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नई टैक्स व्यवस्था में टैक्स स्लैब कम जरूर हैं लेकिन इसमें ज्यादातर टैक्स छूट और डिडक्शन नहीं मिलते। वहीं पुरानी टैक्स रिजीम आज भी उन लोगों के लिए फायदेमंद मानी जाती है जो निवेश करके टैक्स बचाना चाहते हैं। खासकर आयकर अधिनियम का सेक्शन 80C इसमें सबसे अहम भूमिका निभाता है।

हर साल अप्रैल-मई आते ही नौकरीपेशा लोगों और छोटे कारोबारियों के मन में एक ही सवाल घूमने लगता है आखिर टैक्स कैसे बचाया जाए? कई लोग आखिरी समय में जल्दबाजी में निवेश कर देते हैं लेकिन सही जानकारी न होने की वजह से उन्हें उतना फायदा नहीं मिल पाता जितना मिल सकता था। यही कारण है कि टैक्स प्लानिंग को समझदारी से करना बहुत जरूरी माना जाता है। सरकार फिलहाल नई और पुरानी, दोनों टैक्स रिजीम का विकल्प देती है। नई टैक्स व्यवस्था में टैक्स स्लैब कम जरूर हैं लेकिन इसमें ज्यादातर टैक्स छूट और डिडक्शन नहीं मिलते। वहीं पुरानी टैक्स रिजीम आज भी उन लोगों के लिए फायदेमंद मानी जाती है जो निवेश करके टैक्स बचाना चाहते हैं। खासकर आयकर अधिनियम का सेक्शन 80C इसमें सबसे अहम भूमिका निभाता है।
पुरानी टैक्स रिजीम चुनने वाले करदाता सेक्शन 80C के तहत सालाना 1.5 लाख रुपये तक के निवेश पर टैक्स छूट ले सकते हैं। यही वजह है कि ज्यादातर लोग इस सीमा का पूरा फायदा उठाने की कोशिश करते हैं। अच्छी बात यह है कि इस सेक्शन में कई ऐसे विकल्प मौजूद हैं जहां पैसा सिर्फ टैक्स बचाने के लिए नहीं बल्कि भविष्य को सुरक्षित बनाने के लिए भी लगाया जाता है।
अगर कोई व्यक्ति थोड़ा जोखिम लेकर लंबे समय में ज्यादा रिटर्न चाहता है तो ELSS यानी इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम उसके लिए अच्छा विकल्प बन सकती है। यह एक तरह का म्यूचुअल फंड होता है जिसमें निवेश का पैसा शेयर बाजार में लगाया जाता है। इस स्कीम की सबसे बड़ी खासियत इसका तीन साल का लॉक-इन पीरियड है जो 80C के बाकी विकल्पों के मुकाबले सबसे कम माना जाता है। बाजार अच्छा प्रदर्शन करे तो लंबे समय में निवेशकों को बेहतर रिटर्न भी मिल सकता है। हालांकि इसमें बाजार का जोखिम जुड़ा रहता है इसलिए निवेश से पहले अपनी जोखिम क्षमता जरूर समझनी चाहिए।
जो लोग सुरक्षित निवेश चाहते हैं और जोखिम से दूर रहना पसंद करते हैं उनके लिए पब्लिक प्रॉविडेंट फंड यानी PPF एक भरोसेमंद विकल्प माना जाता है। यह सरकार समर्थित योजना है इसलिए इसमें निवेश काफी सुरक्षित माना जाता है। फिलहाल इस स्कीम पर सरकार की ओर से तय ब्याज दर मिलती है। इसकी सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसमें निवेश की गई रकम, मिलने वाला ब्याज और मैच्योरिटी पर मिलने वाला पैसा तीनों टैक्स फ्री होते हैं। लंबे समय के लिए बड़ा फंड तैयार करने में भी यह योजना काफी मददगार साबित होती है।
नेशनल सेविंग सर्टिफिकेट यानी NSC उन लोगों के लिए अच्छा विकल्प है जो बिना जोखिम के तय रिटर्न चाहते हैं। यह योजना पोस्ट ऑफिस के जरिए संचालित होती है और इसमें पांच साल का लॉक-इन पीरियड होता है। इसमें सरकार द्वारा तय ब्याज दर के हिसाब से रिटर्न मिलता है। कई लोग इसे इसलिए पसंद करते हैं क्योंकि इसमें बाजार के उतार-चढ़ाव का असर नहीं पड़ता और निवेश सुरक्षित रहता है। टैक्स बचत के साथ यह एक स्थिर निवेश विकल्प भी माना जाता है।
अगर घर में बेटी है तो सुकन्या समृद्धि योजना टैक्स बचाने के साथ भविष्य की मजबूत तैयारी करने का बेहतरीन तरीका बन सकती है। इस योजना में कम रकम से भी निवेश शुरू किया जा सकता है और इसमें सरकार की ओर से आकर्षक ब्याज दिया जाता है। इस स्कीम की खास बात यह है कि PPF की तरह इसमें भी निवेश, ब्याज और मैच्योरिटी राशि पूरी तरह टैक्स फ्री रहती है। बेटियों की पढ़ाई और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए यह योजना काफी लोकप्रिय मानी जाती है।
कई लोग यह समझते हैं कि अलग-अलग योजनाओं में निवेश करने से उन्हें अलग-अलग टैक्स छूट मिलेगी लेकिन ऐसा नहीं है। सेक्शन 80C के तहत कुल मिलाकर अधिकतम 1.5 लाख रुपये तक की ही टैक्स छूट मिलती है यानी आप चाहें पूरा पैसा एक ही स्कीम में लगाएं या कई विकल्पों में बांट दें कुल सीमा वही रहेगी। इसीलिए निवेश करने से पहले अपने लक्ष्य, जोखिम क्षमता और भविष्य की जरूरतों को समझना जरूरी है। सिर्फ टैक्स बचाने के लिए निवेश करने के बजाय ऐसी योजना चुनना ज्यादा बेहतर माना जाता है जो आगे चलकर आर्थिक मजबूती भी दे सके।
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