भारत में तेजी से बढ़ रहा है कार मार्केट, क्यों उत्साहित हैं विदेशी कंपनियां?
भारत अब ऑटो सेक्टर में दुनिया का प्रमुख हब बनने की राह पर है। विदेशी कंपनियां जैसे सुज़ुकी, हुंडई, रेनॉल्ट और फॉक्सवैगन भारत में अपने प्रोडक्शन और सेल्स को बढ़ा रही हैं। बढ़ती लोकल डिमांड और एक्सपोर्ट की संभावनाओं ने भारत को निवेशकों के लिए आकर्षक बनाया है।

भारत की ऑटो इंडस्ट्री अब सिर्फ घरेलू मांग तक सीमित नहीं है। दुनिया की बड़ी कार कंपनियां भारत को अपने ग्लोबल ग्रोथ प्लान का अहम हिस्सा बना रही हैं। सुजुकी, हुंडई, रेनॉल्ट और फॉक्सवैगन जैसी कंपनियां भारत में प्रोडक्शन बढ़ा रही हैं और सेल्स टारगेट ऊंचा कर रही हैं। बढ़ता मार्केट, कम उत्पादन लागत और एक्सपोर्ट की संभावनाओं ने भारत को विदेशी निवेशकों के लिए आकर्षक बना दिया है। आइए जानते हैं कि कंपनियों की योजना और अनुमान क्या हैं।
सुजुकी और भारत में प्रोडक्शन प्लान
जापानी ऑटोमेकर सुजुकी मोटर कॉर्प ने चालू फाइनेंशियल ईयर के लिए अपने प्रोडक्शन का अनुमान बढ़ाकर 3.52 मिलियन यूनिट कर दिया है। भारत सुजुकी का सबसे बड़ा मार्केट है और GST रेट में बदलाव के बाद यहां सेल्स में तेजी की उम्मीद है। मारुति सुजुकी की चार फैक्ट्रियां सालाना 2.6 मिलियन यूनिट का उत्पादन करती हैं और यह भारत सुज़ुकी की ग्लोबल सेल्स का लगभग 56% और प्रोडक्शन का 65% हिस्सा है। पार्थो बनर्जी, मार्केटिंग और सेल्स सीनियर एग्जीक्यूटिव ने बताया कि जनवरी में बिक्री इतनी बढ़ी कि प्लांट को छुट्टियों में भी चलाना पड़ा। इसके अलावा, बैंक लोन सस्ते होने और आयकर में छूट की वजह से ग्राहक सक्रिय हैं। पहले नौ महीनों में भारत में सुजुकी की बिक्री 3.8% बढ़कर 1.35 मिलियन यूनिट हो गई जबकि यूरोप में यह गिरावट दर्ज हुई।
हुंडई की भारत में ग्रोथ उम्मीद
साउथ कोरिया की हुंडई मोटर का अनुमान है कि भारत में 2026 में 3.1% की सेल्स ग्रोथ होगी। इसका मतलब है कि भारत उसके ग्लोबल मार्केट में तीसरा सबसे बड़ा केंद्र बन गया है। US और कोरिया के बाद भारत में उसकी अंतरराष्ट्रीय सेल्स का लगभग 14% हिस्सा आता है। मैनेजिंग डायरेक्टर तरुण गर्ग ने कहा कि लोकल और ग्रामीण मार्केट दोनों से मजबूत डिमांड है और कंपनियां लंबे समय के बाद पॉजिटिव मोमेंटम देख रही हैं। इस साल जनवरी में हुंडई मोटर इंडिया की सेल्स रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची।
विदेशी कंपनियों का भारत में भरोसा
रेनॉल्ट और फॉक्सवैगन जैसी यूरोपियन कंपनियां भी भारत को ग्लोबल ग्रोथ प्लान का “की पिलर” मान रही हैं। रेनॉल्ट का अनुमान है कि अगले तीन सालों में 50% ग्रोथ भारत और ब्राजील के मार्केट से आएगी। कंपनी नए प्रोडक्ट्स और SUVs लॉन्च कर भारतीय बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की योजना बना रही है।
भारत क्यों बना आकर्षक मार्केट?
भारत अब दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा ऑटो मार्केट बन गया है। इसके पीछे कारण हैं-
- बढ़ती लोकल डिमांड और सस्ती उत्पादन लागत।
- सरकारी नीतियों और टैक्स कट के कारण निवेशकों को फायदा।
- एक्सपोर्ट हब बनने की क्षमता जिससे विदेशी कंपनियों को ग्लोबल मार्केट तक पहुंच।
इन कारणों से सुजुकी, हुंडई, रेनॉल्ट और फॉक्सवैगन जैसी कंपनियां भारत में बड़े निवेश और विस्तार की योजना बना रही हैं।
भविष्य की उम्मीद
ऑटो कंपनियों की योजना और अनुमान यह दर्शाते हैं कि भारत आने वाले सालों में ग्लोबल ऑटो सेक्टर का हब बन सकता है। लोकल डिमांड के साथ-साथ एक्सपोर्ट ग्रोथ के मौके भी निवेशकों के लिए आकर्षक हैं। भारत में यह सेक्टर विदेशी कंपनियों का प्रॉफिट इंजन बन सकता है और आने वाले सालों में और ज्यादा रोजगार और टेक्नोलॉजी निवेश ला सकता है।
भारत की ऑटो इंडस्ट्री अब सिर्फ घरेलू मांग तक सीमित नहीं है। दुनिया की बड़ी कार कंपनियां भारत को अपने ग्लोबल ग्रोथ प्लान का अहम हिस्सा बना रही हैं। सुजुकी, हुंडई, रेनॉल्ट और फॉक्सवैगन जैसी कंपनियां भारत में प्रोडक्शन बढ़ा रही हैं और सेल्स टारगेट ऊंचा कर रही हैं। बढ़ता मार्केट, कम उत्पादन लागत और एक्सपोर्ट की संभावनाओं ने भारत को विदेशी निवेशकों के लिए आकर्षक बना दिया है। आइए जानते हैं कि कंपनियों की योजना और अनुमान क्या हैं।
सुजुकी और भारत में प्रोडक्शन प्लान
जापानी ऑटोमेकर सुजुकी मोटर कॉर्प ने चालू फाइनेंशियल ईयर के लिए अपने प्रोडक्शन का अनुमान बढ़ाकर 3.52 मिलियन यूनिट कर दिया है। भारत सुजुकी का सबसे बड़ा मार्केट है और GST रेट में बदलाव के बाद यहां सेल्स में तेजी की उम्मीद है। मारुति सुजुकी की चार फैक्ट्रियां सालाना 2.6 मिलियन यूनिट का उत्पादन करती हैं और यह भारत सुज़ुकी की ग्लोबल सेल्स का लगभग 56% और प्रोडक्शन का 65% हिस्सा है। पार्थो बनर्जी, मार्केटिंग और सेल्स सीनियर एग्जीक्यूटिव ने बताया कि जनवरी में बिक्री इतनी बढ़ी कि प्लांट को छुट्टियों में भी चलाना पड़ा। इसके अलावा, बैंक लोन सस्ते होने और आयकर में छूट की वजह से ग्राहक सक्रिय हैं। पहले नौ महीनों में भारत में सुजुकी की बिक्री 3.8% बढ़कर 1.35 मिलियन यूनिट हो गई जबकि यूरोप में यह गिरावट दर्ज हुई।
हुंडई की भारत में ग्रोथ उम्मीद
साउथ कोरिया की हुंडई मोटर का अनुमान है कि भारत में 2026 में 3.1% की सेल्स ग्रोथ होगी। इसका मतलब है कि भारत उसके ग्लोबल मार्केट में तीसरा सबसे बड़ा केंद्र बन गया है। US और कोरिया के बाद भारत में उसकी अंतरराष्ट्रीय सेल्स का लगभग 14% हिस्सा आता है। मैनेजिंग डायरेक्टर तरुण गर्ग ने कहा कि लोकल और ग्रामीण मार्केट दोनों से मजबूत डिमांड है और कंपनियां लंबे समय के बाद पॉजिटिव मोमेंटम देख रही हैं। इस साल जनवरी में हुंडई मोटर इंडिया की सेल्स रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची।
विदेशी कंपनियों का भारत में भरोसा
रेनॉल्ट और फॉक्सवैगन जैसी यूरोपियन कंपनियां भी भारत को ग्लोबल ग्रोथ प्लान का “की पिलर” मान रही हैं। रेनॉल्ट का अनुमान है कि अगले तीन सालों में 50% ग्रोथ भारत और ब्राजील के मार्केट से आएगी। कंपनी नए प्रोडक्ट्स और SUVs लॉन्च कर भारतीय बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की योजना बना रही है।
भारत क्यों बना आकर्षक मार्केट?
भारत अब दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा ऑटो मार्केट बन गया है। इसके पीछे कारण हैं-
- बढ़ती लोकल डिमांड और सस्ती उत्पादन लागत।
- सरकारी नीतियों और टैक्स कट के कारण निवेशकों को फायदा।
- एक्सपोर्ट हब बनने की क्षमता जिससे विदेशी कंपनियों को ग्लोबल मार्केट तक पहुंच।
इन कारणों से सुजुकी, हुंडई, रेनॉल्ट और फॉक्सवैगन जैसी कंपनियां भारत में बड़े निवेश और विस्तार की योजना बना रही हैं।
भविष्य की उम्मीद
ऑटो कंपनियों की योजना और अनुमान यह दर्शाते हैं कि भारत आने वाले सालों में ग्लोबल ऑटो सेक्टर का हब बन सकता है। लोकल डिमांड के साथ-साथ एक्सपोर्ट ग्रोथ के मौके भी निवेशकों के लिए आकर्षक हैं। भारत में यह सेक्टर विदेशी कंपनियों का प्रॉफिट इंजन बन सकता है और आने वाले सालों में और ज्यादा रोजगार और टेक्नोलॉजी निवेश ला सकता है।












