाती है। पिछले कुछ सालों में प्लेटफॉर्म फीस में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। जो फीस कभी 2 रुपये के आसपास थी वह अब बढ़कर करीब 17-18 रुपये तक पहुंच चुकी है। अगर आप महीने में 10-12 बार ऑर्डर करते हैं तो सिर्फ प्लेटफॉर्म फीस ही अच्छी-खासी रकम बन जाती है। इसके साथ डिलीवरी चार्ज जोड़ लें तो खर्च और बढ़ जाता है।
मान लीजिए आप महीने में 12 बार ऑनलाइन खाना मंगाते हैं। हर बार आपको प्लेटफॉर्म फीस और डिलीवरी चार्ज देना पड़ता है। धीरे-धीरे यह खर्च जोड़कर करीब 800-900 रुपये तक पहुंच सकता है। यानी बिना सोचे-समझे की गई यह सुविधा आपको हर महीने एक छोटी बचत के बराबर नुकसान दे रही है। यह नुकसान इसलिए महसूस नहीं होता क्योंकि हर बार रकम छोटी लगती है। लेकिन महीने के हिसाब से देखें तो यही छोटी-छोटी पेमेंट मिलकर बड़ा खर्च बन जाती है।
सिर्फ चार्ज ही नहीं, बल्कि ऑनलाइन मिलने वाला खाना खुद भी महंगा होता है। कई रिपोर्ट्स के मुताबिक, जो खाना आपको रेस्टोरेंट में 100 रुपये में मिल सकता है वही ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर 10-15 प्रतिशत ज्यादा कीमत में दिखता है। इसका मतलब यह है कि आप बिना जाने ही हर ऑर्डर में ज्यादा पैसे दे रहे हैं। यानी एक ही डिश के लिए आप ऑफलाइन और ऑनलाइन में अलग-अलग कीमत चुका रहे हैं। सुविधा के बदले यह अतिरिक्त खर्च देना पड़ता है जो लंबे समय में भारी पड़ सकता है।
ऑनलाइन फूड डिलीवरी का चलन तेजी से बढ़ा है। लोगों की लाइफस्टाइल बदल रही है और समय बचाने के लिए वे ऐप्स पर ज्यादा निर्भर हो रहे हैं। पिछले कुछ सालों में इस सेक्टर में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है और आने वाले समय में यह और भी बड़ा होने वाला है। लेकिन इस बढ़ते ट्रेंड के साथ खर्च भी उतनी ही तेजी से बढ़ रहा है।
ऑनलाइन खाना मंगाना गलत नहीं है, लेकिन इसे आदत बना लेना आपकी जेब के लिए भारी पड़ सकता है। अगर आप कभी-कभी ऑर्डर करते हैं तो ठीक है लेकिन हर दूसरे दिन ऐप खोलना आपकी मासिक बचत को कम कर सकता है। इसलिए बेहतर यही है कि जरूरत के हिसाब से ही ऑर्डर करें और कोशिश करें कि छोटे-छोटे खर्चों पर भी नजर रखें। थोड़ी सी समझदारी से आप हर महीने सैकड़ों रुपये बचा सकते हैं बिना अपनी सुविधा को पूरी तरह छोड़े।
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