RBI Policy: आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने नीति की घोषणा करते हुए कहा कि देश की अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है लेकिन महंगाई को लेकर अभी भी सतर्क रहने की जरूरत है। उन्होंने बताया कि पहली तिमाही में महंगाई अनुमान से थोड़ी कम रही लेकिन आने वाले महीनों में इसमें फिर से बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अपनी नई मौद्रिक नीति (Monetary Policy) का ऐलान कर दिया है। इस बार भी केंद्रीय बैंक ने रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया है यानी रेपो रेट 5.25 फीसदी पर ही कायम रहेगी। इसका सीधा असर उन लोगों पर पड़ेगा जो होम लोन, कार लोन या दूसरे बैंक लोन की EMI कम होने का इंतजार कर रहे थे। फिलहाल उन्हें ब्याज दरों में किसी तरह की राहत नहीं मिलने वाली है। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने नीति की घोषणा करते हुए कहा कि देश की अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है लेकिन महंगाई को लेकर अभी भी सतर्क रहने की जरूरत है। उन्होंने बताया कि पहली तिमाही में महंगाई अनुमान से थोड़ी कम रही लेकिन आने वाले महीनों में इसमें फिर से बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।
इस बार सबसे बड़ा सवाल यही था कि क्या आरबीआई ब्याज दरों में कटौती करेगा लेकिन केंद्रीय बैंक ने रेपो रेट को 5.25 फीसदी पर ही बनाए रखने का फैसला लिया। इसका मतलब है कि बैंकों के लिए आरबीआई से कर्ज लेने की लागत में कोई बदलाव नहीं होगा। ऐसे में बैंकों के लिए भी होम लोन और दूसरे कर्ज की ब्याज दरें तुरंत कम करने की कोई मजबूरी नहीं होगी। अगर आपका होम लोन फ्लोटिंग रेट पर है और आप EMI घटने की उम्मीद कर रहे थे तो फिलहाल आपको इंतजार करना पड़ सकता है।
रेपो रेट स्थिर रहने का सबसे बड़ा असर आम लोगों की जेब पर पड़ेगा। जिन लोगों ने पहले से होम लोन या अन्य फ्लोटिंग रेट वाले लोन ले रखे हैं उनकी EMI में फिलहाल कोई बदलाव नहीं होगा। वहीं, नए लोन लेने वालों को भी मौजूदा ब्याज दरों पर ही कर्ज मिलने की संभावना है। हालांकि, अलग-अलग बैंक अपनी व्यावसायिक जरूरतों के हिसाब से ब्याज दरों में मामूली बदलाव कर सकते हैं लेकिन आरबीआई की ओर से फिलहाल कोई राहत नहीं दी गई है।
आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि हाल के महीनों में खुदरा महंगाई उम्मीद से थोड़ी ज्यादा रही है। इसके पीछे सबसे बड़ी वजह खाने-पीने की चीजों और ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी है। उन्होंने बताया कि आने वाले समय में हेडलाइन महंगाई कुछ और बढ़ सकती है और वित्त वर्ष 2027 की तीसरी तिमाही के दौरान अपने उच्च स्तर तक पहुंचने की संभावना है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि कीमती धातुओं को छोड़कर बाकी क्षेत्रों में मूल महंगाई अभी नियंत्रण में है और पहले के अनुमान के अनुरूप बनी हुई है। इससे यह संकेत मिलता है कि फिलहाल महंगाई पूरे बाजार में तेजी से नहीं फैल रही है।
आरबीआई ने साफ किया कि दुनिया भर के आर्थिक हालात पर उसकी नजर बनी हुई है। गवर्नर ने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव और युद्ध जैसी परिस्थितियां अभी भी वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए चुनौती बनी हुई हैं। इसके बावजूद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियों में सुधार की उम्मीद दिखाई दे रही है। यही वजह है कि आरबीआई फिलहाल संतुलित नीति अपनाते हुए जल्दबाजी में ब्याज दरों में बदलाव नहीं करना चाहता।
जहां ब्याज दरों में कोई राहत नहीं मिली वहीं देश की आर्थिक विकास दर को लेकर अच्छी खबर सामने आई है। आरबीआई ने वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) के लिए भारत की GDP ग्रोथ का अनुमान बढ़ाकर 6.7 फीसदी कर दिया है। इससे पहले यह अनुमान 6.6 फीसदी था। इसके अलावा दूसरी तिमाही (Q2) के लिए भी विकास दर के अनुमान में सुधार किया गया है। इससे यह संकेत मिलता है कि भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत गति से आगे बढ़ रही है और आने वाले महीनों में आर्थिक गतिविधियां बेहतर रहने की उम्मीद है।
इस मौद्रिक नीति से सबसे बड़ा संदेश यह है कि फिलहाल होम लोन, कार लोन और अन्य फ्लोटिंग रेट वाले कर्ज की EMI में कमी की उम्मीद नहीं करनी चाहिए। दूसरी ओर, आरबीआई का मानना है कि अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है और विकास दर में सुधार के संकेत मिल रहे हैं। हालांकि, महंगाई अभी भी चिंता का विषय है इसलिए केंद्रीय बैंक ने ब्याज दरों को स्थिर रखने का फैसला किया है। अगर आने वाले महीनों में महंगाई नियंत्रित होती है तो भविष्य की मौद्रिक नीति बैठकों में ब्याज दरों को लेकर नए फैसले लिए जा सकते हैं।
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