सोमवार को बाजार खुलते ही सेंसेक्स में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। सुबह करीब 9:21 बजे तक सेंसेक्स करीब 2,272 अंक टूटकर 76,621 के स्तर पर आ गया। वहीं निफ्टी भी करीब 706 अंक गिरकर 23,743 के स्तर पर कारोबार करता दिखा।

सोमवार सुबह शेयर बाजार खुलते ही निवेशकों को बड़ा झटका लगा। कुछ ही मिनटों में बाजार का माहौल पूरी तरह बदल गया और स्क्रीन पर लाल रंग छा गया। सेंसेक्स और निफ्टी में ऐसी तेज गिरावट आई कि लाखों निवेशकों की पूंजी देखते-देखते कम हो गई। पश्चिम एशिया में बढ़ते युद्ध और कच्चे तेल की तेजी ने बाजार की चिंता को और बढ़ा दिया है। यही वजह है कि निवेशक घबराकर तेजी से शेयर बेचने लगे और बाजार में भारी गिरावट देखने को मिली।
सोमवार को बाजार खुलते ही सेंसेक्स में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। सुबह करीब 9:21 बजे तक सेंसेक्स करीब 2,272 अंक टूटकर 76,621 के स्तर पर आ गया। वहीं निफ्टी भी करीब 706 अंक गिरकर 23,743 के स्तर पर कारोबार करता दिखा। यह गिरावट सिर्फ कुछ कंपनियों तक सीमित नहीं थी बल्कि लगभग हर सेक्टर में बिकवाली का दबाव दिखाई दिया। आईटी, बैंकिंग, ऑटो और मेटल कंपनियों के शेयरों में भी तेज गिरावट देखी गई।
इस गिरावट का सबसे बड़ा असर निवेशकों की कुल संपत्ति पर पड़ा। 6 मार्च 2026 को बीएसई में लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप करीब ₹4,49,68,260.81 करोड़ था। लेकिन 9 मार्च को बाजार खुलते ही यह घटकर लगभग ₹4,35,70,085.27 करोड़ रह गया। इसका मतलब है कि सिर्फ बाजार खुलने के साथ ही निवेशकों की कुल संपत्ति में करीब ₹13.98 लाख करोड़ की कमी आ गई। इतनी बड़ी गिरावट ने छोटे और बड़े दोनों तरह के निवेशकों को चिंता में डाल दिया है।
यह गिरावट अचानक नहीं आई है। इससे पहले शुक्रवार को भी बाजार में कमजोरी देखने को मिली थी। उस दिन सेंसेक्स करीब 1,097 अंक गिरकर 78,918 पर बंद हुआ था जबकि निफ्टी 315 अंक फिसलकर 24,450 के स्तर पर बंद हुआ था। लगातार दो दिनों से बाजार में चल रही गिरावट ने निवेशकों का भरोसा थोड़ा कमजोर कर दिया है। कई निवेशक अब हालात साफ होने का इंतजार कर रहे हैं।
इस बड़ी गिरावट के पीछे सबसे बड़ा कारण पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव है। ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच टकराव तेजी से बढ़ता जा रहा है। खबरों के मुताबिक ईरान ने फारस की खाड़ी में कुछ अहम ठिकानों को निशाना बनाया है जबकि इजरायल ने जवाबी कार्रवाई करते हुए तेहरान के तेल भंडारों पर हमला किया है। इस टकराव से पूरी दुनिया को ऊर्जा सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ गई है। जब भी दुनिया में इस तरह का तनाव बढ़ता है तो उसका असर सीधे वैश्विक बाजारों पर पड़ता है।
इस युद्ध का असर कच्चे तेल की कीमतों पर भी साफ दिखाई दे रहा है। ब्रेंट क्रूड की कीमत बढ़कर 117 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है। भारत जैसे देशों के लिए यह बड़ी चिंता की बात है क्योंकि भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा तेल आयात करता है। जब तेल महंगा होता है तो पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने का खतरा रहता है और इससे महंगाई भी बढ़ सकती है।
सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि एशिया के कई बड़े बाजारों में भी गिरावट देखने को मिली है। कई एशियाई इंडेक्स में 5 से 7 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई है। इससे साफ है कि यह सिर्फ एक देश की समस्या नहीं है बल्कि वैश्विक स्तर पर निवेशकों में डर का माहौल बन गया है।
बाजार के जानकारों का मानना है कि जब भी दुनिया में इस तरह के बड़े भू-राजनीतिक तनाव पैदा होते हैं तो शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ जाता है। ऐसे समय में घबराकर फैसले लेने से नुकसान हो सकता है। निवेशकों को फिलहाल बाजार की स्थिति पर नजर रखनी चाहिए और लंबी अवधि की सोच के साथ निवेश करना ज्यादा सुरक्षित माना जाता है।
डिस्क्लेमरः चेतना मंच यूजर्स को सलाह देता है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने के पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह लें।