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Stock Market: बाजार के खुलते ही निवेशकों को बड़ा झटका लगा। चारों तरफ गिरावट का माहौल था और लगभग हर सेक्टर दबाव में दिखा। कुछ ही मिनटों में शेयर बाजार में ऐसी बिकवाली आई कि निवेशकों की करीब 3 लाख करोड़ से ज्यादा की संपत्ति साफ हो गई।

Stock Market Today: दुनिया के सबसे बड़े आर्थिक फैसलों में से एक ने एक बार फिर बाजार को हिला दिया है। अमेरिका में लिए गए एक फैसले का असर सिर्फ वहां तक सीमित नहीं रहा बल्कि भारत समेत एशिया के शेयर बाजारों में भी तेज गिरावट देखने को मिली। गुरुवार सुबह बाजार खुलते ही निवेशकों को बड़ा झटका लगा जब BSE Sensex और Nifty 50 दोनों तेजी से नीचे गिर गए।
अमेरिकी केंद्रीय बैंक Federal Reserve के चेयरमैन Jerome Powell ने अपने कार्यकाल की आखिरी बैठक में एक बार फिर ब्याज दरों को स्थिर रखने का फैसला किया। यानी उम्मीद के मुताबिक किसी तरह की कटौती नहीं की गई। इस फैसले के पीछे वेस्ट एशिया में बढ़ता तनाव और महंगाई का खतरा बताया गया। लेकिन बाजार को इस फैसले से राहत नहीं मिली। निवेशकों को उम्मीद थी कि दरों में कटौती से बाजार को सहारा मिलेगा लेकिन ऐसा नहीं हुआ और नतीजा सामने गिरावट के रूप में दिखा।
फेड के इस फैसले के बाद अमेरिकी बाजारों में कमजोरी देखने को मिली। Dow Jones कारोबार के दौरान करीब 300 अंक तक गिर गया। इसका असर अगले ही दिन एशियाई बाजारों पर पड़ा। जापान से लेकर हांगकांग तक लगभग सभी बड़े इंडेक्स दबाव में रहे। यही वजह रही कि भारतीय बाजार भी इस ग्लोबल कमजोरी से बच नहीं सके।
गुरुवार को बाजार खुलते ही बड़ी गिरावट दर्ज की गई। सेंसेक्स अपने पिछले बंद 77,496 के मुकाबले गिरकर 77,014 पर खुला और कुछ ही मिनटों में 900 अंक से ज्यादा टूटकर 76,500 के करीब पहुंच गया। निफ्टी की हालत भी अलग नहीं रही। यह 24,177 के स्तर से गिरकर 23,996 पर खुला और जल्द ही 23,864 के आसपास पहुंच गया। इस गिरावट ने साफ कर दिया कि बाजार में डर का माहौल है और निवेशक फिलहाल जोखिम लेने से बच रहे हैं।
बाजार में आई इस तेज गिरावट का असर लगभग हर सेक्टर पर पड़ा। बड़े शेयरों में InterGlobe Aviation, Adani Ports, Mahindra & Mahindra, Reliance Industries और HDFC Bank जैसे स्टॉक्स में गिरावट देखने को मिली। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयर भी इस दबाव से बच नहीं पाए जिससे बाजार की कमजोरी और साफ नजर आई।
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump और फेड चेयरमैन जेरोम पॉवेल के बीच मतभेद लंबे समय से चले आ रहे हैं। ट्रंप हमेशा चाहते रहे हैं कि ब्याज दरें कम रहें ताकि अर्थव्यवस्था तेज़ी से बढ़े और शेयर बाजार में उछाल आए। वहीं पॉवेल का फोकस महंगाई को काबू में रखने पर रहता है भले ही इसके लिए दरों को ऊंचा रखना पड़े। इसी सोच के फर्क की वजह से दोनों के बीच टकराव की खबरें अक्सर सामने आती रही हैं।
आगे बाजार का क्या संकेत है?
मौजूदा हालात बताते हैं कि बाजार अभी कुछ समय तक दबाव में रह सकता है। ग्लोबल संकेत कमजोर हैं, महंगाई का खतरा बना हुआ है और ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता अभी खत्म नहीं हुई है। हालांकि ऐसे समय में लंबे समय के निवेशक अक्सर मौके तलाशते हैं लेकिन फिलहाल बाजार का रुख सतर्क रहने का इशारा दे रहा है।
डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। चेतना मंच की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।
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