इसके बाद अब ऐसा नहीं होगा कि आपका क्रेडिट स्कोर सुधरे और बैंक सालों तक चुप बैठा रहे। जो ग्राहक समय पर EMI भरते हैं और जिनका क्रेडिट स्कोर मजबूत है, उन्हें पहले के मुकाबले ज़्यादा जल्दी और सीधे तौर पर कम ब्याज दर का फायदा मिल सकेगा।

RBI Spread Rule Change : अगर आप अपना पहला घर खरीदने का सपना देख रहे हैं या पहले से होम लोन की किस्तें भर रहे हैं, तो आरबीआई का नया फैसला आपके लिए किसी ‘गुड न्यूज़ अलर्ट’ से कम नहीं है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने फ्लोटिंग-रेट लोन पर लगने वाले स्प्रेड के नियमों में बड़ा बदलाव किया है। इसके बाद अब ऐसा नहीं होगा कि आपका क्रेडिट स्कोर सुधरे और बैंक सालों तक चुप बैठा रहे। जो ग्राहक समय पर EMI भरते हैं और जिनका क्रेडिट स्कोर मजबूत है, उन्हें पहले के मुकाबले ज़्यादा जल्दी और सीधे तौर पर कम ब्याज दर का फायदा मिल सकेगा।
होम लोन ही नहीं, ज्यादातर फ्लोटिंग–रेट लोन की ब्याज दर असल में दो हिस्सों से मिलकर बनती है। पहला हिस्सा होता है एक्सटर्नल बेंचमार्क जैसे RBI का रेपो रेट, टी–बिल यील्ड वगैरह, जो बाज़ार की बड़ी तस्वीर से जुड़ा रहता है। दूसरा हिस्सा है स्प्रेड, जिसे बैंक अपने खर्च, आपके क्रेडिट रिस्क और मुनाफे को ध्यान में रखते हुए जोड़ते हैं। अब तक खेल यह था कि बैंक आम तौर पर हर तीन साल में ही स्प्रेड की समीक्षा करते थे। मतलब बीच में आपका क्रेडिट स्कोर चाहे जितना अच्छा हो जाए, बैंक पर स्प्रेड घटाने की कोई मजबूरी नहीं थी। आरबीआई के नए नियमों ने इसी ‘लॉक–इन पीरियड’ की जंजीर तोड़ी है। अब जैसे ही किसी ग्राहक का क्रेडिट स्कोर बेहतर होता है, बैंक उसके लोन पर लगने वाला स्प्रेड कम कर सकते हैं और इसका सीधा असर दिखेगा ।
आरबीआई ने साफ संदेश दे दिया है कि सिर्फ चुपचाप बैठे रहने से सस्ता होम लोन अपने–आप नहीं मिलने वाला, इसके लिए कदम आपको ही बढ़ाना होगा। सबसे पहले तो आपको अपने क्रेडिट स्कोर पर नियमित नज़र रखनी होगी। अगर लोन लेने के बाद आपका स्कोर पहले से बेहतर हो गया है, तो अगला कदम आपका है आप अपने बैंक को इंट्रेस्ट रेट रिव्यू के लिए लिखित तौर पर रिक्वेस्ट कर सकते हैं। इसके बाद बैंक आपकी पूरी क्रेडिट प्रोफाइल और रीपेमेंट हिस्ट्री का दोबारा आकलन करेगा। अगर बैंक की नज़र में आपका रिस्क अब कम हो चुका है, तो वह या तो आपके लोन पर लगने वाला स्प्रेड घटाकर ब्याज दर नीचे ला सकता है, या फिर लोन की अवधि कम करके कुल ब्याज का बोझ हल्का कर सकता है। दोनों ही हालात में फायदा आपके ही नाम लिखा है – या तो हर महीने की किस्त कम होगी, या फिर वही किस्त चुकाते–चुकाते लोन पहले खत्म हो जाएगा।
होम लोन आमतौर पर लंबे समय के लिए लिया जाता है और रकम भी 50–60 लाख रुपये या उससे ज़्यादा तक पहुंच जाती है। ऐसे में अगर ब्याज दर में सिर्फ 0.25% (25 बेसिस प्वाइंट) की ही कमी हो जाए, तो भी महीने की ईएमआई में सीधे हजारों रुपये की बचत हो सकती है। अगर आपका क्रेडिट स्कोर लगातार अच्छा रहता है या और बेहतर होता है, तो आगे चलकर यह बचत और भी बढ़ सकती है।
अभी तक होता यह था कि: नए ग्राहक – बैंक कम रेट वाली नई स्कीम लेकर आते तो नए ग्राहकों को उसका फायदा तुरंत मिल जाता। पुराने ग्राहक – उन्हें वही फायदा पाने के लिए स्प्रेड रिव्यू या रीप्राइसिंग के नाम पर 3 साल तक इंतज़ार करना पड़ता था। आरबीआई के नए नियमों के बाद अब मौजूदा और नए दोनों तरह के ग्राहकों को समान मौका मिलेगा। जैसे ही किसी मौजूदा ग्राहक के क्रेडिट स्कोर में सुधार दिखेगा, वह भी तुरंत कम ब्याज दर की मांग कर सकता है।