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इस गिरावट के पीछे सिर्फ एक वजह नहीं बल्कि कई बड़े कारण एक साथ काम कर रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय तनाव, विदेशी निवेशकों की बिकवाली, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और मुनाफावसूली जैसे कई फैक्टर बाजार पर भारी पड़े। ऐसे में निवेशकों के लिए यह समझना जरूरी है कि आखिर बाजार में यह गिरावट क्यों आई।

घरेलू शेयर बाजार में आज सुबह से ही कमजोरी का माहौल देखने को मिला। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों लाल निशान में कारोबार करते नजर आए। निवेशकों के बीच बेचैनी साफ दिखाई दी क्योंकि वैश्विक बाजारों से लेकर कच्चे तेल की कीमतों तक कई ऐसे संकेत मिले जिन्होंने बाजार की चाल बिगाड़ दी। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 800 अंकों से ज्यादा टूट गया जबकि निफ्टी भी 24,100 के करीब पहुंच गया। हालांकि बाद में थोड़ी रिकवरी देखने को मिली लेकिन बाजार का मूड अभी भी कमजोर बना हुआ है। इस गिरावट के पीछे सिर्फ एक वजह नहीं बल्कि कई बड़े कारण एक साथ काम कर रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय तनाव, विदेशी निवेशकों की बिकवाली, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और मुनाफावसूली जैसे कई फैक्टर बाजार पर भारी पड़े। ऐसे में निवेशकों के लिए यह समझना जरूरी है कि आखिर बाजार में यह गिरावट क्यों आई और आगे किन स्तरों पर नजर रखनी चाहिए।
पश्चिम एशिया में हालात अभी भी पूरी तरह शांत नहीं हुए हैं। अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर की खबर जरूर आई लेकिन स्थिति अब भी अनिश्चित बनी हुई है। बातचीत आगे नहीं बढ़ पाने की वजह से निवेशकों में डर बना हुआ है। जब भी दुनिया में भू-राजनीतिक तनाव बढ़ता है उसका सीधा असर शेयर बाजार पर पड़ता है। निवेशक सुरक्षित विकल्पों की ओर भागते हैं और इक्विटी बाजार में बिकवाली बढ़ जाती है।
अमेरिका-ईरान तनाव का सबसे बड़ा असर कच्चे तेल पर पड़ा है। होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बढ़ती चिंता के बीच कच्चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया। भारत जैसे देश के लिए यह बड़ी चिंता की बात है, क्योंकि देश अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। तेल महंगा होने से महंगाई बढ़ने, चालू खाते के घाटे में इजाफा और आर्थिक दबाव की आशंका बढ़ जाती है। यही वजह है कि बाजार ने इस खबर पर नकारात्मक प्रतिक्रिया दी।
वैश्विक बाजारों का असर भारतीय बाजार पर हमेशा देखने को मिलता है। अमेरिका के कुछ इंडेक्स भले ही हरे निशान में बंद हुए हों लेकिन यूरोप और एशिया के बाजारों में भारी दबाव दिखा। जापान, ताइवान, सिंगापुर और इंडोनेशिया जैसे बड़े बाजारों में तेज गिरावट आई। चीन और दक्षिण कोरिया के बाजार भी कमजोर रहे। जब दुनिया भर के बाजार दबाव में हों तो भारतीय बाजार भी इससे बच नहीं पाता।
आमतौर पर जब विदेशी निवेशक बिकवाली करते हैं, तब घरेलू निवेशक बाजार को संभालने की कोशिश करते हैं लेकिन इस बार दोनों तरफ से बिकवाली देखने को मिली। विदेशी संस्थागत निवेशकों ने 22 अप्रैल को 2000 करोड़ रुपये से ज्यादा की बिकवाली की वहीं घरेलू संस्थागत निवेशकों ने भी 1000 करोड़ रुपये से ज्यादा के शेयर बेचे। दोनों तरफ से दबाव आने के कारण बाजार पर असर और गहरा हो गया।
आज सेंसेक्स के डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स की वीकली एक्सपायरी भी है। एक्सपायरी के दिन बाजार में तेज उतार-चढ़ाव आम बात होती है। ट्रेडर्स अपनी पोजिशन बदलते हैं जिससे अचानक तेजी और गिरावट दोनों देखने को मिलती हैं। आज की हलचल में यह फैक्टर भी काफी अहम रहा। India VIX को बाजार की घबराहट का पैमाना माना जाता है। इसमें बढ़त का मतलब है कि बाजार में डर बढ़ रहा है। आज India VIX करीब 1.5 फीसदी से ज्यादा उछलकर 18.59 पर पहुंच गया। इससे साफ है कि निवेशक फिलहाल जोखिम लेने के मूड में नहीं हैं। बढ़ती वोलैटिलिटी के कारण कई लोग जल्दी-जल्दी मुनाफा बुक कर रहे हैं।
पिछले कुछ कारोबारी दिनों में बाजार ने अच्छी तेजी दिखाई थी। निफ्टी इस महीने करीब 10 फीसदी तक मजबूत हुआ था। ऐसे में कई निवेशकों ने इस मौके पर मुनाफा निकालना सही समझा। जब तेजी के बाद बड़ी संख्या में लोग मुनाफावसूली करते हैं तो बाजार पर दबाव बनना स्वाभाविक है। अभी जो गिरावट दिख रही है उसमें यह वजह भी काफी अहम है।
तकनीकी नजरिए से देखें तो निफ्टी के लिए 24,300 का स्तर काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आज यह स्तर टूट जरूर गया लेकिन फिर बाजार इसी के आसपास लौट आया। इसका मतलब है कि बाजार यहां टिकने की कोशिश कर रहा है। अगर नीचे की तरफ 24,100 से 24,000 का स्तर टूटता है, तो गिरावट और तेज हो सकती है। वहीं ऊपर की तरफ 24,500 से 24,600 के बीच मजबूत रेजिस्टेंस है। अगर निफ्टी इस स्तर को पार कर लेता है तो फिर अच्छी तेजी देखने को मिल सकती है। बैंक निफ्टी के लिए 57,500 का स्तर फिलहाल बड़ा रेजिस्टेंस बना हुआ है।
ऐसे समय में घबराकर फैसले लेना नुकसान पहुंचा सकता है। बाजार में उतार-चढ़ाव हमेशा आता रहता है। जरूरी यह है कि निवेशक धैर्य रखें और जल्दबाजी में खरीद-बिक्री से बचें। अगर आप लंबी अवधि के निवेशक हैं तो मजबूत कंपनियों पर भरोसा बनाए रखना बेहतर हो सकता है। वहीं शॉर्ट टर्म ट्रेडर्स को सपोर्ट और रेजिस्टेंस लेवल्स पर खास नजर रखनी चाहिए। फिलहाल बाजार की दिशा काफी हद तक वैश्विक संकेतों और कच्चे तेल की चाल पर निर्भर करेगी। इसलिए आने वाले कुछ दिन निवेशकों के लिए काफी अहम रहने वाले हैं।
डिस्क्लेमर: यूजर्स को चेतना मंच की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।
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