अगर पूरे मार्च महीने की बात करें तो सेंसेक्स करीब 11.50 फीसदी तक गिर चुका है। इस गिरावट का असर कंपनियों के मार्केट कैप पर भी साफ नजर आया। बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण दो दिनों में ही 18.60 लाख करोड़ रुपये घट गया।

मार्च का महीना शेयर बाजार के निवेशकों के लिए बेहद मुश्किल साबित हुआ। लगातार गिरावट और वैश्विक अनिश्चितताओं ने बाजार की रफ्तार को पूरी तरह धीमा कर दिया। दो दिनों की तेज बिकवाली ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी वहीं पूरे महीने में बाजार की गिरावट ने निवेशकों को बड़ा झटका दिया। बाजार में आई इस गिरावट का असर सिर्फ सूचकांकों तक सीमित नहीं रहा बल्कि निवेशकों की संपत्ति पर भी बड़ा असर पड़ा। आंकड़ों के मुताबिक मार्च महीने में निवेशकों को करीब 51 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है जो हाल के समय में सबसे बड़ी गिरावटों में से एक माना जा रहा है।
शेयर बाजार में लगातार दो दिनों तक भारी बिकवाली देखने को मिली। इस दौरान बीएसई सेंसेक्स में करीब 4 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई। दो ट्रेडिंग सत्रों में सेंसेक्स 3,325 अंकों से ज्यादा टूट गया जिससे निवेशकों में घबराहट का माहौल बन गया। सोमवार को भी बाजार में दबाव जारी रहा और 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 1,635 अंक गिरकर 71,947 के स्तर पर बंद हुआ। बाजार की इस गिरावट ने निवेशकों को भारी नुकसान पहुंचाया और कई सेक्टरों में तेज बिकवाली देखने को मिली।
अगर पूरे मार्च महीने की बात करें तो सेंसेक्स करीब 11.50 फीसदी तक गिर चुका है। इस गिरावट का असर कंपनियों के मार्केट कैप पर भी साफ नजर आया। बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण दो दिनों में ही 18.60 लाख करोड़ रुपये घट गया। वहीं पूरे मार्च महीने में यह नुकसान 51 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा हो गया। बाजार में इस तरह की गिरावट ने निवेशकों का भरोसा कमजोर कर दिया है और जोखिम से बचने की प्रवृत्ति बढ़ गई है।
सेंसेक्स की 30 कंपनियों में कई बड़ी कंपनियों के शेयरों में तेज गिरावट दर्ज की गई। बजाज फाइनेंस, भारतीय स्टेट बैंक, इंटरग्लोब एविएशन, बजाज फिनसर्व, एक्सिस बैंक और कोटक महिंद्रा बैंक के शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट देखने को मिली। वहीं दूसरी ओर पावर ग्रिड एकमात्र कंपनी रही जिसके शेयरों में बढ़त देखने को मिली। बाजार की व्यापक गिरावट का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि बीएसई पर सूचीबद्ध अधिकांश शेयर लाल निशान में बंद हुए।
बाजार में गिरावट सिर्फ कुछ कंपनियों तक सीमित नहीं रही बल्कि लगभग सभी सेक्टरों पर इसका असर पड़ा। ऑटो, एफएमसीजी, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, कैपिटल गुड्स, रियल्टी और बैंकिंग सेक्टर में 2 से 4 फीसदी तक गिरावट देखने को मिली। पीएसयू बैंक इंडेक्स में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज की गई वहीं फाइनेंशियल सर्विसेज, टेलीकॉम और रियल्टी सेक्टर भी दबाव में रहे। बाजार में व्यापक बिकवाली ने निवेशकों की चिंता और बढ़ा दी है।
बाजार की गिरावट के पीछे सबसे बड़ी वजह वैश्विक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी मानी जा रही है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बढ़ गई है। ब्रेंट क्रूड की कीमतों में उछाल आने से निवेशकों का भरोसा कमजोर हुआ है। तेल की कीमतों में तेजी का असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी पड़ता है क्योंकि भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। इससे महंगाई बढ़ने की आशंका भी बढ़ जाती है जो शेयर बाजार पर दबाव डालती है।
मार्च महीने में विदेशी संस्थागत निवेशकों ने भी भारी बिकवाली की। रिपोर्ट्स के मुताबिक इस दौरान विदेशी निवेशकों ने 1 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का निवेश भारतीय बाजार से निकाल लिया। विदेशी निवेशकों की इस बिकवाली ने बाजार में दबाव बढ़ा दिया और निवेशकों की चिंता और गहरी हो गई। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक वैश्विक स्थिति सामान्य नहीं होती तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।
बाजार में आई इस गिरावट के बीच निवेशकों को घबराने की जरूरत नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे समय में लंबी अवधि के निवेशकों को धैर्य रखना चाहिए और जल्दबाजी में फैसले लेने से बचना चाहिए। बाजार में गिरावट अक्सर निवेश के नए अवसर भी लेकर आती है। ऐसे में मजबूत कंपनियों पर नजर बनाए रखना और संतुलित निवेश रणनीति अपनाना बेहतर विकल्प हो सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि बाजार की दिशा अब वैश्विक घटनाओं, तेल की कीमतों और विदेशी निवेशकों के रुख पर निर्भर करेगी। अगर वैश्विक तनाव कम होता है और विदेशी निवेशक वापस आते हैं तो बाजार में सुधार देखने को मिल सकता है। फिलहाल निवेशकों के लिए जरूरी है कि वे बाजार की चाल को समझें, धैर्य बनाए रखें और सोच-समझकर निवेश करें।