केन्द्रीय वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने यह पूरी जानकारी बृहस्पतिवार को संसद में आर्थिक सर्वेक्षण-2026 पेश करते हुए दी है। वित्तमंत्री ने बताया कि भारतीय मुद्रा में जारी गिरावट भारत की आर्थिक बुनियाद को नहीं दिखाती है। रुपया अपनी क्षमता से कम प्रदर्शन कर रहा है।

Indian currency : भारतीय मुद्रा रुपए को लेकर केन्द्र सरकार का बड़ा दावा सामने आया है। केन्द्र सरकार ने डॉलर के मुकाबले रुपए में आई बड़ी गिरावट का कारण बताया है। हाल ही में रुपया सर्वाधिक गिरकर डॉलर के मुकाबले 92 तक पहुंच गया है। इस गिरावट को रुपए में सबसे बड़ी गिरावट माना जा रहा है। केन्द्र सरकार ने रुपए की गिरावट तथा इस गिरावट के प्रभाव की पूरी जानकारी दे दी है।
केन्द्रीय वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में रुपए में गिरावट के प्रभाव तथा गिरावट के कारण के विषय में विस्तारपूर्वक बताया है। केन्द्रीय वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने यह पूरी जानकारी बृहस्पतिवार को संसद में आर्थिक सर्वेक्षण-2026 पेश करते हुए दी है। वित्तमंत्री ने बताया कि भारतीय मुद्रा में जारी गिरावट भारत की आर्थिक बुनियाद को नहीं दिखाती है। रुपया अपनी क्षमता से कम प्रदर्शन कर रहा है। वित्त मंत्रालय की टीम द्वारा तैयार की गई इस रिपोर्ट का मानना है कि भारतीय मुद्रा की कमजोरी अमेरिकी टैरिफ में वृद्धि के भारतीय अर्थव्यवस्था पर पडऩे वाले प्रभाव को आंशिक रूप से कम करती है। दूसरे शब्दों में कहें तो अमेरिकी टैरिफ बहुत ज्यादा रुपये के गिरावट में योगदान नहीं दे रहा है। इकोनॉमी सर्वे रिपोर्ट में कहा गया है कि निश्चित तौर से इन परिस्थितियों में रुपये में गिरावट होना हानिकारक नहीं है, क्योंकि यह भारतीय वस्तुओं पर अमेरिकी टैरिफ में बढ़ोतरी के प्रभाव को कुछ हद तक कम करता है और कच्चे तेल के आयात की ऊंची कीमतों से महंगाई बढऩे का कोई खतरा नहीं है। हालांकि इससे निवेशकों को संशय जरूर होता है. भारत में निवेश को लेकर निवेशकों की अनिच्छा की जांच करना जरूरी है। सर्वे में कहा गया है कि अर्थव्यवस्था में कैपिटल इनफ्लो और आउटफ्लो में रुकावट के कारण रुपये में कमजोरी हुई है।
इस सर्वे में भारतीय रुपये की कमजोरी का मुकाबला करने के लिए उपाय भी सुझाए गए हैं. इसमें आगे कहा गया है कि भारत को अपने बढ़ते आयात बिल को पूरा करने के लिए पर्याप्त निवेशक रुचि और विदेशी मुद्रा में निर्यात आय उत्पन्न करने की आवश्यकता है। आपको बता दें कि पिछले एक साल में रुपये में 6 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई है, जिससे आयात महंगा और निर्यात सस्ता हो गया है और इस प्रकार भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए कंम्पटीशन बढ चुका है। इस सर्वे में स्वदेशी प्रयासों के साथ निर्यात पर भी फोकस रहने की बात कही गई है। Indian currency