ट्रंप ने अपने भाषण में ईरान पर अगले दो से तीन हफ्तों में बहुत जोरदार कार्रवाई की चेतावनी दी। हालांकि उन्होंने युद्ध खत्म करने को लेकर कोई स्पष्ट रोडमैप नहीं दिया लेकिन आक्रामक रुख ने निवेशकों को चिंतित कर दिया। ट्रंप के इस बयान के बाद वैश्विक बाजारों में डर का माहौल बन गया।

गुरुवार की सुबह शेयर बाजार के निवेशकों के लिए भारी झटका लेकर आई। बाजार खुलते ही सेंसेक्स और निफ्टी में तेज गिरावट देखने को मिली और कुछ ही मिनटों में निवेशकों के लाखों करोड़ रुपये डूब गए। बुधवार को जहां बाजार मजबूती के साथ बंद हुआ था वहीं गुरुवार को माहौल पूरी तरह बदल गया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आक्रामक बयान और बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने बाजार का पूरा सेंटीमेंट बिगाड़ दिया। नतीजा यह रहा कि खुलते ही दलाल स्ट्रीट पर भारी बिकवाली शुरू हो गई और बाजार धड़ाम हो गया।
गुरुवार सुबह बाजार खुलते ही सेंसेक्स करीब 1500 अंक गिरकर खुला। शुरुआती कारोबार में ही सेंसेक्स 1,385.82 अंक गिरकर 71,748.50 पर पहुंच गया जबकि निफ्टी 426.40 अंक गिरकर 22,253.00 के स्तर पर आ गया। बाजार में बिकवाली का दबाव इतना ज्यादा था कि कुछ ही मिनटों में निवेशकों को करीब 11 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हो गया। बीएसई का मार्केट कैप जो बुधवार को 422.01 लाख करोड़ रुपये था वह घटकर करीब 412 लाख करोड़ रुपये रह गया। बाजार की चौड़ाई भी बेहद कमजोर रही। लगभग 566 शेयरों में बढ़त दर्ज हुई जबकि 1823 शेयरों में गिरावट देखने को मिली। इससे साफ संकेत मिला कि गिरावट सिर्फ कुछ कंपनियों तक सीमित नहीं रही बल्कि पूरे बाजार पर दबाव बना रहा।
इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का बयान रहा। ट्रंप ने अपने भाषण में ईरान पर अगले दो से तीन हफ्तों में बहुत जोरदार कार्रवाई की चेतावनी दी। हालांकि उन्होंने युद्ध खत्म करने को लेकर कोई स्पष्ट रोडमैप नहीं दिया लेकिन आक्रामक रुख ने निवेशकों को चिंतित कर दिया। ट्रंप के इस बयान के बाद वैश्विक बाजारों में डर का माहौल बन गया। निवेशकों को आशंका है कि अगर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ता है तो इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। यही वजह रही कि एशियाई बाजारों में भी भारी गिरावट देखने को मिली और इसका सीधा असर भारतीय बाजार पर पड़ा।
ट्रंप के बयान के बाद कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला। ब्रेंट क्रूड 4 प्रतिशत से ज्यादा बढ़कर 105 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया जबकि वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट 103 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चला गया। तेल की कीमतों में यह तेजी निवेशकों के लिए चिंता की बड़ी वजह बनी। भारत जैसे देश के लिए महंगा कच्चा तेल सीधे तौर पर महंगाई और चालू खाते के घाटे को बढ़ा सकता है। इससे रुपये पर दबाव बढ़ता है और शेयर बाजार में निवेशकों की धारणा कमजोर होती है। यही वजह रही कि तेल की कीमतों में तेजी के साथ ही बाजार में बिकवाली बढ़ गई।
गुरुवार को भारतीय बाजार ने एशियाई बाजारों की गिरावट को ही दोहराया। जापान का निक्केई और दक्षिण कोरिया का कोस्पी इंडेक्स करीब 4 प्रतिशत तक गिर गए। निवेशकों ने जोखिम से दूरी बनानी शुरू कर दी और सुरक्षित निवेश विकल्पों की तरफ रुख किया। वैश्विक संकेत कमजोर होने से भारतीय बाजार पर दबाव बढ़ गया। खासकर आईटी, बैंकिंग और मेटल सेक्टर के शेयरों में भारी बिकवाली देखने को मिली। इससे बाजार की गिरावट और तेज हो गई।
विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की बिकवाली भी गिरावट की बड़ी वजह बनी। अमेरिका-ईरान तनाव और तेल की कीमतों में उछाल के बीच विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार से पैसे निकालने शुरू कर दिए। एनएसई के आंकड़ों के मुताबिक 1 अप्रैल को विदेशी निवेशकों ने 8,331.15 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। विदेशी निवेशकों की यह बिकवाली बाजार के लिए बड़ा झटका साबित हुई। जब विदेशी निवेशक लगातार बिकवाली करते हैं तो बाजार पर दबाव बढ़ता है और गिरावट तेज हो जाती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक अमेरिका-ईरान तनाव कम नहीं होता तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक संकेतों पर निवेशकों की नजर बनी रहेगी। अगर तनाव और बढ़ता है तो बाजार में और गिरावट देखने को मिल सकती है जबकि तनाव कम होने पर बाजार में सुधार की उम्मीद भी जताई जा रही है। फिलहाल निवेशकों के लिए यह समय सावधानी बरतने का है। बाजार में बढ़ती अनिश्चितता के बीच सोच-समझकर निवेश करना ही बेहतर रणनीति मानी जा रही है।