RBI के इस फैसले का सीधा असर लोन लेने वाले ग्राहकों पर पड़ा है। रेपो रेट में बदलाव नहीं होने का मतलब है कि फिलहाल बैंकों की ब्याज दरों में कोई कमी नहीं आएगी। इससे होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन की EMI में भी कोई बदलाव नहीं होगा।

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की अप्रैल मॉनेटरी पॉलिसी का इंतजार इस बार खास तौर पर उन लोगों को था जो होम लोन, कार लोन या पर्सनल लोन की EMI में राहत की उम्मीद लगाए बैठे थे लेकिन RBI ने उम्मीद के मुताबिक रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया और इसे 5.25 फीसदी पर बरकरार रखा। ऐसे में लाखों लोन ग्राहकों को फिलहाल EMI में राहत के लिए थोड़ा और इंतजार करना पड़ेगा। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि अगर महंगाई नियंत्रण में रहती है तो इस साल के दूसरे हिस्से में ब्याज दरों में कटौती की संभावना बन सकती है।
RBI के इस फैसले का सीधा असर लोन लेने वाले ग्राहकों पर पड़ा है। रेपो रेट में बदलाव नहीं होने का मतलब है कि फिलहाल बैंकों की ब्याज दरों में कोई कमी नहीं आएगी। इससे होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन की EMI में भी कोई बदलाव नहीं होगा। हालांकि, पिछले साल फरवरी से अब तक RBI ने रेपो रेट में कुल 1.25 फीसदी की कमी की थी जिससे ग्राहकों को पहले ही कुछ राहत मिल चुकी है लेकिन इस बार RBI ने सावधानी बरतते हुए ब्याज दरों को स्थिर रखने का फैसला लिया है।
RBI की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी की बैठक 6 अप्रैल से शुरू हुई थी जिसके बाद 8 अप्रैल को सुबह 10 बजे RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने फैसलों का ऐलान किया। उन्होंने रेपो रेट को 5.25 फीसदी पर बरकरार रखने की घोषणा की। साथ ही RBI ने अपने न्यूट्रल रुख को भी कायम रखा जिससे यह संकेत मिला कि फिलहाल केंद्रीय बैंक जल्दबाजी में कोई बड़ा फैसला नहीं लेना चाहता।
इस बार RBI के फैसले में वैश्विक हालात का बड़ा असर देखने को मिला। मध्यपूर्व में चल रही लड़ाई और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने महंगाई बढ़ने का खतरा पैदा कर दिया है। अगर तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं तो ट्रांसपोर्टेशन महंगा होगा और इसका असर रोजमर्रा की चीजों की कीमतों पर भी पड़ेगा। इसी वजह से RBI ने फिलहाल ब्याज दरों में कटौती करने से परहेज किया है। केंद्रीय बैंक का फोकस फिलहाल महंगाई को नियंत्रण में रखने पर है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर महंगाई नियंत्रण में रहती है और वैश्विक हालात सामान्य होते हैं तो RBI इस वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में ब्याज दरों में 0.25 फीसदी तक कटौती कर सकता है। हालांकि, यह फैसला पूरी तरह महंगाई के आंकड़ों और आर्थिक स्थिति पर निर्भर करेगा। यानी EMI में राहत की उम्मीद खत्म नहीं हुई है लेकिन इसके लिए अभी कुछ समय का इंतजार करना होगा।
जो लोग नया होम लोन या कार लोन लेने की योजना बना रहे हैं उनके लिए विशेषज्ञों ने फ्लोटिंग रेट वाले लोन को बेहतर विकल्प बताया है। फ्लोटिंग रेट का फायदा यह होता है कि जब भी RBI रेपो रेट घटाता है तो ग्राहकों की ब्याज दर और EMI दोनों कम हो जाती हैं। वहीं फिक्स्ड रेट वाले लोन में यह सुविधा नहीं मिलती। इसलिए मौजूदा हालात में फ्लोटिंग रेट ज्यादा फायदेमंद माना जा रहा है।
RBI द्वारा पिछले साल से की गई 1.25 फीसदी की कटौती का फायदा पहले ही कई ग्राहकों को मिल चुका है। उदाहरण के तौर पर 50 लाख रुपये के लोन पर EMI में हर महीने हजारों रुपये की कमी आई है। इससे ग्राहकों पर वित्तीय दबाव कुछ कम हुआ है। हालांकि, अब RBI के इस नए फैसले के बाद EMI में अगली राहत के लिए लोगों को आने वाले महीनों का इंतजार करना होगा।