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खुदरा और थोक डीजल की कीमतों के बीच काफी बड़ा अंतर देखने को मिल रहा है। उदाहरण के तौर पर दिल्ली में पेट्रोल पंपों पर डीजल की कीमत करीब 95 रुपये प्रति लीटर है जबकि थोक बिक्री में इसकी कीमत 134 रुपये प्रति लीटर से अधिक बताई जा रही है।

Petrol Diesel News: पेट्रोल और डीजल की बिक्री को लेकर सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। अब औद्योगिक, वाणिज्यिक और संस्थागत उपभोक्ता सामान्य पेट्रोल पंपों से बड़ी मात्रा में डीजल और पेट्रोल नहीं खरीद सकेंगे। सरकार ने इस पर अस्थायी रोक लगा दी है और ऐसे उपभोक्ताओं को अपनी जरूरत का ईंधन केवल अधिकृत थोक बिक्री केंद्रों से खरीदने के निर्देश दिए हैं।
पिछले कुछ समय से कई उद्योग और बड़े संस्थान पेट्रोल पंपों से सीधे डीजल खरीद रहे थे। इसकी सबसे बड़ी वजह खुदरा और थोक कीमतों के बीच का बड़ा अंतर बताया जा रहा है। खुदरा पेट्रोल पंपों पर मिलने वाला डीजल थोक बाजार की तुलना में काफी सस्ता पड़ रहा था। ऐसे में कई बड़े उपभोक्ता थोक केंद्रों की बजाय सीधे पेट्रोल पंपों का रुख करने लगे थे। सरकार को आशंका थी कि यदि यही स्थिति जारी रही तो आम लोगों के लिए ईंधन की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है। इसी को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया गया है ताकि पेट्रोल पंपों पर आम उपभोक्ताओं को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।
जानकारों के अनुसार, खुदरा और थोक डीजल की कीमतों के बीच काफी बड़ा अंतर देखने को मिल रहा है। उदाहरण के तौर पर दिल्ली में पेट्रोल पंपों पर डीजल की कीमत करीब 95 रुपये प्रति लीटर है जबकि थोक बिक्री में इसकी कीमत 134 रुपये प्रति लीटर से अधिक बताई जा रही है। यही अंतर कई उद्योगों और व्यावसायिक संस्थानों को खुदरा पेट्रोल पंपों से ईंधन खरीदने के लिए आकर्षित कर रहा था। इससे कई क्षेत्रों में मांग अचानक बढ़ गई और आपूर्ति व्यवस्था पर असर पड़ने लगा।
सरकार के इस फैसले का सबसे ज्यादा असर उन संस्थानों पर पड़ेगा जो बड़ी मात्रा में डीजल और पेट्रोल का उपयोग करते हैं। इसमें दूरसंचार टावर चलाने वाली कंपनियां, बिजली उत्पादन इकाइयां, फैक्ट्रियां और अन्य बड़े औद्योगिक उपभोक्ता शामिल हैं। अब इन संस्थानों को अपनी जरूरत का ईंधन अधिकृत थोक डिपो या थोक बिक्री केंद्रों से खरीदना होगा। सामान्य वाहन चालकों और आम नागरिकों पर इस फैसले का कोई सीधा असर नहीं पड़ेगा। वे पहले की तरह पेट्रोल पंपों से ईंधन खरीद सकेंगे।
सरकार द्वारा जारी आदेश के अनुसार यह प्रतिबंध अधिकतम 90 दिनों तक लागू रह सकता है। हालांकि स्थिति की समीक्षा के बाद इसे पहले भी हटाया जा सकता है या जरूरत पड़ने पर आगे बढ़ाया जा सकता है। सरकार लगातार ईंधन की उपलब्धता और मांग की निगरानी कर रही है।
ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े जानकारों का कहना है कि पश्चिम एशिया में पैदा हुए तनाव के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखने को मिली थी। इसके बावजूद सरकारी तेल कंपनियों ने आम उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए खुदरा ईंधन कीमतों को नियंत्रित रखा। दूसरी ओर बड़े औद्योगिक उपभोक्ताओं को बाजार आधारित कीमतों पर ईंधन उपलब्ध कराया जाता है। इसी वजह से खुदरा और थोक कीमतों के बीच अंतर बढ़ गया और बाजार में असामान्य स्थिति पैदा हो गई।
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