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वैश्विक बाजार में कच्चे तेल के लगातार महंगे होने से सरकारी तेल कंपनियों पर आर्थिक दबाव बढ़ता जा रहा है। जानकारों का कहना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय हालात जल्द नहीं सुधरे तो आने वाले समय में पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर असर पड़ सकता है।

दुनिया के कई हिस्सों में बढ़ते तनाव का असर अब तेल बाजार पर साफ दिखाई देने लगा है। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और खाड़ी देशों में हुई ताजा बमबारी के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में फिर तेजी आ गई है। ऐसे हालात में आम लोगों को उम्मीद थी कि पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ सकते हैं लेकिन फिलहाल राहत की बात यह है कि देश की सरकारी तेल कंपनियों ने 10 जून को भी ईंधन की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया है। हालांकि, वैश्विक बाजार में कच्चे तेल के लगातार महंगे होने से सरकारी तेल कंपनियों पर आर्थिक दबाव बढ़ता जा रहा है। जानकारों का कहना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय हालात जल्द नहीं सुधरे तो आने वाले समय में पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर असर पड़ सकता है।
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने एक बार फिर वैश्विक तेल बाजार की चिंता बढ़ा दी है। खाड़ी क्षेत्र में हाल ही में हुई घटनाओं के बाद निवेशकों की नजरें ऊर्जा बाजार पर टिकी हुई हैं। इसी वजह से बुधवार सुबह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी दर्ज की गई। ब्रेंट क्रूड और डब्ल्यूटीआई क्रूड दोनों के दामों में बढ़ोतरी देखने को मिली। भारत के लिए सबसे अहम इंडियन बास्केट क्रूड की कीमत भी लगातार ऊपर जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है तो इसका असर देश की अर्थव्यवस्था और आम लोगों की जेब पर भी पड़ सकता है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने के बावजूद देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों को फिलहाल स्थिर रखा गया है। सरकारी तेल कंपनियों ने बुधवार को भी किसी तरह का बदलाव नहीं किया। इससे वाहन चालकों और आम उपभोक्ताओं को कुछ राहत जरूर मिली है। हालांकि, बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि यदि कच्चे तेल की कीमतें लगातार बढ़ती रहीं तो तेल कंपनियों के लिए लंबे समय तक कीमतों को स्थिर रखना आसान नहीं होगा।
ईंधन की कीमतें भले ही अभी स्थिर हैं लेकिन पिछले महीने लोगों को कई बार बढ़े हुए दामों का सामना करना पड़ा था। मई महीने में विधानसभा चुनाव खत्म होने के बाद तेल कंपनियों ने कई चरणों में पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ाए थे। कुछ ही दिनों के भीतर कई बार कीमतों में बढ़ोतरी हुई जिससे आम लोगों का मासिक बजट प्रभावित हुआ। खासतौर पर उन लोगों पर इसका असर ज्यादा पड़ा जो रोजाना निजी वाहनों का इस्तेमाल करते हैं।
देश के बड़े शहरों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में आज कोई बदलाव नहीं हुआ है। दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, लखनऊ, नोएडा, पटना और भोपाल समेत सभी प्रमुख शहरों में कल वाले ही रेट लागू हैं। अलग-अलग राज्यों में लगने वाले टैक्स और वैट के कारण कीमतों में अंतर देखने को मिलता है। उत्तर प्रदेश के नोएडा और लखनऊ में पेट्रोल की कीमत 102 रुपये के आसपास बनी हुई है जबकि मुंबई और भोपाल जैसे शहरों में पेट्रोल की कीमत 110 रुपये से ऊपर चल रही है। वहीं डीजल की कीमत भी अलग-अलग शहरों में अलग स्तर पर बनी हुई है।
कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का सबसे ज्यादा असर तेल कंपनियों पर पड़ रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में खरीद महंगी हो रही है जबकि घरेलू बाजार में कीमतें स्थिर रखी जा रही हैं। इस वजह से लागत और बिक्री मूल्य के बीच का अंतर लगातार बढ़ रहा है। बाजार से जुड़े जानकारों का अनुमान है कि सरकारी तेल कंपनियों को रोजाना सैकड़ों करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ उठाना पड़ रहा है। इसमें पेट्रोल, डीजल, रसोई गैस और विमान ईंधन भी शामिल हैं। यदि वैश्विक स्तर पर तनाव कम नहीं हुआ तो यह दबाव और बढ़ सकता है।
आज के डिजिटल दौर में पेट्रोल और डीजल की कीमत जानना बेहद आसान हो गया है। तेल कंपनियां अपने ग्राहकों को SMS सेवा भी उपलब्ध कराती हैं। इसके जरिए कुछ ही सेकंड में अपने शहर का ताजा रेट मोबाइल पर प्राप्त किया जा सकता है। इसके अलावा कंपनियों की आधिकारिक वेबसाइट और मोबाइल ऐप पर भी रोजाना नए रेट अपडेट किए जाते हैं। इसलिए वाहन में ईंधन भरवाने से पहले ताजा कीमत जरूर जांच लें।
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