RBI 8 अप्रैल को वित्त वर्ष की पहली मॉनेटरी पॉलिसी का ऐलान करेगा। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार रेपो रेट में बदलाव की संभावना कम है लेकिन RBI के संकेत आने वाले महीनों की दिशा तय कर सकते हैं। यही वजह है कि निवेशकों से लेकर आम लोगों तक सभी की नजर इस बैठक पर टिकी हुई है।

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की अप्रैल मॉनेटरी पॉलिसी बैठक पर इस बार हर आम आदमी की नजर टिकी हुई है। घर की EMI, लोन की किस्त, महंगाई और निवेश इन सब पर इस फैसले का सीधा असर पड़ सकता है। खास बात यह है कि यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब वैश्विक हालात तेजी से बदल रहे हैं, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आया है और महंगाई को लेकर चिंता भी बढ़ी हुई है। ऐसे में लोगों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इस बार EMI कम होगी या फिर मौजूदा बोझ बरकरार रहेगा। RBI 8 अप्रैल को वित्त वर्ष की पहली मॉनेटरी पॉलिसी का ऐलान करेगा। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार रेपो रेट में बदलाव की संभावना कम है लेकिन RBI के संकेत आने वाले महीनों की दिशा तय कर सकते हैं। यही वजह है कि निवेशकों से लेकर आम लोगों तक सभी की नजर इस बैठक पर टिकी हुई है।
महंगाई इस बार RBI के फैसले का सबसे अहम फैक्टर हो सकती है। हाल के महीनों में खाने-पीने की चीजों और कीमती धातुओं की कीमतों में बढ़ोतरी देखने को मिली है। फरवरी में महंगाई बढ़कर 3.2 प्रतिशत तक पहुंच गई थी जो जनवरी के मुकाबले ज्यादा है। हालांकि, महंगाई अभी भी RBI के 4 प्रतिशत लक्ष्य के आसपास बनी हुई है लेकिन वैश्विक हालात और तेल की कीमतों में बढ़ोतरी से आगे जोखिम बढ़ सकता है। इसलिए RBI का नया महंगाई अनुमान यह तय करेगा कि आने वाले समय में ब्याज दरों में राहत मिलेगी या नहीं।
सिर्फ महंगाई ही नहीं बल्कि आर्थिक विकास दर भी RBI के फैसले में अहम भूमिका निभाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक तनाव और महंगे तेल की वजह से आर्थिक ग्रोथ पर थोड़ा असर पड़ सकता है। कई अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2027 में भारत की विकास दर 6.8 प्रतिशत के आसपास रह सकती है जो पिछले साल से थोड़ी कम है। ऐसे में RBI को संतुलन बनाना होगा ताकि विकास भी जारी रहे और महंगाई भी नियंत्रण में रहे।
कच्चे तेल की कीमतें RBI के लिए बड़ी चुनौती बन सकती हैं। हाल ही में ब्रेंट क्रूड की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई थी। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है इसलिए तेल महंगा होने का सीधा असर महंगाई पर पड़ता है। अगर तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं तो RBI के लिए ब्याज दरों में कटौती करना मुश्किल हो सकता है। यही वजह है कि बाजार इस पर RBI की टिप्पणी का इंतजार कर रहा है।
हाल के दिनों में रुपये में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। डॉलर के मुकाबले रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर तक पहुंच गया था हालांकि बाद में इसमें कुछ सुधार भी देखने को मिला। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर तेल महंगा बना रहा तो रुपये पर दबाव जारी रह सकता है। ऐसे में RBI के कदम और संकेत मुद्रा बाजार की दिशा तय करेंगे।
बैंकिंग सिस्टम में लिक्विडिटी की स्थिति भी इस बार RBI के फैसले को प्रभावित कर सकती है। हाल ही में बैंकिंग सिस्टम में अतिरिक्त नकदी घटकर काफी कम हो गई है। RBI पहले ही ओपन मार्केट ऑपरेशन और अन्य उपायों के जरिए सिस्टम में नकदी बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। अगर जरूरत पड़ी तो आगे भी ऐसे कदम उठाए जा सकते हैं जिससे ब्याज दरों पर असर पड़ सकता है।
अगर RBI रेपो रेट में कटौती करता है तो होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन की EMI कम हो सकती है। वहीं अगर दरें स्थिर रहती हैं तो मौजूदा EMI में कोई बदलाव नहीं होगा। इस बार बाजार को भले ही बड़े बदलाव की उम्मीद नहीं है लेकिन RBI के संकेत आने वाले महीनों में ब्याज दरों की दिशा तय करेंगे। इसलिए यह पॉलिसी सिर्फ आज के लिए नहीं बल्कि आने वाले समय की आर्थिक तस्वीर भी साफ करेगी।
RBI की अप्रैल मॉनेटरी पॉलिसी सिर्फ एक आर्थिक फैसला नहीं, बल्कि आम लोगों की जेब से जुड़ा बड़ा संकेत है। EMI से लेकर महंगाई तक हर पहलू इस बैठक से प्रभावित हो सकता है। ऐसे में अब सभी की नजर RBI के फैसले पर है क्योंकि यही तय करेगा कि आने वाले महीनों में राहत मिलेगी या आर्थिक दबाव बना रहेगा।