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Stock Market Crash: कारोबार शुरू होते ही सेंसेक्स और निफ्टी दोनों लाल निशान में फिसल गए। निवेशकों के चेहरे पर चिंता इसलिए भी बढ़ गई क्योंकि यह गिरावट सिर्फ तकनीकी वजहों से नहीं बल्कि वैश्विक तनाव, महंगे होते कच्चे तेल और प्रधानमंत्री की हालिया अपील के बाद आई है।

Stock Market Crash: इन दिनों देश का शेयर बाजार भारी दबाव में दिखाई दे रहा है। बाजार में सोमवार को आई बड़ी गिरावट के बाद मंगलवार को भी डर और बेचैनी साफ नजर आई। कारोबार शुरू होते ही सेंसेक्स और निफ्टी दोनों लाल निशान में फिसल गए। निवेशकों के चेहरे पर चिंता इसलिए भी बढ़ गई क्योंकि यह गिरावट सिर्फ तकनीकी वजहों से नहीं बल्कि वैश्विक तनाव, महंगे होते कच्चे तेल और प्रधानमंत्री की हालिया अपील के बाद आई है। यही कारण है कि बाजार में लगातार दूसरे दिन भारी बिकवाली देखने को मिली।
मंगलवार सुबह जैसे ही बाजार खुला बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सेंसेक्स तेज गिरावट के साथ नीचे लुढ़क गया। कुछ ही मिनटों में यह 700 अंक से ज्यादा टूट गया। वहीं निफ्टी भी तेजी से फिसलकर कमजोर स्तर पर पहुंच गया। बाजार में सबसे ज्यादा दबाव आईटी सेक्टर के शेयरों में दिखाई दिया। TCS, Infosys, Tech Mahindra और HCL Tech जैसी बड़ी कंपनियों के शेयर तेजी से नीचे आए। इन कंपनियों में बिकवाली बढ़ने से पूरे बाजार का माहौल कमजोर हो गया।
जानकारों का मानना है कि इस गिरावट के पीछे सिर्फ एक कारण नहीं है बल्कि भारतीय बाजार पर दुनिया में बढ़ता तनाव भी असर डाल रहा है। खासकर मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और होर्मुज स्ट्रेट को लेकर बनी चिंता ने निवेशकों को डरा दिया है। होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे अहम तेल सप्लाई रूट्स में से एक माना जाता है। अगर वहां हालात बिगड़ते हैं तो कच्चे तेल की कीमतें और तेजी से बढ़ सकती हैं। यही डर अब बाजार में दिखाई देने लगा है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें लगातार ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं। जब तेल महंगा होता है, तो इसका असर हर चीज पर पड़ता है। पेट्रोल-डीजल महंगा होता है, ट्रांसपोर्ट खर्च बढ़ता है और महंगाई का दबाव बढ़ने लगता है। निवेशकों को डर है कि अगर यही स्थिति जारी रही तो कंपनियों के मुनाफे पर असर पड़ सकता है। इसी वजह से लोग शेयर बाजार से पैसा निकालकर सुरक्षित निवेश की तरफ बढ़ रहे हैं।
इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील ने भी बाजार में चर्चा तेज कर दी है। प्रधानमंत्री ने हाल ही में लोगों से एक साल तक सोना न खरीदने और पेट्रोल-डीजल का सीमित इस्तेमाल करने की अपील की थी। उन्होंने कहा कि दुनिया में जो हालात बन रहे हैं उन्हें देखते हुए देश को ऊर्जा बचत की तरफ ध्यान देना होगा। पीएम मोदी ने सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल बढ़ाने और जरूरत पड़ने पर वर्क फ्रॉम होम जैसी आदतें अपनाने की सलाह भी दी। प्रधानमंत्री की इस अपील को कई लोग आने वाले समय के संकेत के तौर पर देख रहे हैं।
हालांकि कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि बाजार में गिरावट हमेशा-हमेशा के लिए नहीं रहती। कई बार बड़े वैश्विक घटनाक्रमों के दौरान बाजार अचानक टूटते हैं लेकिन हालात सामान्य होने पर फिर संभल भी जाते हैं। फिलहाल निवेशकों की नजर मिडिल ईस्ट की स्थिति, कच्चे तेल की कीमतों और सरकार की अगली रणनीति पर टिकी हुई है। भारत जैसे बड़े देश के लिए ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता दोनों बेहद अहम हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में सरकार और रिजर्व बैंक के कदम बाजार की दिशा तय कर सकते हैं। अभी के लिए निवेशकों के बीच सतर्कता का माहौल बना हुआ है और हर नई खबर बाजार की चाल बदल रही है।
(नोट- शेयर बाजार में किसी भी तरह के निवेश से पहले अपने मार्केट एक्सपर्ट्स की सलाह जरूर लें।)
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