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RBI Repo Rate: आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बताया कि, छह सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति ने रेपो रेट को 5.25 फीसदी पर बरकरार रखने का फैसला किया है। ऐसे में बैंकों के लिए फंड की लागत पहले जैसी ही रहेगी।

घर खरीदने की योजना बना रहे लोगों से लेकर पहले से होम लोन चुका रहे लाखों ग्राहकों की नजरें शुक्रवार को भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के फैसले पर टिकी थीं। हर किसी के मन में एक ही सवाल था कि क्या इस बार EMI घटेगी या फिर लोन महंगा हो जाएगा। आखिरकार RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक के फैसलों की घोषणा कर दी है। राहत की बात यह है कि केंद्रीय बैंक ने इस बार रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया है। इसका सीधा मतलब है कि फिलहाल आपकी EMI और लोन की ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं होने वाला है।
आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बताया कि, छह सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति ने रेपो रेट को 5.25 फीसदी पर बरकरार रखने का फैसला किया है। ऐसे में बैंकों के लिए फंड की लागत पहले जैसी ही रहेगी। रेपो रेट में बदलाव नहीं होने का सबसे बड़ा असर उन लोगों पर पड़ा है जो होम लोन, कार लोन या पर्सनल लोन चुका रहे हैं। चूंकि रेपो रेट स्थिर रखा गया है इसलिए मौजूदा ग्राहकों की EMI में फिलहाल कोई बढ़ोतरी या कमी नहीं होगी। वहीं नए लोन लेने वालों को भी ब्याज दरों में किसी बड़े बदलाव की उम्मीद नहीं करनी चाहिए।
इस बार की MPC बैठक पर वित्तीय जगत की खास नजर थी। पश्चिम एशिया में जारी तनाव, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और रुपये में कमजोरी जैसे कई कारणों से विशेषज्ञ RBI के फैसले का इंतजार कर रहे थे। ज्यादातर अर्थशास्त्रियों का मानना था कि केंद्रीय बैंक इस बार ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करेगा और आखिरकार वही हुआ।
आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने और कर्ज को सस्ता बनाने के लिए RBI पिछले कुछ समय में रेपो रेट में कुल 1.25 फीसदी यानी 125 बेसिस प्वाइंट की कटौती कर चुका है। इसका फायदा कई लोन धारकों को मिला है। हालांकि इस बार केंद्रीय बैंक ने स्थिति का आकलन करते हुए ब्याज दरों को यथावत रखने का फैसला लिया।
रेपो रेट वह ब्याज दर होती है जिस पर RBI वाणिज्यिक बैंकों को कर्ज देता है। जब RBI रेपो रेट बढ़ाता है तो बैंकों के लिए पैसा महंगा हो जाता है। इसके बाद बैंक होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन की ब्याज दरें बढ़ा सकते हैं। दूसरी ओर जब रेपो रेट घटता है तो बैंकों को सस्ता पैसा मिलता है और वे ग्राहकों को कम ब्याज दर पर लोन देने की स्थिति में आते हैं।
महंगाई को नियंत्रित करने के लिए RBI रेपो रेट का इस्तेमाल एक अहम हथियार के रूप में करता है। जब बाजार में ज्यादा पैसा होता है और महंगाई बढ़ने लगती है तब RBI रेपो रेट बढ़ाकर नकदी के प्रवाह को नियंत्रित करने की कोशिश करता है। वहीं आर्थिक विकास को गति देने के लिए जरूरत पड़ने पर रेपो रेट में कटौती की जाती है।
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