Gold Loan, Home Loan या Car Loan? जानिए आपके लिए कौन सा लोन सही

अगर आपको थोड़े समय के लिए तुरंत पैसे की जरूरत है तो गोल्ड लोन एक आसान विकल्प हो सकता है। इसमें आप अपने सोने के गहने बैंक या एनबीएफसी में गिरवी रखकर लोन ले सकते हैं। आम तौर पर गोल्ड लोन छह महीने या उससे ज्यादा समय के लिए लिया जाता है।

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लोन लेने से पहले जरूरी बातें
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userअसमीना
calendar16 Mar 2026 01:18 PM
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आज के समय में अचानक पैसों की जरूरत पड़ सकती है और ऐसे में लोग गोल्ड लोन, होम लोन, कार लोन या प्रॉपर्टी के बदले लोन जैसे विकल्पों की ओर बढ़ते हैं लेकिन सही जानकारी के बिना लोन लेना कई बार भारी पड़ सकता है। सही जानकारी होने पर आप कम ब्याज दर, आसान EMI और सही अवधि के साथ अपने लिए बेहतर लोन चुन सकते हैं।

शॉर्ट-टर्म जरूरत के लिए गोल्ड लोन

अगर आपको थोड़े समय के लिए तुरंत पैसे की जरूरत है तो गोल्ड लोन एक आसान विकल्प हो सकता है। इसमें आप अपने सोने के गहने बैंक या एनबीएफसी में गिरवी रखकर लोन ले सकते हैं। आम तौर पर गोल्ड लोन छह महीने या उससे ज्यादा समय के लिए लिया जाता है। पूरा बकाया चुका देने के बाद बैंक आपके गहनों को सुरक्षित तरीके से वापस कर देता है। इस तरह का लोन जल्दी उपलब्ध होता है और प्रक्रिया भी काफी आसान होती है।

घर बनाने के लिए कंस्ट्रक्शन लोन

अगर आपके पास पहले से प्लॉट है और आप उस पर घर बनाना चाहते हैं तो बैंक से कंस्ट्रक्शन लोन लिया जा सकता है। इस लोन के लिए जरूरी है कि जमीन मालिक का नाम लोन आवेदन में शामिल हो और रजिस्ट्री के दस्तावेजों में भी दर्ज हो। बैंक इसके बाद ही लोन प्रक्रिया आगे बढ़ाता है। यह लोन आमतौर पर घर बनाने या फ्लैट कंस्ट्रक्शन के लिए इस्तेमाल होता है।

प्रॉपर्टी के बदले लोन (LAP)

लोन अगेंस्ट प्रॉपर्टी, यानी आपके पास मौजूद संपत्ति को गिरवी रखकर मिलने वाला लोन, पर्सनल लोन के मुकाबले सस्ता होता है। इसकी वजह यह है कि बैंक के पास गिरवी संपत्ति होने की वजह से जोखिम कम होता है। ध्यान रखें कि लोन की अवधि जितनी लंबी होगी, EMI उतनी कम होगी लेकिन कुल ब्याज ज्यादा लगेगा। इसलिए वह अवधि चुनें जिसमें किस्त आराम से चुकाई जा सके।

सेकेंड-हैंड कार लोन

पुरानी कार खरीदने के लिए लोन लेने पर ब्याज दर नई कार के मुकाबले थोड़ी ज्यादा हो सकती है। कार खरीदते समय विक्रेता से RC बुक, वैध इंश्योरेंस और इंश्योरेंस क्लेम का रिकॉर्ड अवश्य लें। फाइनेंस कंपनी कार की कीमत का अपना मूल्यांकन भी करती है। सही दस्तावेज़ और मूल्यांकन होने पर ही लोन स्वीकृत होगा।

ज्यादा ब्याज वाला लोन पहले चुकाएं

अगर आपके ऊपर एक से ज्यादा लोन हैं और आप उन्हें जल्दी खत्म करना चाहते हैं तो सबसे पहले ज्यादा ब्याज वाला लोन चुकाना समझदारी भरा कदम होता है। अगर ब्याज दर समान है तो टॉप-अप या रेनोवेशन लोन को पहले चुकाना बेहतर होता है। इस तरह आप लंबी अवधि में ब्याज की बचत कर सकते हैं और अपने फाइनेंसियल स्ट्रेस को कम कर सकते हैं।

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Share Market Crash: क्यों लुढ़के सेंसेक्स और निफ्टी? 5 बड़े कारण आए सामने

सेंसेक्स अपने दिन के हाई से करीब 800 अंक नीचे आ गया जबकि निफ्टी 23,000 के पास कारोबार करता दिखा। मिडिल ईस्ट में जारी तनाव, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली से निवेशकों का मनोबल कमजोर हो गया। आइए जानते हैं कि आखिर क्यों बाजार ने गिरावट का रुख अपनाया।

Sensex Nifty Live Update
सेंसेक्स और निफ्टी क्यों लुढ़क गए?
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userअसमीना
calendar16 Mar 2026 12:28 PM
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भारतीय शेयर बाजारों में सोमवार 16 मार्च को शुरुआती तेजी ज्यादा देर टिक नहीं पाई। सेंसेक्स अपने दिन के हाई से करीब 800 अंक नीचे आ गया जबकि निफ्टी 23,000 के पास कारोबार करता दिखा। मिडिल ईस्ट में जारी तनाव, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली से निवेशकों का मनोबल कमजोर हो गया। आइए जानते हैं कि आखिर क्यों बाजार ने गिरावट का रुख अपनाया।

शुरुआती तेजी के बाद अचानक फिसलाव

बाजार खुलते ही सेंसेक्स 419 अंक की तेजी के साथ 74,983 पर पहुंच गया था। वहीं निफ्टी भी 133 अंक ऊपर 23,284 के स्तर पर ट्रेड कर रहा था लेकिन जैसे ही सुबह 11 बजे के आसपास मुनाफावसूली शुरू हुई सेंसेक्स 399 अंक गिरकर 74,164 पर आ गया। निफ्टी भी 129 अंक फिसलकर 23,021 के करीब पहुंच गया। यानी दिन के उच्च स्तर से दोनों इंडेक्स लगभग 800 अंक नीचे आ गए।

शेयर बाजार में गिरावट के 5 बड़े कारण

1. ग्लोबल बाजारों से मिले कमजोर संकेत

एशियाई बाजारों में सोमवार को गिरावट देखने को मिली। साउथ कोरिया का कोस्पी, जापान का निक्केई 225 और चीन का शंघाई SSE कंपोजिट इंडेक्स लाल निशान में कारोबार कर रहे थे। अमेरिका के शुक्रवार को कमजोर बंद होने का असर भी भारतीय बाजारों पर पड़ा।

2. विदेशी निवेशकों की बिकवाली

विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली बाजार पर दबाव बना रही है। मार्च महीने में अब तक विदेशी निवेशकों ने करीब 56,883 करोड़ रुपये की निकासी की है। शुक्रवार को अकेले ₹10,716 करोड़ के शेयर बिके जिससे बाजार का सेंटीमेंट कमजोर हुआ।

3. कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें

ब्रेंट क्रूड की कीमत लगभग 1% बढ़कर 104.2 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गई। तेल की ऊंची कीमतें भारत जैसे बड़े क्रूड खरीदार देशों के लिए महंगाई और चालू खाता घाटा बढ़ा सकती हैं जो निवेशकों के लिए चिंता का विषय है।

4. मिडिल ईस्ट में तनाव

ईरान, इजराइल और अमेरिका के बीच जारी तनाव ने एनर्जी मार्केट में उथल-पुथल मचा दी है। होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले तेल जहाजों को लेकर भी चिंता बढ़ी है। इस वजह से निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता कम हो गई।

5. रुपये में कमजोरी

डॉलर के मुकाबले रुपये में गिरावट भी बाजार पर दबाव डाल रही है। सोमवार को रुपये ने 13 पैसे गिरकर 92.43 प्रति डॉलर का स्तर छुआ। विदेशी निवेशकों की बिकवाली और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के कारण करेंसी पर दबाव बना हुआ है।

निवेशकों के लिए क्या सीख?

बाजार की लगातार गिरावट के बीच निवेशकों को शांत और सोच-समझकर निर्णय लेना चाहिए। वैश्विक तनाव और तेल कीमतों जैसी वजहों से सेंटीमेंट प्रभावित होता है इसलिए लंबी अवधि का नजरिया और रिस्क मैनेजमेंट इस समय जरूरी है।

डिस्क्लेमरः चेतना मंच यूजर्स को सलाह देता है कि वह कोई भी निवेश निर्णय लेने के पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह लें।

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US-Iran टेंशन के बीच बड़ा उलटफेर, सोना-चांदी की कीमतों में आई गिरावट

हाल ही में यह गिरकर करीब 1,58,400 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया। इस तरह युद्ध शुरू होने के बाद से सोना करीब 3,700 रुपये प्रति 10 ग्राम तक सस्ता हो चुका है। वहीं अगर इसके रिकॉर्ड हाई की बात करें तो सोना अपने उच्च स्तर 1,93,096 रुपये से लगभग 34,000 रुपये से ज्यादा नीचे ट्रेड कर रहा है।

Gold Silver Price
सोने की कीमत में कितनी गिरावट आई
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userअसमीना
calendar16 Mar 2026 11:28 AM
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दुनिया में जब भी युद्ध या बड़ा संकट होता है तो आमतौर पर निवेशक सुरक्षित निवेश की तलाश में सोना और चांदी की तरफ भागते हैं। ऐसे समय में इनकी कीमतें अक्सर तेजी से बढ़ती हैं लेकिन इस बार तस्वीर थोड़ी अलग दिख रही है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़े तनाव और युद्ध जैसी स्थिति के बावजूद सोना-चांदी के दाम बढ़ने के बजाय गिर गए हैं। खासकर चांदी में बड़ी गिरावट देखने को मिली है जिसने निवेशकों को चौंका दिया है।

युद्ध शुरू होते ही चांदी में तेज गिरावट

फरवरी के आखिर में जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हमले शुरू किए तब कमोडिटी मार्केट में चांदी की कीमत काफी ऊंचे स्तर पर थी। 28 फरवरी को एमसीएक्स पर चांदी का वायदा भाव लगभग 2,82,644 रुपये प्रति किलो था। लेकिन अगले कुछ दिनों में कीमतों में लगातार गिरावट आई और पिछले हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन यह 2,59,279 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई। यानी सिर्फ करीब 10 कारोबारी दिनों में चांदी लगभग 23,365 रुपये प्रति किलो सस्ती हो गई। आमतौर पर युद्ध के समय ऐसी गिरावट देखने को नहीं मिलती इसलिए बाजार के जानकार भी इस ट्रेंड पर नजर बनाए हुए हैं।

रिकॉर्ड हाई से बहुत नीचे आ गई चांदी

अगर चांदी के मौजूदा भाव की तुलना इसके रिकॉर्ड स्तर से करें तो गिरावट और भी बड़ी दिखाई देती है। जनवरी के आखिर में पहली बार एमसीएक्स पर चांदी की कीमत 4 लाख रुपये प्रति किलो के पार पहुंची थी और इसने 4,20,048 रुपये का लाइफ टाइम हाई बनाया था। अब मौजूदा कीमत के हिसाब से देखें तो चांदी अपने हाई से करीब 1,60,000 रुपये से ज्यादा सस्ती हो चुकी है। यानी जिन्होंने ऊंचे स्तर पर खरीदारी की थी उनके लिए यह गिरावट काफी बड़ी मानी जा रही है।

सोने के दाम भी दबाव में

केवल चांदी ही नहीं बल्कि सोने की कीमतों में भी कमजोरी देखी गई है। 27 फरवरी को एमसीएक्स पर 24 कैरेट सोने का वायदा भाव 1,62,104 रुपये प्रति 10 ग्राम था लेकिन हाल ही में यह गिरकर करीब 1,58,400 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया। इस तरह युद्ध शुरू होने के बाद से सोना करीब 3,700 रुपये प्रति 10 ग्राम तक सस्ता हो चुका है। वहीं अगर इसके रिकॉर्ड हाई की बात करें तो सोना अपने उच्च स्तर 1,93,096 रुपये से लगभग 34,000 रुपये से ज्यादा नीचे ट्रेड कर रहा है।

आखिर क्यों गिर रहे हैं सोना-चांदी?

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब दुनिया में तनाव बढ़ रहा है तब भी सोना-चांदी की कीमतें क्यों गिर रही हैं। इसके पीछे कुछ बड़े आर्थिक कारण बताए जा रहे हैं। सबसे पहला कारण है कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें। क्रूड ऑयल महंगा होने से दुनिया भर में महंगाई बढ़ने का खतरा पैदा हो जाता है। दूसरा बड़ा कारण है डॉलर की मजबूती। जब डॉलर मजबूत होता है तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना और चांदी पर दबाव बढ़ जाता है। इसके अलावा ऊंची ब्याज दरें भी कीमती धातुओं के लिए अच्छा संकेत नहीं मानी जातीं। ज्यादा ब्याज दर होने पर निवेशक सोना-चांदी की बजाय दूसरे निवेश विकल्पों की तरफ झुक जाते हैं।

आगे क्या हो सकता है?

हालांकि अभी कीमतों में गिरावट देखने को मिल रही है लेकिन कई बाजार विशेषज्ञ मानते हैं कि यह गिरावट लंबी नहीं रह सकती। अगर वैश्विक तनाव और बढ़ता है या आर्थिक अनिश्चितता बनी रहती है तो आने वाले समय में सोना और चांदी फिर से मजबूती दिखा सकते हैं। यही वजह है कि कुछ निवेशक इसे लंबी अवधि के निवेश का मौका भी मान रहे हैं। हालांकि बाजार में निवेश करते समय हमेशा जोखिम को ध्यान में रखना जरूरी होता है और किसी भी फैसले से पहले सही जानकारी और सलाह लेना बेहतर रहता है।

(नोट- सोना-चांदी या गोल्ड-सिल्वर ईटीएफ में निवेश से पहले अपने एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।)

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