शेयर बाजार में तगड़ा झटका! कौन-कौन से स्टॉक्स सबसे ज्यादा गिरे?

शुक्रवार की सुबह शेयर बाजार में निवेशकों को बड़ा झटका लगा। खुलते ही सेंसेक्स 550 अंकों तक गिर गया और निफ्टी 24600 के महत्वपूर्ण स्तर से नीचे खिसक गया। विदेशी बाजारों के कमजोर संकेत और निवेशकों द्वारा की गई मुनाफावसूली गिरावट के मुख्य कारण माने जा रहे हैं।

Stock Market Crash
सेंसेक्स और निफ्टी में बड़ी गिरावट
locationभारत
userअसमीना
calendar06 Mar 2026 11:29 AM
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शुक्रवार की सुबह शेयर बाजार ने निवेशकों को निराश कर दिया। जैसे ही कारोबार शुरू हुआ बाजार में बिकवाली का दबाव साफ दिखाई देने लगा। शुरुआती मिनटों में ही प्रमुख सूचकांक तेजी से नीचे खिसक गए और निवेशकों की उम्मीदों पर पानी फिर गया। विदेशी बाजारों से मिले कमजोर संकेत और निवेशकों की मुनाफावसूली ने बाजार की चाल को कमजोर बना दिया। नतीजा यह हुआ कि सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन की शुरुआत ही गिरावट के साथ हुई।

खुलते ही सेंसेक्स में तेज गिरावट

सुबह बाजार खुलते ही BSE Sensex में बड़ी गिरावट देखने को मिली। गुरुवार को मजबूत स्तर पर बंद होने वाला सेंसेक्स शुक्रवार को गिरावट के साथ खुला और कुछ ही समय में करीब 550 अंकों तक फिसल गया। इसे तकनीकी भाषा में गैप-डाउन ओपनिंग कहा जाता है जो यह दिखाता है कि बाजार खुलने से पहले ही निवेशकों में बेचने का रुझान बढ़ चुका था। शुरुआती कारोबार में यह गिरावट लगातार जारी रही और बाजार लाल निशान में बना रहा।

निफ्टी भी अहम स्तर से नीचे

इसी तरह Nifty 50 ने भी निवेशकों को निराश किया। पिछले सत्र में मजबूत बंद होने के बावजूद निफ्टी ने शुक्रवार को कमजोरी के साथ शुरुआत की और जल्दी ही 24,600 के महत्वपूर्ण स्तर से नीचे आ गया। यह स्तर तकनीकी रूप से काफी अहम माना जाता है इसलिए इसके नीचे जाने से बाजार में कमजोरी का संकेत और भी स्पष्ट हो गया।

इन सेक्टरों में दिखी सबसे ज्यादा बिकवाली

इस गिरावट में सबसे ज्यादा दबाव बैंकिंग, ऑटो और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर के शेयरों पर देखने को मिला। ICICI Bank में करीब 2.6% तक गिरावट दर्ज की गई। इसके अलावा InterGlobe Aviation, Larsen & Toubro, UltraTech Cement और Tata Steel जैसे बड़े शेयरों में भी अच्छी-खासी बिकवाली देखने को मिली। इसके साथ ही HDFC Bank, Maruti Suzuki, Adani Ports और Bajaj Finance जैसे दिग्गज शेयर भी दबाव में नजर आए।

आईटी सेक्टर ने दी थोड़ी राहत

हालांकि बाजार में चारों तरफ गिरावट के माहौल के बीच आईटी सेक्टर ने थोड़ी राहत जरूर दी। HCLTech, Infosys, Tech Mahindra और Tata Consultancy Services के शेयरों में हल्की तेजी देखने को मिली। इसके अलावा Reliance Industries और Bharat Electronics Limited जैसे शेयरों ने भी बाजार को कुछ हद तक संभालने की कोशिश की।

गिरावट की वजह क्या मानी जा रही है?

विशेषज्ञों का मानना है कि विदेशी बाजारों से मिले कमजोर संकेत और निवेशकों की मुनाफावसूली इस गिरावट के पीछे मुख्य कारण हैं। पिछले कुछ दिनों से बाजार में अच्छी तेजी देखने को मिली थी ऐसे में कई निवेशकों ने मुनाफा बुक करना सही समझा। इसके अलावा वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों को लेकर बनी अनिश्चितता भी बाजार के मूड को प्रभावित कर रही है।

निवेशकों के लिए क्या संकेत?

बाजार की इस गिरावट ने यह साफ कर दिया है कि शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव हमेशा बना रहता है। ऐसे समय में निवेशकों को घबराने की बजाय सोच-समझकर फैसले लेने की जरूरत होती है। विशेषज्ञ अक्सर सलाह देते हैं कि लंबी अवधि के निवेशक बाजार की छोटी-मोटी गिरावट से परेशान न हों और अपने निवेश को संतुलित तरीके से बनाए रखें।

Disclaimer: ये आर्टिकल सिर्फ जानकारी के लिए है और इसे किसी भी तरह से इंवेस्टमेंट सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए। चेतना मंच अपने पाठकों और दर्शकों को पैसों से जुड़ा कोई भी फैसला लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकारों से सलाह लेने का सुझाव देता है।

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आसमान छूने को तैयार पेट्रोल-डीजल के दाम? सरकार ने दिया बड़ा अपडेट

भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों को लेकर लोगों के बीच कई तरह की चर्चाएं चल रही हैं, खासकर मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और वैश्विक बाजार में अनिश्चितता के कारण। कई शहरों में पेट्रोल पंपों पर अचानक भीड़ भी देखने को मिली जिससे लोगों में ईंधन की कमी की आशंका बढ़ गई।

petrol diesel price
भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम
locationभारत
userअसमीना
calendar06 Mar 2026 11:08 AM
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मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और वैश्विक तेल बाजार में अनिश्चितता की खबरों के बीच भारत के कई शहरों में अचानक पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें देखने को मिलीं। सोशल मीडिया और अफवाहों ने लोगों में यह डर पैदा कर दिया कि कहीं देश में पेट्रोल-डीजल की कमी न हो जाए या कीमतें अचानक न बढ़ जाएं। इसी आशंका के कारण कई जगह लोगों ने जरूरत से ज्यादा ईंधन भरवाना शुरू कर दिया। हालांकि सरकार और अधिकारियों ने साफ कर दिया है कि मौजूदा हालात में देश में ईंधन की सप्लाई और कीमतों को लेकर घबराने की कोई जरूरत नहीं है।

अफवाहों के बीच सरकार का भरोसा

सरकारी सूत्रों का कहना है कि भारत में पेट्रोलियम उत्पादों की उपलब्धता पूरी तरह नियंत्रण में है। सरकार लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है और विभिन्न देशों तथा कंपनियों के साथ बातचीत कर रही है ताकि सप्लाई चेन पर कोई असर न पड़े। अधिकारियों ने यह भी कहा कि लोगों को अफवाहों से दूर रहना चाहिए और अनावश्यक रूप से पेट्रोल पंपों पर भीड़ नहीं लगानी चाहिए। सरकार की प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि घरेलू बाजार में ईंधन की कमी न हो और कीमतों में अचानक बढ़ोतरी से आम लोगों पर बोझ न पड़े।

रूस से तेल खरीद जारी रहने की रणनीति

सूत्रों के अनुसार भारत रूस से कच्चा तेल खरीदना जारी रखेगा। इससे देश की तेल आपूर्ति मजबूत बनी रहेगी और अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतार-चढ़ाव का असर कम होगा। रूस से आयात होने वाला तेल पिछले कुछ समय से भारत की ऊर्जा जरूरतों को संतुलित रखने में अहम भूमिका निभा रहा है।

अमेरिका की 30 दिन की राहत

इसी बीच अमेरिका ने भारतीय कंपनियों को रूसी तेल खरीदने के लिए अस्थायी रूप से 30 दिनों की छूट देने का फैसला किया है। अमेरिकी वित्त मंत्री ने कहा कि वैश्विक बाजार में तेल की आपूर्ति को बनाए रखने के लिए यह कदम उठाया गया है। इस फैसले से भारतीय रिफाइनरियों को फिलहाल कच्चे तेल की खरीद में कोई बड़ी बाधा नहीं आएगी और सप्लाई चेन स्थिर रहने में मदद मिलेगी।

देश के पास कितना है तेल भंडार?

सरकारी सूत्रों के मुताबिक भारत के पास इस समय कच्चे तेल और रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पादों का लगभग 25 दिनों का भंडार मौजूद है। इसके अलावा सरकार वैकल्पिक स्रोतों से कच्चा तेल, एलपीजी और एलएनजी आयात करने की संभावनाओं पर भी काम कर रही है। इसका मकसद यह है कि यदि किसी क्षेत्र में आपूर्ति बाधित होती है तो अन्य स्रोतों से जरूरत पूरी की जा सके।

कीमतों को लेकर क्या है योजना?

अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ाने की कोई योजना नहीं है। सरकार और तेल कंपनियां अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिति पर नजर रखते हुए कीमतों को स्थिर रखने की कोशिश कर रही हैं। पेट्रोलियम मंत्रालय भी लगातार बैठकों के जरिए आपूर्ति और स्टॉक की समीक्षा कर रहा है ताकि किसी भी संभावित संकट से पहले तैयारी की जा सके।

घबराहट नहीं समझदारी जरूरी

विशेषज्ञों का मानना है कि पैनिक बायिंग किसी भी स्थिति को और मुश्किल बना सकती है। जब लोग जरूरत से ज्यादा ईंधन खरीदने लगते हैं तो कृत्रिम कमी का माहौल बन जाता है। ऐसे में सरकार और तेल कंपनियों की अपील है कि लोग सामान्य तरीके से ईंधन खरीदें और अफवाहों पर भरोसा न करें।

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सरकारी कर्मचारियों के लिए बड़ी खुशखबरी, सैलरी में हो सकता है तगड़ा इजाफा

8th Pay Commission: केंद्रीय कर्मचारियों के लिए बड़ी खुशखबरी है। आठवें वेतन आयोग के तहत बेसिक सैलरी में 66% तक का इजाफा संभव है। अगर सरकार परिवार की यूनिट को 3 से बढ़ाकर 5 मान लेती है, तो फिटमेंट फैक्टर में बड़ा बदलाव आएगा। इससे कर्मचारियों की मासिक आय दोगुना तक बढ़ सकती है।

8th Pay Commission
आठवें वेतन आयोग
locationभारत
userअसमीना
calendar05 Mar 2026 04:40 PM
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केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए यह समय उम्मीद भरा लग रहा है। आठवें वेतन आयोग (8th Pay Commission) की तैयारी के बीच कर्मचारियों की बेसिक सैलरी में 66 प्रतिशत तक का बड़ा इजाफा होने की संभावना है। यह बढ़ोतरी केवल इसलिए संभव है क्योंकि कर्मचारी संगठन सरकार से परिवार की यूनिट 3 से बढ़ाकर 5 करने की मांग कर रहे हैं। अगर यह प्रस्ताव स्वीकार हो जाता है तो फिटमेंट फैक्टर में बढ़ोतरी से कर्मचारियों का वेतन लगभग दोगुना हो जाएगा।

पुराने नियम और 1956 का फॉर्मूला

वर्तमान वेतन निर्धारण का ढांचा काफी पुराना है। आज जो बेसिक पे तय होता है वह ‘थ्री फैमिली यूनिट’ के आधार पर तय किया जाता है। यह फॉर्मूला 1956 में हुए इंडियन लेबर कॉन्फ्रेंस में तय किया गया था। तब से सरकार केवल तीन सदस्यों के परिवार को ही वेतन निर्धारण में मानती आ रही है। इस पुरानी प्रणाली के तहत कर्मचारियों की मासिक आय उनके परिवार की वास्तविक जरूरतों को पूरी तरह नहीं दर्शाती। ऐसे में कर्मचारियों ने बदलाव की मांग उठाई है ताकि सैलरी वास्तविक जीवन के हिसाब से तय हो।

क्यों उठाई गई 5 यूनिट की मांग?

समाज और परिवार की संरचना में बदलाव आया है। आज कई परिवारों में बुजुर्ग माता-पिता बच्चों पर निर्भर रहते हैं और न्यूक्लियर फैमिली (एकल परिवार) का चलन भी बढ़ गया है। कर्मचारी संगठनों का तर्क है कि अब परिवार की यूनिट को 3 से बढ़ाकर 5 किया जाना चाहिए ताकि माता-पिता और अन्य सदस्य की देखभाल के खर्च को वेतन में शामिल किया जा सके।

बेसिक पे में 66% तक का इजाफा

इस प्रस्ताव के पीछे गणित बेहद सरल है। जब परिवार की यूनिट बढ़ती है तो फिटमेंट फैक्टर में बढ़ोतरी होती है। वर्तमान नियमों के अनुसार 3 यूनिट पर फैक्टर 1.76 के करीब है। यदि यूनिट बढ़कर 5 हो जाती है तो फैक्टर 2.42 तक पहुंच सकता है। इसका मतलब यह है कि बेसिक पे में लगभग 66 प्रतिशत का उछाल देखने को मिलेगा।

आपके खाते में कितना फायदा?

मान लीजिए कि किसी कर्मचारी की बेसिक पे वर्तमान में ₹78,800 है। अगर पुराना नियम लागू रहा तो वेतन बढ़कर ₹1,38,688 हो सकता है। लेकिन नया नियम लागू हुआ और यूनिट बढ़ाकर 5 कर दी गई तो वही बेसिक पे बढ़कर ₹1,90,676 तक पहुंच सकती है। इसमें महंगाई भत्ता और सालाना इंक्रीमेंट भी शामिल हैं। यह बढ़ोतरी कर्मचारियों के लिए बेहद राहत भरी साबित होगी।

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