विज्ञापन
विशेषज्ञों का मानना है कि अब अमीरी की पहचान सिर्फ इस बात से नहीं होती कि कोई कितना महंगा सामान खरीदता है बल्कि इससे होती है कि वह अपना पैसा किस तरह के अनुभवों पर खर्च करता है। आज के हाई-नेटवर्थ ग्राहक दुनिया देखना चाहते हैं, बेहतर लाइफस्टाइल जीना चाहते हैं और ऐसे अनुभव लेना चाहते हैं।

भारत में अमीर ग्राहकों की सोच और खर्च करने का तरीका तेजी से बदल रहा है। पहले जहां लोग महंगे कपड़े, लग्जरी बैग, गैजेट्स और बड़ी खरीदारी को अपनी पहचान मानते थे वहीं अब तस्वीर बदल रही है। आज के रईस ग्राहक सिर्फ चीजें खरीदने में नहीं बल्कि खास अनुभवों पर पैसा खर्च करना ज्यादा पसंद कर रहे हैं। ट्रैवल, लग्जरी डाइनिंग, वेलनेस रिट्रीट, कॉन्सर्ट और एक्सक्लूसिव इवेंट्स जैसे अनुभव अब उनकी प्राथमिकता बनते जा रहे हैं। यह बदलाव सिर्फ एक फैशन ट्रेंड नहीं है बल्कि रिटेल बाजार के लिए एक बड़ा संकेत है। कंपनियों को अब समझ आ रहा है कि सिर्फ अच्छा प्रोडक्ट बेच देना काफी नहीं है ग्राहक को ऐसा अनुभव देना होगा जिसे वह याद रखे। यही वजह है कि रिटेल सेक्टर अपनी रणनीति तेजी से बदल रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अब अमीरी की पहचान सिर्फ इस बात से नहीं होती कि कोई कितना महंगा सामान खरीदता है बल्कि इससे होती है कि वह अपना पैसा किस तरह के अनुभवों पर खर्च करता है। आज के हाई-नेटवर्थ ग्राहक दुनिया देखना चाहते हैं, बेहतर लाइफस्टाइल जीना चाहते हैं और ऐसे अनुभव लेना चाहते हैं जो उन्हें अलग महसूस कराएं। रिपोर्ट बताती है कि जैसे-जैसे लोगों की आय बढ़ती है वैसे-वैसे रिटेल पर खर्च का हिस्सा कम होता जाता है। उभरते अमीर वर्ग में जहां करीब 50 प्रतिशत खर्च रिटेल पर होता है, वहीं बेहद अमीर लोगों में यह घटकर लगभग 28 प्रतिशत रह जाता है। इसका सीधा मतलब है कि अब लोग खरीदारी से ज्यादा अनुभवों को महत्व दे रहे हैं।
आज कई लोगों के लिए विदेश यात्रा, फाइव स्टार डाइनिंग या किसी खास इवेंट में शामिल होना, महंगे कपड़े खरीदने से ज्यादा खास बन गया है। सोशल मीडिया ने भी इस सोच को काफी बढ़ाया है। लोग अब सिर्फ चीजें दिखाना नहीं चाहते बल्कि अपनी लाइफस्टाइल दिखाना चाहते हैं। एक शानदार ट्रिप, किसी बड़े कॉन्सर्ट की मौजूदगी या किसी वेलनेस रिट्रीट का हिस्सा बनना अब नई पहचान बन गया है। यही कारण है कि ट्रैवल और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर तेजी से मजबूत हो रहे हैं जबकि पारंपरिक रिटेल को नई चुनौती मिल रही है।
हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि अमीर लोगों ने महंगे सामान खरीदना बंद कर दिया है। प्रीमियम शॉपिंग अब भी मजबूत बनी हुई है। फर्क सिर्फ इतना है कि अब खरीदारी सोच-समझकर और चुनिंदा तरीके से हो रही है। आंकड़ों के अनुसार, हर चार में से तीन अमीर भारतीय हर तिमाही में कम से कम एक महंगी खरीद जरूर करते हैं। वहीं हर चार में से एक व्यक्ति हर दो हफ्ते में कोई प्रीमियम प्रोडक्ट खरीदता है। ज्वेलरी, हाई-एंड स्मार्टफोन, लग्जरी वॉच और प्रीमियम गैजेट्स पर खर्च लगातार बढ़ रहा है। यानी खरीदारी खत्म नहीं हुई है लेकिन उसका तरीका बदल गया है।
इस नए ट्रेंड ने कंपनियों को भी अपनी सोच बदलने पर मजबूर कर दिया है। अब सिर्फ प्रोडक्ट को शेल्फ पर सजाकर बेच देना काफी नहीं है। ग्राहक चाहता है कि उसे खरीदारी के दौरान खास महसूस कराया जाए। इसी वजह से कई ब्रांड्स अपने स्टोर्स को नए तरीके से डिजाइन कर रहे हैं। पर्सनलाइज्ड सर्विस, इंटरएक्टिव डिस्प्ले, प्राइवेट शॉपिंग एक्सपीरियंस और इमर्सिव वातावरण जैसे बदलाव तेजी से बढ़ रहे हैं। कंपनियां चाहती हैं कि ग्राहक सिर्फ खरीदारी न करे बल्कि वहां समय बिताए और दोबारा लौटकर आए।
पहले मॉल का मतलब था कपड़े, जूते और इलेक्ट्रॉनिक्स की खरीदारी लेकिन अब मॉल खुद को ‘एक्सपीरियंस सेंटर’ में बदल रहे हैं। यहां गेमिंग जोन, बॉलिंग, लाइव म्यूजिक, फूड फेस्टिवल, प्रीमियम कैफे और फैमिली एंटरटेनमेंट जैसी सुविधाएं जोड़ी जा रही हैं।
खासकर युवा पीढ़ी ऐसी जगहों को ज्यादा पसंद कर रही है जहां वे सिर्फ खरीदारी नहीं बल्कि पूरा दिन बिताने जैसा अनुभव पा सकें। यही कारण है कि मॉल्स भी अब अपने बिजनेस मॉडल को बदल रहे हैं।
विशेषज्ञ मानते हैं कि यह बदलाव कुछ समय के लिए नहीं है बल्कि लंबे समय तक बाजार को प्रभावित करेगा। रिटेल खत्म नहीं हो रहा, लेकिन उसका रोल जरूर बदल रहा है। अब यह सिर्फ सामान बेचने का जरिया नहीं बल्कि एक बड़े लाइफस्टाइल इकोसिस्टम का हिस्सा बनता जा रहा है। भविष्य में वही ब्रांड सफल होंगे जो ग्राहकों को सिर्फ प्रोडक्ट नहीं बल्कि यादगार अनुभव देंगे। आज का ग्राहक कीमत से ज्यादा एहसास खरीदना चाहता है। यही बदलती सोच रिटेल बाजार के लिए सबसे बड़ी चुनौती भी है और सबसे बड़ा मौका भी।
विज्ञापन